मंगलवार, 24 जनवरी 2017

67 saal

67 साल की उम्र और पीरा गढी  से रोहतक रोडवेज़ की बस में शाम 6. 45 पर चढ़ना  और सफर करना अपने आप में एक मजमून है ।  अच्छी बात यह है कि एक नौजवान ने बुजुर्ग मान कर मुझे बैठने को सीट दी । एक महिला  को एक दूसरे नौजवान ने बैठने को सीट दी।  बाकि भीड़ का चाला पाटग्या ।  हिम्मत है सवारियों की के पां टेकण की जगह नहीं फेर हँसते बोलते सफर रोहतक ताहिं का तय कर लिया । 

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