गुरुवार, 17 नवंबर 2016

Press

प्रैस विज्ञप्ति
आज चारों और बुराई का बोलबाला नजर आता है। इन्सानी मूल्य और इन्सानियत भावनाएं और उनसे जुड़े विचार और काम जैसे बिखरे हुए हैं। पूरा समाज गहरे संकट में है। हमारा देश भी चौतरफा संकट से घिरा हुआ है। हम जानते हैं कि हमारा देश असंख्य लोगों की कुर्बानियों से आजाद हुआ हैं। आजादी की लड़ाई में उभरे न्याय , समानता,व स्वतंन्त्रता के मूल्यों के आधार पर हमने संविधान अपनाया। संविधान में नागरिक समाज बनाने का लक्ष्य रखा गया और देश के आत्म निर्भर विकास को मुख्य काम समझा गया।
आजादी के संघर्षों के दौरान चले समाज सुधार आन्दोलनों ने जात-गोत , लिंग ,सम्प्रदाय,और इलाके पर आधारित संकीर्ण पहचानों को एक हद तक तोड़ा। राष्ट्रीय
लक्ष्य, लोगों की इच्छाएं, आकांक्षाएं और उनकी क्षमतांएं जैसे रौंद दी गई हैं। आत्मनिर्भरता का लक्ष्य छोड़ कर विकसित विकसित देशों की और अमरीका की आर्थिक-सांस्कृतिक गुलामी स्वीकारी जा रही है। हमारी खेती ,रोजगार, उद्योग,शिक्षा,स्वास्थ्य,पानी , खाद्यान्न,पर्यावरण,जमीन जंगल सब संकट में हैं। विदेशी कम्पनियों की लूट बढ़ती जा रही है। उनके लिए पूरे दरवाजे खोल दिए गये हैं। बोलने की आजादी पर हमला बोला जा रहा है। हिन्दू राष्ट्र का एजैंडा साम्प्रदायिकरण को बढ़ावा दे रहा है। काले धन और नोट बैन के नाम पर पाखंडलीला रचने के प्रयास गरीबों का संकट बढ़ा रहे हैं। हमारा पूरा देश और समाज पछतावा और लाचारी महसूस कर रहा है। हम आत्म हीनता के दौर से गुजर रहे हैं। हरियाणा में भी इस माहौल के चलते जाट आरक्षण की हिंसा और असुरक्षा ने सामाजिक माहौल को और भी बिगाड़ दिया है।
    इन हालात में सभी तबके अपने अपने ढंग से इन्सानियत को बचाने की कोशिश में लगे हैं।  लेकिन इनसे व्यापक फिजा बदल नहीं रही है। इस कोशिश को एक व्यापक समाज सुधार आन्दोलन और नवजागरण का रुप देना होगा। गहरे संकट के इस दौर को पलटने के लिए हमें अपने सामाजिक जीवन की बुराईयों से लड़ना होगा। युवा तबके यानी युवा लड़के लड़कियों को समाज सुधार के रचनात्मक काम में लगाना होगा। हमारी समझ है कि हम अपनी कमजोरियों से लड़ें ताकि दुनिया की समस्याओं को भी दूर करने का संघर्ष कर सकें; इनसानी मूल्यों - समानता, सामाजिक न्याय,सहयोग,स्वतन्त्रता,और आत्म निर्भरता - को समाज की संचालक शक्ति बना सकें।
   हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति लोगों से आत्महीनता और लाचारी से निकल कर समाज सुधार आन्दोलन में शामिल होने की अपील करती है। समिति चर्चा समूह बना कर,गोष्ठी , सेमिनार , कार्यशालां करके तथा नाटक, गीत, भजन,रागनी आदि के माध्यम से नवजागरण का वातावरण बनाने में प्रयासरत है। इसके साथ ही आल इन्डिया पीपल साइंस नेटवर्क द्वारा आरम्भ किये गये ‘सबका देश हमारा देश’ के अभियान में जनतन्त्र, विविधता, विकास और सामाजिक न्याय के संदेश को पूरे देश में ले जाने के लिए पूरा साल अभियान चलाएगी।
