सोमवार, 23 जून 2025

नारे

हरियाणा में जल संकट
*दूध दही किसानी और खेलकूद के लिए मशहूर हरियाणा में जल संकट गहराता जा रहा है 
*यहां के कुल 7287 गांव में से 3041 गांव पानी की कमी से जूझ रहे हैं 
*40% गांव संकट में है
* 1948 तो ऐसे गांव है जो गंभीर संकट झेल रहे हैं ..रेड जॉन भूजल गिर रहा है *84% गांव में भूजल स्तर  तेजी से पाताल की ओर जा रहा है
 *1304 गांव ग्रीन जोन में है 


***
हरियाणा की 3 साल की कैंसर रिपोर्ट 2020-2022 के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि 2020 में 29,219, 2021 में 30,015 और 2022 में 30,851 नए कैंसर के मामले सामने आए। इसी प्रकार, 2020 में 16,109, 2021 में 16,543 और 2022 में 16,997 लोगों की कैंसर से मृत्यु हुई।29 Mar 2025

*******
 *हरियाणा कैंसर की घाटी*
 *कैंसर से रोजाना 43 मौतें*
 *83 नए मरीज रोजाना कैंसर के*
 *2024 में 30475 कैंसर के नए मरीज*
 *कुल 915 कैंसर बिस्तर*
 *1 लाख जनसंख्या पर 100 से अधिक कैंसर के केस*
 *हरियाणा कैंसर के मरीजों के हिसाब से देश में तीसरे स्थान पर*
 *सिरसा जिले  के सादेवाला गांव में सबसे ज्यादा कैंसर के मरीज*
 *संक्राम गांव   नूह जिले का सबसे ज्यादा मरीज*

****/
15 से 49 साल की सभी महिलाओं में अनिमिया  (%)
NFHS..5
शहरी 57.4
ग्रामीण 61.9
कुल मिलाकर 60.4
NFHS..40
कुल मिलाकर 62.7
****
 Women age 20 to 24 years married before age 18 years percentage
Urban rural total
 9.9 13.7 12.5
, non pregnant women age 15 to  49 years who are anaemic  less than 12 gram percentage
Urban rural total nfhs5 nfhs4
 57.562.1 60.6 63.1

pregnant women age 15 to  49 years who are anaemic less than 11gm hb
64.6,57.2,56.5,55.0

All women age 15 to  49 years who are anaemic 
57.4,61.8,60.462.7

All women age 15 to  19 years who are anaemic 
Nfhs5220..21 nfhs 4,2015 -16
59.3,63.5,62.3,62.7





किलोई से 67 साल में 1000 राष्ट्रीय व 180 अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकल चुके ।
*****

https://rthresources.in/conversations-on-health-policy/safe-affordable-and-made-in-india-can-we-deliver/

Increasing reports of poor quality of medicines manufactured in India, whether as exports or for domestic consumption, are a matter of great concern. But this crisis should not become an excuse for strengthening corporate monopoly and excessive centralization.  In this conversation, we discuss the why and how of designing a regulatory regime in India, that can guarantee quality medicines without any compromise to affordability or public health, not only for India, but for the entire third world.


लोकसभा चुनाव सीरीज का पार्ट 18 
चंद्र प्रजापति  लेखक
01. सबसे अमीर 0.1  फीसदी लोगों के पास कुल संपत्ति का 70% हिस्सा है 
चंद्र प्रजापति  लेखक
02. नीचे के 50 फीसदी लोगों के पास केवल 6.4 फ़ीसदी संपत्ति है 
चंद्र प्रजापति  लेखक
03. दो सालों में 64 अरबपति पैदा हुए 
चंद्र प्रजापति  लेखक
04. देश के 100 खराबपति के पास 5412 लाख करोड रुपए हैं 
चंद्र प्रजापति  लेखक
05. नीचे की 70 करोड़ जनता की संपत्ति केवल 21 खरबपतियों के बराबर है 
चंद्र प्रजापति  लेखक
06. 60 फीसदी जनता की आमदनी 2 डॉलर प्रति दिन है 
चंद्र प्रजापति  लेखक
07. नीचे की 30 फीसदी जनता की आमदनी एक डॉलर प्रतिदिन है 
चंद्र प्रजापति  लेखक
08. नीचे की 50 फीसदी जनता, जीएसटी का 64 प्रतिशत हिस्सा देती है 
चंद्र प्रजापति  लेखक
09. ऊपर के 10 फीसदी अमीर, केवल तीन फीसदी हिसा देते हैं 
चंद्र प्रजापति  लेखक
10. मुकेश अंबानी की 7.63 लाख करोड़ की संपत्ति है और रोजाना 163 करोड कमाते हैं
चंद्र प्रजापति  लेखक
11. अडानी के पास 6.54 लाख करोड़ की संपत्ति है, रोजाना 1600 करोड कमाते हैं

***//
एक राष्ट्र एक चुनाव तानाशाही पूर्ण केंद्रीय करण को बढ़ावा देगा.
2022 तक अनुसूचित जातियों में बेरोजगारी की दर 8.4% थी और अनुसूचित जातियों के 84% लोग अनौपचारिक रोजगार में थे।
2021 और 2022 के बीच अनुसूचित जातियों एससी के खिलाफ अपराधों में 13% की वृद्धि हुई है उत्तर प्रदेश 26% मामलों के साथ सबसे आगे है.

