67 साल की उम्र और पीरा गढी से रोहतक रोडवेज़ की बस में शाम 6. 45 पर चढ़ना और सफर करना अपने आप में एक मजमून है । अच्छी बात यह है कि एक नौजवान ने बुजुर्ग मान कर मुझे बैठने को सीट दी । एक महिला को एक दूसरे नौजवान ने बैठने को सीट दी। बाकि भीड़ का चाला पाटग्या । हिम्मत है सवारियों की के पां टेकण की जगह नहीं फेर हँसते बोलते सफर रोहतक ताहिं का तय कर लिया ।
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