  समाज सुधार और नवजागरण के लिए अपने कामों को विस्तार देने के लिए हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति अपना आठवां राज्य सम्मेलन 20 नवम्बर से 21 नवम्बर को प्रभात भवन सुखपुरा चौक रोहतक में कर रही है। खुला सत्र विकास सदन मेन पोस्ट आफिस के सामने 20 नवम्बर को सुबह 10.30 बजे कर रही हैैै जिसमें मुख्य वक्ता डा डी रधुनन्दन भूतपूर्व अध्यक्ष आल इन्डिया पीपल्ज नेटवर्क और गौहर रजा साइन्टिस्ट एवम संस्कृतिकर्मी होंगे।
   हम हरियाणा के सभी शिक्षित, अशिक्षित , गरीब तबकों से;महिलाओं ,युवा लड़के लड़कियों , बुजुर्ग और प्रतिष्ठित नागरिकों से; देहाती शहरी सभी बाशिन्दों से इस देशभक्तिपूर्ण सामाजिक काम में सहयोग करते हैं तथा सम्मेलन के खुले सत्र में आप को सादर आमन्त्रित करते हैं।
यंू ही हमेशा उलझती रही है जुल्म से खलक ,
न उनकी रस्म नई है, न अपनी रीत नई ।
यूं ही हमेशा खिलाए हैं हमने आग के फूल,
न उनकी हार नई है , न अपनी जीत नई।


डा रणबीर सिंह दहिया
अध्यक्ष, हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति हरियाणा


गुरुवार, 10 नवंबर 2016

गाँव

गाँव के स्तर पर की जाने वाली गतिविधियाँ
1 . खेल कूद प्रतियोगिताओं का आयोजन ---- हरियाणा में खेल कूद प्रतियोगिताओं की अपनी एक परम्परा रही है । इस पर गाँव के युवक व युवतियों को खास ध्यान देना चाहिए । इसके लिए लोगों से चन्द इकठा किया जा सकता है ।
1 कुश्ती प्रतियोगिता 2  कब्बडी प्रतियोगिता 3 वालीबाल प्रतियोगिता 4 दौड़ प्रतियोगिता 5 कुरसी  दौड़ 6 ट्रैक्टर से खेत बाहने की प्रतियोगिता 7 साफ़ सुथरे घर की प्रतियोगिता 8 साफ़ गलियों की प्रतियोगिता 9 ओढ़नी कढ़ाई प्रतियोगिता 10 चाट्टी दौड़ प्रतियोगिता ।
2  हाथ से बनाई गयी चीजों की प्रतियोगिता : बुनाई / कढ़ाई / सिलाई / रंगाई / छपाई / की प्रतियोगिता कपड़ों पर / लकड़ी पर/ फ़ैवीकोल पर / शीशे पर / या किसी और चीज पर
साक्षरता का अनुभव बताता है कि इस प्रतियोगिता के माध्यम से जन चेतना केंद्र को आत्म निर्भर बनाने की तरफ ले जाया जा सकता है ।
3  कर सेवा : नाली साफ़ करना/ स्कूल में सफेदी करना/ स्कूल में शौचालय बनाना / गली की सफाई /चौपाल का रख रखाव व उसकी मरम्मत करवाना / कुँए की देखभाल /मीठे पानी के नलकों की देखभाल /लाइब्रेरी के लिए कमरा बनाना / खड़े पानी में मछरों को मारने के उपाय करना / स्वास्थ्य कैंपों का आयोजन करना ।
4  सांस्कृतिक  कार्यक्रमों का आयोजन : चन्द्र शेखर आजाद/ भगत सिंह / नेताजी सुभाष चन्द्र बोस / मुंशी प्रेम चंद के जन्म दिन / छब्बीस जनवरी / पंद्रह अगस्त / पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन अवश्य किया जाना चाहिए / साक्षरता सांग / लाड़ली सांग / नाटकों का आयोजन किया जाये / महिलाओं का साक्षरता सतसंग किया जा सकता है जिसमें वे गीत गायें । स्थानीय त्योहारों / स्वतंत्रता सेनानियों या गाँव की जानी मानी हस्तियों की याद में सांस्कृतिक कार्यक्रम किये जाने चाहिए ।