 *हरियाणा कैंसर की घाटी*
 *कैंसर से रोजाना 43 मौतें*
 *83 नए मरीज रोजाना कैंसर के*
 *2024 में 30475 कैंसर के नए मरीज*
 *कुल 915 कैंसर बिस्तर*
 *1 लाख जनसंख्या पर 100 से अधिक कैंसर के केस*
 *हरियाणा कैंसर के मरीजों के हिसाब से देश में तीसरे स्थान पर*
 *सिरसा जिले  के सादेवाला गांव में सबसे ज्यादा कैंसर के मरीज*
 *संक्राम गांव   नूह जिले का सबसे ज्यादा मरीज*
 *एक बिस्तर 33 कैंसर के मरीजों के लिए*
 *वर्ष 1966 में हरियाणा के गठन के बाद से केवल 87 महिलाएँ विधानसभा के लिये चुनी गई हैं।*

*राज्य में कभी भी कोई महिला मुख्यमंत्री नहीं रही।*

पुरानी यादें


देवी अहिल्याबाई होल्कर भारत के मराठा मालवा राज्य की होलकर रानी थीं। उन्होंने अपनी राजधानी महेश्वर में स्थापित की और अपने शासनकाल के दौरान राज्य को समृद्ध बनाया। 

अहिल्याबाई का जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के चौंडी गांव में हुआ था। उनके पिता मनकोजी राव शिंदे थे। उनका विवाह 10-12 वर्ष की आयु में खंडेराव होलकर से हुआ था। उनतीस वर्ष की अवस्था में विधवा हो गईं। 

अहिल्याबाई ने अपने ससुर मल्हार राव होलकर की मृत्यु के बाद 1767 में रीजेंट के रूप में शासन संभाला और बाद में होलकर राज्य की शासक बनीं। 

उन्होंने राज्य को आक्रमणकारियों से बचाया और अपनी प्रजा की रक्षा के लिए युद्ध में सेनाओं का नेतृत्व किया। 

उन्होंने न्याय, प्रशासन और लोगों की भलाई के लिए कई सुधार किए। 

उन्होंने सामाजिक सुधारों और धर्म के प्रति अपनी निष्ठा दिखाई। 
उन्होंने पूरे भारत में मंदिरों, धर्मशालाओं और अन्य सार्वजनिक निर्माण कार्यों का निर्माण किया। 

उन्होंने महेश्वर में वस्त्र उद्योग स्थापित किया, जो बाद में अपनी महेश्वरी साड़ियों के लिए प्रसिद्ध हुआ। 

उन्होंने संस्कृति, कला और साहित्य को बढ़ावा दिया। 

अहिल्याबाई की मृत्यु 13 अगस्त 1795 को महेश्वर में हुई। उन्हें एक महान शासक, सुप्रभारी और सामाजिक सुधारक के रूप में याद किया जाता है। उनकी न्यायप्रियता, दयालुता, और राष्ट्र के प्रति समर्पण के कारण उन्हें "पुण्यश्लोक" (पवित्र मंत्रों की तरह शुद्ध) कहा जाता  है।






















हरियाणा सामाजिक स्तर

स्वास्थ्य कैंप सैमन 
महम  के सैमन गांव में जन स्वास्थ्य अभियान रोहतक की तरफ से आज  22 जून इतवार को   10.00 बजे से लेकर बाद दोपहर 1.30 बजे तक फ्री हेल्थ कैंप का आयोजन किया गया । जिसमें 47 मरीजों का निरीक्षण किया गया और दवाएं दी गई। ब्लड प्रेशर और शुगर भी टेस्ट किए कुछ मरीजों के। एच बी भी कुछ मरीजों का टेस्ट किया। वजीर सिंह और गान के कई लोगों ने काफी सहयोग दिया ।
निम्नलिखित टीम ने कैंप में हिस्सेदारी की
डॉ मग्गू हड्डी रोग विशेषज्ञ
डॉ भौमिक सिंह जनरल प्रैक्टिशनर 
डॉ रीतू फोगट डेंटिस्ट
डॉ रणबीर दहिया
प्रसन्नता जी नेत्र क्षेत्र 
मधु जी जे एस ए एक्टिविस्ट 
रणबीर कादियान , धर्मवीर राठी, प्रेम सिंह जून, मोहिंदर सिवाच और आजाद सिंह रिटायर्ड फार्मासिस्ट

