सोमवार, 25 फ़रवरी 2019

SADBHAVNA SAMITI ROHTAK


सदभावना समिति एवं नागरिक मंच, रोहतक
प्रैस विज्ञप्ति
रोहतक 25 फरवरी। सद्भावना समिति एवं नागरिक मंच रोहतक के संयुक्त तत्वावधान में आज महामहिम राष्ट्रपति के नाम जिला उपायुक्त डॉ. यश गर्ग को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पुलवामा में हुए आतंकी हमले की निन्दा करते हुए सभी नागरिकों से विवेक बनाए रखने का आग्रह किया गया। साथ ही सरकार से भी मांग की गई है कि सरकार शहीदों के परिवारों के जख्मों पर फौरन मरहम लगाई जाए। इन परिवारों को बिना किसी देरी के आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई जानी चाहिए। इस सन्दर्भ में कोई कोताही नहीं की जानी चाहिए। इन परिवारों को ही नहीं, सभी शहीदों के परिवारों को, भारतीय सेना के शहीदों के बराबर रखते हुए आर्थिक एवं अन्य सहायता उपलब्ध करवाई जानी चाहिए। यह भी आवश्यक है कि कम से कम सभी अर्द्ध-सैनिक बलों को तो वास्तविक पेंशन दी ही जानी चाहिए और उन के साथ 2004 के बाद पेंशन के नाम पर किया जाने वाला दिखावा नहीं किया जाना चाहिए। इस के साथ ही सामान्य हालात में भी काम के दौरान इन को मिलने वाली सुविधाओं और संसाधनों में भी सुधार की जरूरत है।
      ज्ञापन में आगे मांग की गई है कि यह भी आवश्यक है कि इस साजिश में शामिल सभी व्यक्तियों को कानून के तहत कड़ी से कड़ी सजा देने का हर उपाय किया जाए। इन के अलावा जिन की लापरवाही से यह कांड हुआ हो, उन को भी चिन्हित कर आवश्यक कारवाई की जानी चाहिए। इस कांड में सब कार्यवाही न्याय की दृष्टि से की जानी चाहिए न कि बदला लेने की भावना से। कोई भी सभ्य समाज सजा अवश्य देता है लेकिन बदला नहीं लेता। इस के साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इस कांड में शामिल दोषियों के अलावा किसी भी निर्दोष को दण्डित या प्रताड़ित नहीं किया जाए। असल में तो इस घटना की आड़ में तनाव फैलाने की किसी भी कोशिश से कड़ाई से निपटा जाना चाहिए। ऐसा न करने से देश में अलगाव फैलाने वाली ताकतों के मंसूबों को मजबूती मिलती है।  हम यह भी दर्ज करवाना चाहेंगे कि देश के अन्य राज्यों में रह रहे कश्मीरी छात्रों में पैदा की जा रही असुरक्षा की भावना राष्ट्र हित में नहीं है।
      ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि असल में तो यह कश्मीर में बरसों से जारी हिंसा की ही अगली कड़ी है। दोषियों को सजा अवश्य हो लेकिन युद्धोन्माद से बचना बेहद जरूरी है। शहीदों को वास्तविक श्रद्धांजली कश्मीर में  शांति और न्याय की बहाली करना होगा ताकि फिर कोई बच्चा अनाथ न हो, किसी माँ-बाप को अपने बेटे-बेटी को कंधा न देना पड़े और कोई महिला विधवा न हो। इस के लिए संवैधानिक दायरे में रहते हुए सभी उपाय किए जाने चाहिएँ। कश्मीर में हिंसा के इस लम्बे दौर में भी तुलनात्मक रूप से शांति के कई दौर रहे हैं और वे इन उपायों की सार्थकता और सम्भावनाओं को रेखांकित करते हैं। स्थायी शांति न्याय-आधारित ही हो सकती है। भारत सरकार इस दिशा में कदम उठाए, हम पूरी तरह से उस के साथ हैं।
जारीकर्ताः प्रो महावीर सिंह नारवाल, संयोजक सद्भावना समिति, रोहतक मो. 9416961039
विनोद देशवाल, संयोजक, नागरिक मंच, रोहतक मो. 9813444392

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