5  गाँव में जन चेतना केंद्र की देख रख में महिलाओं का स्वयं सहायता समूह चलाया जा सकता है । पानीपत का अनुभव हमारे पास है
6  वाशिंग पाउडर  बनाने की ट्रेनिंग लेकर गाँव के लिए वाशिंग पाउडर / साबुन बनाने का काम शुरू किया जा सकता है ।
7  अचार तथा चटनी बनाने की ट्रेनिंग जन चेतना केंद्र के कार्यकर्ताओं और नव साक्षरों को दी जा सकती है ।
8  साक्षरता कक्षाएं : जन चेतना केंद्र की देख रख में निरक्षरों की कक्षा लगाई जा सकती है । जो लोग स्कूल जाना छोड़ गए उनकी कक्षाओं के बारे में भी सोचा जा सकता है या उन्हें फिर से स्कूल भेज जा सकता है । दो साक्षरता की कक्षाएं हरेक जन चेतना केंद्र की देख रख में चलायी जाएँ ।
9 पुस्तकालय : जरूरत के हिसाब से , रूचिकर , सूचना देने वाली तथा साहित्यिक किताबें जुटाई जाएँ तथा जन चेतना केंद्र का एक पुस्तकालय अवश्य होना चाहिए । पुस्तकालय में अख़बारों की व्यवस्था भी की जाये ।  गाँव में बड़ा पुस्तकालय हो सकता है जहाँ से छोटे गाँव के छोटे पुस्तकालयों को किताबों का आदान प्रदान किया जा सके । प्रत्येक गाँव में एक चलती फिरती लाइब्रेरी भी होनी चाहिए । शरुआत के तौर पर कुछ गाँव में महिलाओं के पुस्तकालय का गठन किया जा सकता है । पुस्तकालयों का काम संभालने के लिए एक कमेटी का गठन किया जाना बहुत जरूरी है । कमेटी लोगों में पुस्तकें पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने के लिए रचनात्मक कदम उठाएगी । इस कमेटी में 50 % महिलाएं हों ।
दीवारी अखबार का विकास भी यह कमेटी कर सकती है
स्थानीय पत्रिका की योजना भी बनायी जा सकती है ।  
स्कूल की लाइब्रेरी से तालमेल किया जा सकता है
कम कीमत की अच्छी/ जनतांत्रिकता व धर्म निरपेक्षता व राष्ट्रीय एकता की भावनाओं को बढ़ावा देने वाली पुस्तकें भी जरूर होनी चाहिए ।  
मुंशी प्रेम चाँद / शरतचन्द्र जैसे पर्शिद्ध लेखकों का साहित्य भी हो ।
10  पठन पाठन संस्कृति का विकास करना :
जन वाचन आंदोलन के माध्यम से यह बखूबी किया जा सकता है
लोगों को पढ़कर किताबें सुनायी जाएँ और पढ़ने को   प्रेरित किया जाये
किताबों के मेले लगाए जाएँ
प्रत्येक गाँव में किताब उत्सवों का आयोजन किया जाये
भेंट में किताबें देने का प्रचलन बढ़ाया जाये
लोगों को किताबें खरीदने के लिए प्रेरित किया जाये
इस सारे काम में लोगों की सक्रिय हिस्सेदारी होना बहुत जरूरी है ।
11  चर्चा मंडल / चर्चा समूह / विचार गोष्ठी
चर्चा समूहों का गठन किया जाये
महिला चर्चा मंडल अलग से गठित किये जा सकते हैं ।  अच्छा हो यदि महिला और पुरुषों के इक्ठ्ठे   ग्रुपों का भी विकास किया जाये