गुरुवार, 5 जून 2025

लड़ाई ए लड़ाई

लड़ाई ही लड़ाई
थामनै कई ढाल की लड़ाईयां के बारे में पढ्या होगा, सुण्या होगा अर देख्या होगा। घर मैं लड़ाई किसे ना किसे बात पै आपां रोजै करां सां। कितै मां बेटे की तकरार, किते भाई भाईयां मैं मारममार, कितै मुसलमानां पै होन्ते वार, कितै देवर भाभी मैं पड़ै सै दरार। बस बुझो मतना। फेर हिन्दुस्तान मैं एक न्यारे नमूने की लड़ाई शुरू होती दीखै सै। या किसी लड़ाई सै बेरा ना? संसद तै बाहर तै कांग्रेस अर भाजपा एक दूसरे के खून की प्यासी दीखै सै, एक दूसरे की खाट खड़ी करण मैं कसर नहीं छोड़ती फेर संसद मैं दोनूआं की एकै भाषा, एकै राग लागै सै। एक पाछै एक आवण आले विधेयकां - बीमा विधेयक, महिला आरक्षण विधेयक, पेटैंट विधेयक पै तै इन दोनू पार्टियां की गजलोट हुई दीखै सै। पर बीमा आले विधेयक पै भाजपा अर आर.एस.एस. मैं लड़ाई छिड़गी। बेरा ना या दिखावटी सै अक या असली सै? दूसरे कान्हीं अकाली दल मैं बादल अर टोहरा नै हथियार पिना लिये। छूट छुटावण करवाणिये अपने नम्बर बणावते हांडैं सैं। इनका यो बी नकली सौदा सै अक असली सै बेरा ना? एक और चाला देख्या लोगां नै तै बाट थी अक जयललिता वाजपेयी का धुम्मा ठावैगी फेर उसनै तै आपणा ए मोर्चा तोड़ कै धर दिया। ईब डण्ड बैठक काढ़ण लागरी सै बेरा ना किसनै तोड़ैगी अर किसनै बणावैगी? मुलायम सिंह यादव नै कांग्रेस कै खिलाफ तलवार खींच ली अर कांग्रेस नै राबड़ी देवी पै तीर कमाण कर राख्या सै तीर बेरा ना कद कमान मां तै छूटज्या। बीजू जनता दल वाले आपस मैं ए कब्ड्डी घालरे सैं। बेरा ना चाण चक दे सी यो के होग्या? ये नये-नये पाले खींचगे। किसके पाले मैं कौण जा खड़या होगा कुछ नहीं कह्या जा सकदा। गिरगिट की ढालां रंग बदलते वारै कोण्या लान्ते। पहलम आली सारी कतार बन्दियां बदलती दीखै सैं।
इलैक्शनां की जंग कांग्रेस अर भाजपा बिचालै लड़ी गई। कांग्रेस नै राजस्थान, मध्यप्रदेश अर दिल्ली मैं फेर पैर जमा लिये। कैहवणिया तो न्यों बी कहवैं सैं अक या लड़ाई गंठे अर बम्ब के बीच लड़ी गई। पर असल मैं या लड़ाई महंगाई अर जनता के बिचालै लड़ी गई। भाजपा तै महंगाई के रथ पै असवारी होरी थी अर कांग्रेस नै जनता अपणे कान्ध्या पै ठारी थी। तुलसीदास नै भी कह्या सै अक रावण रथी था ज्यां करकै ओ रथ पै सवार था अर रघुवीरा विरथ थे। ऊंह धोरै किसे रथ थे। रघुवीरा तै बांदरां के अर भालुआं के दम पै लड़या था। पर उस लड़ाई मैं तै रथी हारया था अर विरथी जीतया था। म्हारे प्राचीन संस्कृति के वाहक तै बिना रथ के कोए बी लड़ाई कोन्या लड़ते। बेशक वे रघुवीरा के भक्त सै फेर लैक्शन की पाछली लड़ाई तै उननै रथ यात्रा की बदोलतै जीती थी। जै आडवाणी जी रथ पै सवार नहीं होन्ते तो दो सांसद आला यो सीमित सुखी परिवार इतना बड्डा कुणबा क्यूकर बणता? ईब या न्यारी बात सै अक इसतै म्हारी पुराणी संस्कृति गैल्यां खिलवाड़ हुया अक नहीं हुया? इबकै भी आडवाणी जी महंगाई के रथ पै सवार हो लिए। रथ तो रथै हो सै या बात न्यारी सै अक यो पहलड़े रथ बरगा टोयटा आला रथ नहीं था जिसकी तामझाम तै सौ कोस तै बी दीखै थी। पर इबके रथ मैं महंगाई भव्य थी। जिसी आडवाणी जी के रथ नै हा हा मचाई थी कुछ उसे ए ढाल की हालत इस महंगाई नै बणादी। फेर उस हा हाकार नै तो आडवाणी जी पै वोटां की बरसात करदी थी अर इस बर की नै चुनावी हार का तमगा दे दिया।
इस चुनावी लड़ाई पाछै इसा लागण लाग्या था अक ईब साचली लड़ाई शुरू होवैगी। महाभारत का युद्ध जणो तै हटकै नै लड़या जागा। पाले बंदी बदलैगी। नये मोर्चे बनैंगे। सरकारी मोर्चा टूटैगा अर नया मोर्चा सरकार बणावैगा। फेर सरकारी मोर्चा तै न्यों का न्यों सै हां बिचारी जयललिता का मोर्चा जरूर टूटग्या। लोग बाट देखैं थे अक वाजपेई जी आज गया कै काल गया। जयललिता जी तै न्यारा भला और कोण तोड़ सकै सै सरकारी मोर्चे नै? जार्ज साहब तै-समता बेशक टूटो पर भाजपा की सरकार बच ज्याओ - इस अभियान पै जोर तै मंडरे सैं। काम जार्ज ताहिं देश की रक्षा का सौंप राख्या फेर आण्डी रक्षा वाजपेई की सरकार की करण लागरया सै। समता पार्टी मैं कई जणे मंत्री बणन के नाम पै सिंगरे हांडैं सैं फेर नम्बर कोन्या आ लिया सै भाइयां का। वे बड़े दुखी सैं अक जार्ज अर नीतिश कुमार तै मंत्री होगे अर हम सूके के सूके राख राखे सां।
उननै दुख इस बात का भी सै अक वाजपेई जी आपणे तै तीन मंत्री बणा लिये अर बाकी सबनै भूलगे। बड़ा चाला कर दिया। साहब सिंह जी वर्मा नै भूलगे उस तांहि तै उननै अपणें हाथ तै चिट्ठी लिखकै मंत्री बणण का न्यौता दिया था। जै वाजपेई जी न्यों न्यौते निधारां मैं गड़बड़ करैगा तै जनता बिगड़े बिना नहीं मानैगी। फेर वाजपेई जी बी किस किस नै याद राखैं?
एक चीज समझ मैं कोण्या आई इस लड़ाई की अक लड़णा तै भाजपा अर कांग्रेस आई नै चाहिये था। पर ये दोनूं तै नेड़े नेड़े नै आवंते दीखैं अर भाजपा गैल्यां जिननै घी खिचड़ी रैहना चाहिए था वे भाजपा तै दूर होन्ते जावैं सैं, इसकै खिलाफ बोलैं सैं। 11 दिसम्बर की हड़ताल मैं कांग्रेस नै समर्थन करणा चाहिये था पर कोनी करया। जयललिता नै समर्थन करया अर बीजू जनता दल नै करया। संघ परिवार भी इन विधेयकां नै ले कै भाजपा सरकार कै खिलाफ आण डट्या मैदान मैं। इननै तो कठ्ठा रहणा चाहिये था आपणी परंपरा निभाणी चाहिये थी। पर ये आपस मैं लड़ण लागरे सैं। बीजेपी तै अनुशासन आली पार्टी बताई जा थी तो यो चौड़े सड़क पै ईब के होण लागरया सै? यो हो के रहया सै? या किसी लड़ाई सै? न्यों कहया करैं अक झोटे-झोटे लड़ै अर झाड़ां का खोह। इन राजनेतावां नै या जनता ईब झाड़ बोझड़े समझनी छोड़ लेनी चाहिये। जनता रैफरी बण कै इस सारी लड़ाई नै देखण लागरी सै। जनता की रैफरसिप बड़े बड़यां नै रैफरसिप सिखा दे सै फेर भाजपा, कांग्रेस, मुलायम, कांशी अकाली, लालू अर जयललिता किस खेत की मूली सैं? देश की जनता अपणे अनुभव तै सीखण लागरी सै अर एक बख्त इसा जरूर आवैगा जिब जनता की राजनीति करणियां की जीत जरूर होगी।

