बुधवार, 20 फ़रवरी 2019

अदम गोंडवी

हिन्दू या मुस्लिम के अहसास को मत छेड़िये

अपनी कुर्सी के लिए जज्बात  को मत छेड़िये

इनमें कोई हूण , कोई शक कोई मंगोल है

दफ़न है जो बात , उस बात को मत छेड़िये


गलतियां बाबर ने की थी , जुम्मन का घर
फिर क्यों जले

ऐसे नाजुक दौर में हालात को मत छेड़िये


हैं कहाँ हिटलर , हलाकू , चंगेज ख़ाँ

मिट गए सब कौम की औकात को मत छेड़िये


छेड़िये एक जंग मिलजुलकर गरीबी के खिलाफ

दोस्त मेरे मजहबी नगमात को मत छेड़िये


-----अदम गोंडवी 

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