चर्चा का विषय एवं वक्त ये समूह खुद तय करेंगे
विषय विशेषज्ञों को बुला कर चर्चा की शरुआत उनसे करवाई जा सकती है
कुछ लोगों को चर्चा समूहों के संचालन में प्रशिक्षित किया जाना चाहिए ।  उनके पास चर्चा को संचालित करने व दिशा देने के लिए पर्याप्त सामग्री होनी चाहिए
बहस बढ़ने के लिए अनौपचारिक तौर तरीकों का भी इस्तेमाल किया जाना चाहिए
12  प्रशिक्षण कार्यक्रम :
साधारण तथा कम समय के ओरिएंटेशन कार्यक्रमों का , भिन्न विषयों पर मसलन स्वास्थ्य , कृषि , पशु पालन , भोजन पकाना , अचार बनाना , आदि का आयोजन किया जाना चाहिए
विकास से जुड़े मुद्दों के साथ मिलकर वोकेशनल ट्रेनिंग का कर्यक्रम किया जा सकता है
ट्रेनिंग लेने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए स्वस्थ बेबी कार्यक्रम , अच्छी गृहणी , या अच्छा किसान कार्यक्रमों का आयोजन किया जा सकता है ।
13  सूचना व ज्ञान की खिड़की :
आम जन को  विभिन्न  विभागों  की गतिविधियों से परिचित करवाना ।
जन चेतना केंद्र गाइड को इस प्रकार की किताबें या पैम्फलेट मुहैया करवाना ताकि सूचना आगे जा सके ।
सूचना सामग्री को सरल भाषा में विकशित करना तथा सम्प्रेषण के अलग तरीको - भाषण,चर्चा,स्लाइड शो ,नाटक, गीत,स्वांग,आल्हा,वाल राइटिंग, आदि से लोगों के बीच लेकर जाना ।
अलग अलग विभागों के  विशेषज्ञों ,वैज्ञानिकों और आम जन का विचार विमर्श
14. वैज्ञानिक रुझान उभारना और विकशित करना :
विज्ञान का लोकप्रियकरण करना ।
चमत्कारों का पर्दाफाश करना
अंधविश्वास को दूर करना
तर्क और विश्लेषण की क्षमता पैदा करना
महिलाओं के घर के काम को उचित टेक्नॉलॉजी का ज्ञान देकर कम करना ताकि उनकी हिस्सेदारी सामाजिक विषयों पर बढ़ सके।उदाहरण के लिए बिना धुंए वाला चूल्हा , सोलर कूकर, साईकिल आदि ।
15. महिला सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान देना :
चेतना के स्तर पर
आंगनबाड़ी
पंचायत स्तर पर
जन चेतना केंद्र में
महिला स्वास्थ्य संघ में
महिला मण्डल में
बचत समूह- बचत की भावना
महिला और शिक्षा
महिला और कानून
महिला और घरेलू हिंसा
महिला और समता
महिलाओं के प्रशिक्षण की योजना
महिलाओं में सामूहिकता के कार्यक्रम
महिलाओं में वोकेशनल एजुकेशन के कार्यक्रम
16. स्कूल जाने वाले बच्चों को स्कूल पहुँचाना:
गाँव के स्कूल की उम्र के सभी बच्चों को स्कूल में भर्ती करवाना ।
भर्ती हुए बच्चों को स्कूल न छोड़ने के लिए प्रेरित करना ।
जो स्कूल नहीं जा सके या जा सकते उनको अनोपचारिक शिक्षा के माध्यम से औपचारिक शिक्षा तक पहुँचाने में मदद करना ।
ग्राम शिक्षा कमेटी महीने में एक बार मिलकर इस समस्या पर अवश्य बातचीत करे ।
खेल खेल में शिक्षा आदि कार्यक्रमों का फॉलोअप करना ।
17. कानूनी साक्षरता तथा सामजिक मुद्दे :
इस सन्दर्भ में आम जन को सूचना तो दी ही जानी  चाहिए ताकि वे अपने हकों ,कर्तव्यों तथा सामजिक मुद्दों पर अपनी राय कायम कर सकें तथा अपनी भूमिका तय कर सकें ।