मंगलवार, 3 जून 2025

अहिल्याबाई


देवी अहिल्याबाई होल्कर भारत के मराठा मालवा राज्य की होलकर रानी थीं। उन्होंने अपनी राजधानी महेश्वर में स्थापित की और अपने शासनकाल के दौरान राज्य को समृद्ध बनाया। 

अहिल्याबाई का जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के चौंडी गांव में हुआ था। उनके पिता मनकोजी राव शिंदे थे। उनका विवाह 10-12 वर्ष की आयु में खंडेराव होलकर से हुआ था। उनतीस वर्ष की अवस्था में विधवा हो गईं। 

अहिल्याबाई ने अपने ससुर मल्हार राव होलकर की मृत्यु के बाद 1767 में रीजेंट के रूप में शासन संभाला और बाद में होलकर राज्य की शासक बनीं। 

उन्होंने राज्य को आक्रमणकारियों से बचाया और अपनी प्रजा की रक्षा के लिए युद्ध में सेनाओं का नेतृत्व किया। 

उन्होंने न्याय, प्रशासन और लोगों की भलाई के लिए कई सुधार किए। 

उन्होंने सामाजिक सुधारों और धर्म के प्रति अपनी निष्ठा दिखाई। 
उन्होंने पूरे भारत में मंदिरों, धर्मशालाओं और अन्य सार्वजनिक निर्माण कार्यों का निर्माण किया। 

उन्होंने महेश्वर में वस्त्र उद्योग स्थापित किया, जो बाद में अपनी महेश्वरी साड़ियों के लिए प्रसिद्ध हुआ। 

उन्होंने संस्कृति, कला और साहित्य को बढ़ावा दिया। 

अहिल्याबाई की मृत्यु 13 अगस्त 1795 को महेश्वर में हुई। उन्हें एक महान शासक, सुप्रभारी और सामाजिक सुधारक के रूप में याद किया जाता है। उनकी न्यायप्रियता, दयालुता, और राष्ट्र के प्रति समर्पण के कारण उन्हें "पुण्यश्लोक" (पवित्र मंत्रों की तरह शुद्ध) कहा जाता  है।






