18. पानी एवम् भूमि प्रबन्धन योजना :
इसमें हिस्सेदारी करने के लिए गाँव के लोगों को प्रेरित करना । विकास कार्यों में लगे विभागों के साथ तारतम्य स्थापित करना ।
19. गाँव में 40 साल से कम उम्र की बाँझ महिलाओं को चिन्हित करना तथा उनका इलाज कराना।
20. गाँव में स्वास्थ्य रजिस्टर का रख रखाव पूरी जानकारी के साथ रखना ।
21. क्षेत्र गरीबी उन्मूलन /स्वास्थ्य/महिला एवं बालक विकास कार्यक्रमों में सहायता करना मसलन
डी आर डी ए, कृषि,वन,,खान,उद्योग,मछली पालन,डेयरी,रेवेन्यू, वित्तीय संस्थान-इनसे वास्ता कायम करना होगा ।
जन स्वास्थ्य तथा परिवार कल्याण
महिला एवम् बाल विकास विभाग , सामाजिक उत्थान एवम् पंचायत विभाग
किनके माध्यम से :
1 सरपंच, पञ्च, ग्राम सेवक, ग्राम सहायक , वनगार्ड ,स्टॉक मैन, पटवारी,पीडी एस दूकानदार, अध्यापक, बैंक फील्ड ऑफीसर, दुग्धकेंद्र का इंचार्ज, एल आयी सी एजेंट,
2. ए एन एम, एम् एच डब्ल्यू , हैण्डपम्प मैकेनिक , जन स्वास्थ्य रक्षक, नेहरू युवा केंद्र , दाई।
3. आंगनबाड़ी कार्यकर्ता , सहायिका,साथिन , ग्राम सेविका ।
इन सबका केंद्र बिंदु या मिलान बिंदु जन चेतना केंद्र को बनना है ।
जिला स्तर से इस नाभिक बिंदु की भूमिका मोनिटर की जाय।
22. उस गाँव के कुल कितने लोग हैं जो कर्मचारी ,अफसर हैं? वे कहाँ कहाँ काम करते हैं ? तथा जन चेतना केंद्र की गतिविधियों में क्या योगदान दे सकते हैं ?  
23. सामूहिक स्तर पर सब्जियों की बीजाई जैसे घीया , तोरी आदि को गितवाडों में बिजवाना ।
24. पौधारौपन खासकर फलदार वृक्षों का करना ।
25. गाँव की विधवा महिलाओं की सूची तैयार करना तथा उन्हें आर्थिक व् सामजिक सुरक्षा प्रदान करने का जतन करना ।
26. गाँव में  विकलांग लोगों की सूची तैयार करना तथा रेडक्रास से उनकी मदद करवाना।
27. गाँव के चौकीदारों को खासकर जन चेतना केंद्र में शामिल करना । यदि निरक्षर हैं तो उन्हें साक्षर बनाना।
28 . कार्यकर्ताओं की समझ बढ़ाने के लिए वर्कशॉप आदि का आयोजन करना ।
29. अक्षर सैनिकों की पढ़ाई व्यवस्था में मदद करना ।उनकी अक्षर सैनिक मण्डलियों का गठन करना ।
30. जिला कार्यालय से जन चेतना केंद्र का जिन्दा सम्पर्क स्थापित करना :
गाँव से दुकानदार शहर आते हैं उनके माध्यम से
कई गाँव में शहर से अध्यापक पढ़ाने गाँव जाते हैं
कई लोग दिल्ली के डेली पैसेंजर हैं
कई लोग गाँव से शहर नौकरी के लिए रोजाना आते जाते हैं
तीन पहिया/ बस या जीप के चालक
ट्रेक्टर ड्राइवर
31. साक्षरता का हरकारा, आदि पत्र पत्रिकाओं का जन चेतना केंद्र में नियमित रूप से मंगवाना ।
32. महिलाओं की हिस्सेदारी सुनिश्चित की जाये -आशा वर्कर ,मिड डे मील वर्कर आँगन वाड़ी वर्कर आदि।
हर स्तर पर महिलाएं हों
उनके  लिये कार्यशालाओं का आयोजन हो।
मीटिंगें उनके वक्त के हिसाब से तय की जाएँ
मीटिंगों में और कार्यक्रमों में बच्चों की देख रेख की सुविधाओं के बारे  में सोचा जाये ।
आने जाने की समस्याओं पर चर्चा हो।
प्रेस नोट तैयार करने को प्रेरित करें। दरखास्त लिखना सिखाएं ।हिसाब किताब रखना सीखें ।
महिलाओं के प्रति मानवीय समतावादी रूख अपनाएं ।
33. अपनी अपनी डायरी लिखने का काम अपने हाथ में लें
34. गाँव की रिसोर्स मैपिंग का काम करना। भूमि व पानी साक्षरता का काम हाथ में लेना ।
35. दहेज़ समस्या, घूंघट की समस्या, नशाखोरी, बेरोजगारी, आदि सामाजिक मुद्दों पर सेमिनारों का आयोजन करना ।
36. सूचना का अधिकार मौलिक अधिकार हो इसके लिए दबाव बनाना।
37. देश की एकता ,आत्म निर्भरता, राष्ट्र विकास, आदि मुद्दों को समझना तथा लोगों तक इनका अलग अलग ढंग से सम्प्रेषण करना।
38. जातिवाद , धार्मिक कट्टरता , सांस्कृतिक पिछड़ापन , जैसी समस्याओं पर समूहों में चर्चा करना।
39. हरियाणा के विकास की - कृषि क्षेत्र, औद्योगिक क्षेत्र, मानव संसाधन की समस्याओं पर समूहों में चर्चा करना।
40. हरियाणा को जानो हरियाणा को बदलो - नारे के तहत सर्वेक्षण व स्टेट्स पेपर तैयार करवाने में मदद करना
रणबीर
9812139001
dahiyars@rediffmail.com
      
        सबका देश --हमारा देश 
सबका हरियाणा -- हमारा हरियाणा 
DIVERSITY               बहु विविधता 
DEVELOPMENT      विकास 
DEMOCRACY          जनतंत्र 
SOCIAL JUSTICE   सामाजिक न्याय 
 

EQUITY AND EQUALITY

एक रूपता , समानता की 
गारंटी नहीं करती है । 

बुधवार, 9 नवंबर 2016

HARYANA 1

आज के  हरयाणा की चुनौतियां
हरयाणा प्रदेश  ने 1966 में अपना अलग प्रदेश के रूप में सफ़र शुरू किया और आज 2016  तक पहुंचा है   इस बीच बहुत परिवर्तन हुए हैं   इनका सही सही आकलन ही हमें आगे की सही दिशा दे सकता है  पिछड़ी खेती बाड़ी का दौर था इसके बनने  के वक्त  उसके बाद हरित क्रांति का दौर आया  हरित क्रांति का दौर अपने आप नहीं  गया  यहाँ के किसान और मजदूर की म्हणत रंग ले कर आई  जिसने सड़कों का जाल बिछाया ] बिजली गाओं गाओं तक पहुंचाई  नहरी पानी की सिचाई का भी विस्तार हुआ  इस सब का सही सही आकलन शायद ही हुआ हो  मगर एक बात जरूर देखी  जा सकती है कि इस के आधार पर ही हरित क्रांति दौर  पाया 
नए बीज नए उपकरण  नयी खाद नए तौर तरीकों को यहाँ के किसान मजदूर ने अंगीकार किया और हरयाणा के एक हिस्से में हरित क्रांति ने क्षेत्र की खेती की पैदावार को बढ़ाया  वहीँ आहिस्ता आहिस्ता इसके दुष्प्रभाव भी सामने आने लगे  जमीन की उपजाऊ शक्ति कम होती जा रही है  कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल ने अपने कुप्रभाव मनुष्यों पशुओं व जमीन के अंदर दिखाए हैं जो चिंतनीय स्तर तक जा पहुंचे हैं   हरित क्रांति से एक धनाढय़ वर्ग पैदा हुआ जिसने अपने अपने इलाके में अपनी