रविवार, 1 जून 2025

आंकड़े

हरियाणा में जल संकट
*दूध दही किसानी और खेलकूद के लिए मशहूर हरियाणा में जल संकट गहराता जा रहा है 
*यहां के कुल 7287 गांव में से 3041 गांव पानी की कमी से जूझ रहे हैं 
*40% गांव संकट में है
* 1948 तो ऐसे गांव है जो गंभीर संकट झेल रहे हैं ..रेड जॉन भूजल गिर रहा है *84% गांव में भूजल स्तर  तेजी से पाताल की ओर जा रहा है
 *1304 गांव ग्रीन जोन में है 


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हरियाणा की 3 साल की कैंसर रिपोर्ट 2020-2022 के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि 2020 में 29,219, 2021 में 30,015 और 2022 में 30,851 नए कैंसर के मामले सामने आए। इसी प्रकार, 2020 में 16,109, 2021 में 16,543 और 2022 में 16,997 लोगों की कैंसर से मृत्यु हुई।29 Mar 2025

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 *हरियाणा कैंसर की घाटी*
 *कैंसर से रोजाना 43 मौतें*
 *83 नए मरीज रोजाना कैंसर के*
 *2024 में 30475 कैंसर के नए मरीज*
 *कुल 915 कैंसर बिस्तर*
 *1 लाख जनसंख्या पर 100 से अधिक कैंसर के केस*
 *हरियाणा कैंसर के मरीजों के हिसाब से देश में तीसरे स्थान पर*
 *सिरसा जिले  के सादेवाला गांव में सबसे ज्यादा कैंसर के मरीज*
 *संक्राम गांव   नूह जिले का सबसे ज्यादा मरीज*

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15 से 49 साल की सभी महिलाओं में अनिमिया  (%)
NFHS..5
शहरी 57.4
ग्रामीण 61.9
कुल मिलाकर 60.4
NFHS..40
कुल मिलाकर 62.7
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 Women age 20 to 24 years married before age 18 years percentage
Urban rural total
 9.9 13.7 12.5
, non pregnant women age 15 to  49 years who are anaemic  less than 12 gram percentage
Urban rural total nfhs5 nfhs4
 57.562.1 60.6 63.1

pregnant women age 15 to  49 years who are anaemic less than 11gm hb
64.6,57.2,56.5,55.0

All women age 15 to  49 years who are anaemic 
57.4,61.8,60.462.7

All women age 15 to  19 years who are anaemic 
Nfhs5220..21 nfhs 4,2015 -16
59.3,63.5,62.3,62.7





किलोई से 67 साल में 1000 राष्ट्रीय व 180 अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकल चुके ।
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https://rthresources.in/conversations-on-health-policy/safe-affordable-and-made-in-india-can-we-deliver/

Increasing reports of poor quality of medicines manufactured in India, whether as exports or for domestic consumption, are a matter of great concern. But this crisis should not become an excuse for strengthening corporate monopoly and excessive centralization.  In this conversation, we discuss the why and how of designing a regulatory regime in India, that can guarantee quality medicines without any compromise to affordability or public health, not only for India, but for the entire third world.


लोकसभा चुनाव सीरीज का पार्ट 18 
चंद्र प्रजापति  लेखक
01. सबसे अमीर 0.1  फीसदी लोगों के पास कुल संपत्ति का 70% हिस्सा है 
चंद्र प्रजापति  लेखक
02. नीचे के 50 फीसदी लोगों के पास केवल 6.4 फ़ीसदी संपत्ति है 
चंद्र प्रजापति  लेखक
03. दो सालों में 64 अरबपति पैदा हुए 
चंद्र प्रजापति  लेखक
04. देश के 100 खराबपति के पास 5412 लाख करोड रुपए हैं 
चंद्र प्रजापति  लेखक
05. नीचे की 70 करोड़ जनता की संपत्ति केवल 21 खरबपतियों के बराबर है 
चंद्र प्रजापति  लेखक
06. 60 फीसदी जनता की आमदनी 2 डॉलर प्रति दिन है 
चंद्र प्रजापति  लेखक
07. नीचे की 30 फीसदी जनता की आमदनी एक डॉलर प्रतिदिन है 
चंद्र प्रजापति  लेखक
08. नीचे की 50 फीसदी जनता, जीएसटी का 64 प्रतिशत हिस्सा देती है 
चंद्र प्रजापति  लेखक
09. ऊपर के 10 फीसदी अमीर, केवल तीन फीसदी हिसा देते हैं 
चंद्र प्रजापति  लेखक
10. मुकेश अंबानी की 7.63 लाख करोड़ की संपत्ति है और रोजाना 163 करोड कमाते हैं
चंद्र प्रजापति  लेखक
11. अडानी के पास 6.54 लाख करोड़ की संपत्ति है, रोजाना 1600 करोड कमाते हैं

***//
एक राष्ट्र एक चुनाव तानाशाही पूर्ण केंद्रीय करण को बढ़ावा देगा.
2022 तक अनुसूचित जातियों में बेरोजगारी की दर 8.4% थी और अनुसूचित जातियों के 84% लोग अनौपचारिक रोजगार में थे।
2021 और 2022 के बीच अनुसूचित जातियों एससी के खिलाफ अपराधों में 13% की वृद्धि हुई है उत्तर प्रदेश 26% मामलों के साथ सबसे आगे है.