दबंगता व् स्टेटस का इस्तेमाल करते हुए यहाँ की राजनैतिक आर्थिक और सामाजिक क्षेत्र में अपना प्रभुत्व जमाया है  इस सब में हमारी पिछड़ी सोच और अंध विश्वासों के चलते एक अधखबडे इंसान का विकास किया है जो कुछ बातों  में प्रगतिशील है और बहुत सी बातों में रूढ़िवादी है  इसके व्यक्तित्व का प्रभाव हर क्षेत्र में देखा जा सकता है चाहे शिक्षा का क्षेत्र हो चाहे स्वास्थ्य का क्षेत्र हो चाहे खेती बाड़ी का क्षेत्र हो चाहे उद्योग का क्षेत्र हो , चाहे सामाजिक क्षेत्र हो  इस अधखबडे व्यक्तित्व को भरे पूरे मानवीय इंसान में कैसे बदला जाये यह अहम् मुद्दा है जो कि महज राजनैतिक ही नहीं बल्कि सामाजिक है और एक  नवजागरण आंदोलन की शिक्षा के क्षेत्र में जहाँ एक और एजुकेशन हब बनाने के दावे किये जा रहे हैं और नए नए विश्विदालयों का खोलना एक अचीवमैंट  के रूप में पेश किया जा रहा है वहीँ दूसरी और सरकारी स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता कई तरह से प्रभावित हुई है  शिक्षा की प्राइवेट दुकानों में भी शिक्षा की गुणवत्ता का तो प्रश्न ही नहीं बल्कि शिक्षा को व्यापार बना दिया गया है चाहे वह स्कूली शिक्षा हो चाहे वह उच्च शिक्षा हो चाहे वह विश्वविदालयों की शिक्षा हो या ट्रेनिंग संस्थाओं की शिक्षा हो हरेक क्षेत्र में व्यापारीकरण और पैसे के दम पर डिग्रीयों का कारोबार बढ़ा है   दलाल संस्कृति ने इस क्षेत्र में दलाल माफियायों की बाढ़ सी लादी है  सेमेस्टर सिस्टम ने भी शिक्षा के स्तर को बढ़ाया तो बिलकुल भी नहीं हाँ घटाया बेशक हो  इंस्टीच्युट खोल दिए गए कई कई सौ करोड़ की इमारतें खड़ी करके मगर उनकी फैकल्टी उनकी कार्य प्रणाली की किसी को कोई चिंता नहीं है  विश्वविदयालयों के उपकुलपतियों की नियुक्तियों में यू जी सी की गाइड लाइन्स की धजियां उड़ाई जाती रही हैं  सबके लिए एक समान स्कूल की अनदेखी की जाती रही है जबकि यह सम्भव है   मांग करता है 
स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्राइवेट सैक्टर की दखलंदाजी बढ़ी है  एम्पैनलमेंट  का कारोबार खूब चल रहा है  सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं जैसे तैसे स्टाफ की कमी , डाक्टरों की कमी ,कहीं कुछ और कमियों के चलते , घिसट रही हैं  गरीब जन की सेहत के लिए सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के माधयम से इलाज के रस्ते बंद होते जा रहे हैं  जितनी भी स्वास्थ्य सेवा की योजनाएं गरीबों के लिए हैं उनमें एक्जीक्यूसन की भारी कमियां हैं और योजना में भी कई कमियां हैं  प्राइवेट नर्सिंग होम के लिए केंद्र में पारित एक्ट भी हरयाणा में लागू नहीं किया है  इसलिए प्राइवेट  नर्सिंग होम्ज की लूट दिनोदिन आमनवीय रूप अख्तियार करते हुए बढ़ती जा रही है  सरकारी हॉस्पिटलज में सी टी स्कैन की महीनों लम्बी तारीखें दी जाती है  मुख्य मंत्री मुफ्ती इलाज योजना सैद्धांतिक तोर पर बहुत ठीक योजना होते हुए भी इसकी एक्जीक्यूसन बहुत ढीली ढाली चल रही है  इसके लिए मॉनिटरिंग कमेटीज का प्रावधान नहीं रखा गया है  खून की कमी NFHSII के मुकाबले NFHSIII में गर्भवती महिलाओं में बढ़ी है  इसी प्रकार मालन्यूट्रिसन भी बच्चों में बढ़ा है  गरीब के लिए मुफ्त इलाज भी महंगा होता जा रहा है 