 *हरियाणा कैंसर की घाटी*
 *कैंसर से रोजाना 43 मौतें*
 *83 नए मरीज रोजाना कैंसर के*
 *2024 में 30475 कैंसर के नए मरीज*
 *कुल 915 कैंसर बिस्तर*
 *1 लाख जनसंख्या पर 100 से अधिक कैंसर के केस*
 *हरियाणा कैंसर के मरीजों के हिसाब से देश में तीसरे स्थान पर*
 *सिरसा जिले  के सादेवाला गांव में सबसे ज्यादा कैंसर के मरीज*
 *संक्राम गांव   नूह जिले का सबसे ज्यादा मरीज*
 *एक बिस्तर 33 कैंसर के मरीजों के लिए*
 *वर्ष 1966 में हरियाणा के गठन के बाद से केवल 87 महिलाएँ विधानसभा के लिये चुनी गई हैं।*

*राज्य में कभी भी कोई महिला मुख्यमंत्री नहीं रही।*

बुधवार, 28 मई 2025

कुलभूषण आर्य

आदरणीय डॉ साहब  नमस्ते 
आपका लेख हरियाणा का सामाजिक सांस्कृतिक परिदृश्य पढ़ा। आपने इस लेख में काफी डिटर्मिननेंट्स कवर किए हैं। इनसे संबंधित आंकड़े प्रस्तुत किए हैं। इस दृष्टि से यह लेख काफी अच्छा बन पड़ा है।
मैं दो-तीन कॉर्नर से इस पर अपनी टिप्पणी करना चाहता हूं। कई मुद्दों पर आपने लिखा है ऐसा क्यों हुआ? यह एक गंभीर सवाल है और अलग से एक गंभीर बहस की मांग करता है। इससे एक अर्थ तो यह निकलता है कि ऐसे मुद्दों पर और अध्ययन चाहिए। यानी कई और परचे लिखे जाने अभी बाकी है । यह सही भी है। इस अर्थ में यह परचा (सामाजिक सांस्कृतिक परिदृश्य) और बड़ा बनेगा । यह बनना भी चाहिए।
  यद्यपि हरियाणा कोई बड़ा प्रदेश नहीं है, फिर भी भिन्नताओं का अंतर बहुत ज्यादा है ( आपने स्वीकारा है)। नए गुरुग्राम और लोहारू में जमीन आसमान का अंतर है।
पंचकूला और मेवात में बहुत कम समानता है। इसी तरह डबवाली और नारनौल आदि और भी उदाहरण हैं। इसके चलते हरियाणा की एक औसत तस्वीर बनाना काफी मुश्किल काम है। आंकड़ों को आधार बनाकर परिदृश्य पढ़ना एक और चुनौती है। एक तो ये आंकड़े बहुत जल्दी बदल जाते हैं, दूसरा आंकड़ों के स्रोत अलग-अलग आंकड़े प्रस्तुत करते हैं। तीसरे बेजान आंकड़े कभी भी जीवंत तस्वीर नहीं गढ़ सकते । लेकिन अध्ययन के लिए यह जरूरी भी होते हैं।
    कुछ और रुझान भी देखें हरियाणा में भीख मांग कर खाने वाले अपेक्षाकृत कम मिलेंगे। (अभी आंकड़े नहीं है) अधिकतर भिखारियों  की संख्या या तो मठों के आसपास या पर्यटन स्थलों पर मिलती है।
इस प्रदेश में यह पर्यटन उद्योग भी एक कमजोर पक्ष रहा है। दूसरे इतने धाम या मठ (बेड़ ) यहां नहीं पनपे हैं।(हालांकि मंदिर छोटे कहें संख्या कम नहीं)। इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि हरियाणा, पंजाब का एक भाग अलग हुआ है। प्राय ऐसा कहा जाता है कि सिख भीख नहीं मांगते। सिख परम्परा मनुवाद के विद्रोह स्वरूप भी बनी है। इन्होंने अपनी भाषा लिपि (गुरुमुखी) इसीलिए अलग बनाई है ताकि संस्कृत के उच्चारणों (कर्मकांडो) से काफी हद तक बचा जा सके। यह कोई छोटी बात नहीं है। हरियाणा को इसका फायदा भी मिला है।
इस प्रदेश में रूढ़िवाद की जड़ें अपेक्षाकृत ढीली हैं।एक पक्ष वृद्धाश्रमों  का भी लिखा जाना चाहिए। इस समय पूरे देश में सरकारी वृद्धाश्रमों की संख्या 700 से ऊपर है।।केरल में सर्वाधिक 124 हैं तथा हरियाणा में केवल एक है।चेरिटेबल संस्थाएं तो अनेक मिल जाएंगी।वृद्धों का गरिमापूर्ण बुढ़ापा गुजरना अब इस प्रदेश में मुश्किल होता जा रहा है।युवाओं के स्वतंत्र जीवन जीने की भावना कुछ ज्यादा पनप रही है।