सामाजिक न्याय के सवाल तीव्र रूप  सामने  रहे हैं  महिलाएं  घर में  कर्म स्थल पर  गली कूचों में   बाजारों में सुरक्षित हैं  लॉ एंड ऑर्डर को स्थापित करने का काम काफी कमजोर होता जा रहा है  भ्रष्ट अफसर भ्रष्ट पुलिस और भ्रष्ट नेता की तिकड़ी का उभार तेजी हो रहा है  सकारातमक अजेंडा  होने के कारण आज युवा वर्ग का एक हिस्सा नशे फ्री सेक्स और अपराधीकरण की गिरफत में आता जा रहा है  दलित उत्पीड़न के महिला उत्पीड़न के  केसिज बढे हैं पिछले कुछ वर्षों में  लम्पटपन बढ़ रहा है  असंगठित क्षेत्र का विस्तार होता जा रहा है जिसमें मजदूर की हालत चाहे वह महिला है , पुरुष है , प्रवासी मजदूर है और उसकी जिंदगी बहुत ही मुस्किल हालातों की तरफ धकेली जा रही है  महंगाई का असर इन तबको के इलावा माध्यम वर्ग को भी प्रेषण किये हुए है  एक तरफ शाइनिंग हरयाणा है जिसका गुणगान हर जगह और बहुत से इससे लाभान्वित तबको द्वारा किया जाता है  मगर यह सच है कि यह तबका बहुत छोटा होते हुए भी प्रभावशाली है  दूसरी तरफ सफरिंग हरयाणा हैं जिसका बहुत बार कोई भी व्यक्ति गम्भीरता से जीकर तक नहीं करता  इस तबके को हासिये पर धकेला जा रहा है  इसकी जद  में गरीब किसान  मजदूर  वंचित तबके महिलाएं  नौजवान लड़के लड़की  प्रवाशी मजदूर  माइग्रेटेड पापुलेशन  असंगठित क्षेत्र के कर्मचारी खासकर महिला हैं  यानि हरयाणा का बड़ा हिस्सा इसमें शामिल है 
नैशनल कैपिटल रीजन स्कीम के तहत हरयाणा का ताना बाना काफी बदल रहा है और और भी बदलेगा  फोरलेन  टोल प्लाजा फलाई ओवर सेज़ के तहत उपजाऊ जमीनों के अधि गरहण के चलते खेती योग्य जमीन कम से कमतर होती जा रही है  जी डी  पी  में एग्रीकल्चर का योगदान काफी कम हुआ है  नए हरयाणा का सवरूप क्या होगा इस पर कोई चर्चा नहीं है  औद्योगिकीकरण के दिशा क्या होगी नौकरी पैदा करने वाली या नौकरी खत्म करने वाली \ वातावरण का क्षरण रोकने के बारे क्या किया जायेगा ?\ जेंडर फ्रैंडली ईको फ्रैंडली और सामाजिक न्याय प्रेमी विकास का नक्शा क्या होगाये कुछ मुद्दे हैं जिन पर हरयाणा के प्रबुद्ध नागरिकों को सोच विचार करना चाहिए और फिर एक जनता का अजेंडा बना कर सभी जनता  के सामने पेश करके उनकी इस अजेंडे पर अपनी पोजीसन बनाने  को  कहा  जाना चाहिए  इस सबके लिए जनता का जनपक्षीय हिस्सों  के लिए लामबंद होना बहुत जरूरी है तथा नव जागरण के रूप में समाज सुधार आंदोलन को बढ़ाना ही सही दिशा है । 
रणबीर सिंह दहिया