    हरियाणा में कामगारों व कारीगरों की स्थिति बड़ी दयनीय हो गई है। पुराने समय की हवेलियां (वास्तुकला) व उनकी लकड़ी की कारीगरी तथा छत के निकट नीचे रंगीन कलाकृतियां -- कहीं बची हुई मिल जाएंगी।उनमें जो हाथ का हुनर होता था  आज ऐसे कारीगर सीमित हो गए हैं। ऐसे काम फुर्सत के दिहाड़ी पर ही हो सकते हैं।इनके कद्रदान पुराने सेठ भी आज नहीं रहे।पत्थर पर संगतरासी व लकड़ी पर खुदाई आज शायद ही मिले। इसी प्रकार तांबे - पीतल के  देग - टोकनी - सागर आज शायद ही मिलें। इस प्रकार ठठेरे अधिकतर रेडीमेड  आइटमों पर आकर रुक गए हैं। मिट्टी का काम (कुम्हार)  pottery आज दम तोड़ रहा है। मिट्टी के खुदाने ही नहीं रहे। अधिकांश मिट्टी  highways/ byepas में लग जाती है।कुम्हार का चाक जो कभी शगुन में पूजा जाता था  आज कोने में टोकन का रखा राज्य है।हरियाणा में आज कौन पैर का नाप देकर चमड़े का  जूता - जूती बनवाता है?  कंपनियों के ' use and thro' जूते हैं। वो चर्मकर्मी भी नहीं रहे। गली बाजारों के चौराहों पर बैठ कर जूतों की मुरम्मत  करने वाले आज कहां दिखाई देते हैं । ऐसे कारीगरों की बुरी हालत है। बड़े व्यवसाय करने की उनकी हैसियत नहीं । लोहार आदि का भी आज यही हाल  है। Theory of alienation में पहले तो  इस प्रकार के कामगार अपने उत्पाद से अलग होते थे। काम के बोझ के कारण  ( या व्यस्त)अपने समुदाय के अलगाव महसूस करते थे। अब तो वे  शक्तिहीन, लाचार व पूरी तरह , दया आधारित  meaningless जीवन जीने को मजबूर हैं। कुछ  जातियों (कामगारों ) में आरक्षण के कारण इक्का दुक्का कोई नौकरी पा भी गया तो अहम भाव से वह अपने समुदाय में elite मानने लग गया। यह एक नए प्रकार का alienation है।
      ।हाल ही के कुछ वर्षों में हरियाणा के युवाओं में कावड़ लाने की प्रवृति बढ़ी है।मोटे रूप में देखा गया है कि इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि उनकी आस्थाएं मजबूत हुई हों। ऐसे अधिकतर युवाओं के पास न कोई काम है , न कोई सार्थक एजेंडा। बड़ा  एजेंडा यहीं तक सिमटा होता है कि लगभग पंद्रह दिन की पिकनिक व मुफ्त के लंगर बस। इसी तरह हरियाणा में रात्री जागरणों का प्रचलन भी बढ़ा है।इनकी प्रकृति अधिकतर व्यवसायिक होती है। इसी तरह धार्मिक शोभा यात्राएं भी कुछ ज्यादा बढ़ी है। कुछ नए प्रकार के उत्सवों का भी प्रवेश हुआ है।
    गणेश पूजा में छठ पूजा आदि इस क्षेत्र के नहीं थे फिर भी इनका पर्सनल इधर बढ़ गया है मुझे नहीं लगता कि हमारे यहां के 30 गूगल आदि दूसरे प्रदेशों में गए हो एक कारण तो समझ में आता है यहां के शहरों में हर तीसरे चौथे घर में झाड़ू पोछा करने वाली बिहारन या यूपी से हैं इसी तरह इन प्रदेशों की माइग्रेंट लेवल इधर बढ़ गई है शहर के लेबर चौक के चौराहे पर बड़ी तादाद मिली थी मिलेगी उनके साथ उनकी पत्नियों भी कंस्ट्रक्शन के कामों पर जा रहे हैं। जिस तरह दिल्ली जैसे शहरों में जेजे कॉलोनी जोगी झोपड़ी में आज हरियाणा के अधिकांश शहरों में आउटसाइड में यह यूपी बिहार आदि के आए मजदूर बड़ी संख्या में बहुत ही कठिन हालातो में रह रहे हैं कुछ छोटे स्तर के रोजगार के काम जैसे फल सब्जियों की रेडी पानी पुरी के कौन से जून तकनीकी कब कर खरीदने वाले कबाड़ खरीदने वाले नल पानी विसर्जन आदि के छोटे-छोटे काम यहां हरियाणा वशी काम ही कर रहे हैं 
हरियाणा प्रदेश मोहनजोदड़ो व हड़प्पा की सभ्यता का इलाका रहा है । राखी गढीं मिताथल आदि में कुछ पूरातत्व साक्ष्य मिले हैं । परंतु इस दिशा में जितने शोध होने चाहिए थे वे हुए नहीं । दूसरी और कुरुक्षेत्र और करनाल आदि में महाभारत( इतिहास) के नाम पर बहुत कुछ manupulated लेबल लगाए जा रहे हैं ।  यह हरियाणा की ऐतिहासिक व सांस्कृतिक धरोहर को विकृत करने की कोशिश हैं ।
   सॉन्ग व रागनियां  इस क्षेत्र की folk संस्कृति रही हैं। लेकिन सॉन्ग कला लगभग विलुप्त होने के कगार पर है। रागिनियो का  चरित्र आज भोंडी सकल अख्तियार कर चुका है । इस क्षेत्र में लड़कियों का प्रवेश एक नयापन है। साक्षरता आंदोलन के प्रयासों में इस दिशा में कुछ मूल्य स्थापित करने की कोशिश हुई थी । वह तर्ज की दृष्टि से तो आज भी आकर्षण का केंद्र है लेकिन vontent की दृष्टि से ज्यादा नहीं लुभा रहा। इन पर उतनी सीटियां नहीं बजती जितनी भौंडी रागनियां के कंपीटीशन में बजती हैं। इससे यहां के जनमानस के  चरित्र व पसंद का अंदाजा लगाया जा सकता है।हफ्तों भर रातों को घूमने वाली भजन मंडलियां आज बीते युग की बात लगती हैं। हरियाणा का फिल्म उद्योग अभी नया है। हरियाणवी में बहुत कम फिल्में ही सामने आई हैं। एक चंद्रावल फिल्म ही ऐसी फिल्म रही है जिसने एक खास मुकाम हासिल किया था।
     खेलों की संस्कृति में यहां (कुश्ती-कब्बडी) आदि का बोलबाला रहा है।यहां के गबरू जवान सेहत की दृष्टि से तो श्रेष्ठ रहे, परंतु  कोचिंग (तकनीक) के मामलों में अभी हाल ही मैं कुछ  हासिल कर पाए हैं। ओलंपिक में हरियाणा का दबदबा  विशेषकर (कबड्डी) में साफ दिखता है। मास्टर  चन्दगी राम व कपिल देव की उपलब्धियां भी कम नहीं रही। कपिलदेव ने सर्वप्रथम  क्रिकेट जैसे खेल में  बंबई के वर्चस्व को न केवल तोड़ा अपितु विश्वकप प(हली बार)  भी  जिताया।हॉकी में भी यहां का प्रदर्शन सराहनीय रहा है।
इस प्रदेश  के अधिकांश खिलाड़ी  (ख्यातिप्राप्त) अवसरवाद की राजनीति का शिकार बने हैं।
   रीति रिवाजों ,खानपान,पहनावे आदि में बड़े परिवर्तन  आए हैं। पींग कहीं कहीं ही देखने को मिलती है। बारातियों का रुपया गिलास  आज की पीढ़ी जानती नहीं।कोथली की सुहालियाँ तो कब की गायब हो गई।धोती कुर्ता , कमरी खंडका बहुत कम देखने को मिलते हैं। खीर चूरमा , बाजरे की खिचड़ी आज की पसंद की खुराक नहीं रही। चना बाजरा कम हो गया है।चावल का प्रचलन बढ़ गया है। आज भातीयों  का खांड कसार भी कहां है। आज यहां के लोग सत् पीना भूल गए हैं।
   पहले हरियाणा में उद्योग बहुत ज्यादा तो नहीं थे। परंतु इधर उधर बिखरे हुए थे।आज उद्योग क्षेत्र कुछ स्थानों पर concentrate हो गए हैं। नया गुरुग्राम व फरीदाबाद  आज हरियाणा का हिस्सा लगते ही नहीं। अधिकांश उद्योग GT Road की बेल्ट पर आ गए हैं।  जहां तक बिजली पानी का सवाल है, दक्षिण हरियाणा इस मामले में पिछड़ा हुआ  है। अंबाला करनाल आदि की तरफ की लड़कियां दक्षिण हरियाणा में कम ब्याही जा रही हैं।यह एक अलग प्रकार का socialA alienation है।
      एक दो बातें और हैं जिन पर मैं अभी ठीक ठीक कह नहीं सकता । पिछले  दिनों हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन ने  हरियाणा के सामाजिक ताने बाने  को एक dent दिया। प्रतिक्रियावादी ताकतों ने इसे Encash कर लिया। यह सामाजिक अविश्वास एक नया phenomenon है। इसके संज्ञान की जरूरत है। (For damage control)
     दूसरी बातवाई कि पिछले लगभग चालीस वर्षों से  ज्ञान विज्ञान आंदोलन हरियाणा में बड़ी ताकत लगा कर एक नवजागरण की दिशा में अग्रसर है। उत्तर भारत (विशेषकर हिंदी भाषी) में यह एक उदाहरण है। इसके क्या social impactsw हैं, अभी अध्ययन होना बाकी है।।डॉ साहब विशेष आग्रह यदि हो सके तो आप अपने प्रभाव के विश्वविद्यालयों के किसी Guide profesdor के तहत किसी शोधार्थी का topic for PHD बनवा सकें । इससे यह काम डॉक्यूमेंट भी हो जाएगा।
वेद प्रिय