2016 का हरियाणा
*आज
के दौर के हरियाणा में कुछ विचारणीय
बिंदु
परिवार के पितृ स्तात्मक ढांचे में अधीनता (परतंत्रता ) का तीखा होना साफ देखा जा सकता है ठेकेदारों और प्रापर्टी डीलरों का बोलबाला है चरों तरफ ।
* हरियाणा के ग्रामीण इलाकों से दूसरे प्रदेशों से बेघर लोगों का शहरों के
ख़राब से ख़राब घरों
में बढ़ता जमावड़ा आज की एक
सच्चाई है
। शहरों के विकास में अराजकता, लम्पन तत्वों की बढ़ोतरी और महिला पर यौन अत्याचारों और हिंसा में बढ़ोतरी गंभीर संकट के माणक ही कहे जा सकते हैं ।
* महिलाओं और बच्चों पर काम का बोझ बढ़ते जाना | असंगठित क्षेत्र में जन सुविधाओं का भी काफी अभाव है | कठिन जीवन होता जा रहा है ।
*मजदूर वर्ग को पूर्ण रूपेण ठेकेदारी प्रथा में धकेला जाना आम बात की तरह देखा जा रहा है ।
* सीमान्त किसान और वंचित तबकों के जीने के आधार और ज्यादा संकुचित होते जा रहे हैं ।
* नौजवान लड़के लड़कियों के सामने बेरोजगारी विकराल रूप धारण करती जा रही है ।
* सभी
सामाजिक नैतिक बन्धनों का तनाव ग्रस्त
होना तथा टूटते जाना व्यवस्था की देन हैं
। पारिवारिक
रिश्ते नाते ढहते जाना --- युवाओं के सामने गंभीर
चुनौतीयाँ , परिवारों में बुजुर्गों की असुरक्षा का
बढ़ते जाना ।
* जमीन
की उत्पादकता में खडोत , पानी कि समस्या , सेम
कि समस्या ?????
* कृषि
से अधिक उद्योग कि तरफ व
व्यापार की तरफ जयादा
ध्यान
* स्थाई
हालत से अस्थायी हालातों
पर जिन्दा रहने का दौर लादा जा रहा है ।
* अंध
विश्वासों को बढ़ावा दिया
जाना | हर दो किलोमीटर
पर मंदिर का उपजाया जाना।
टी वी पर भरमार
है ऐसे मैटर की । और यह सब और अधिक सरकारी संरक्षण में होने लगा है पिछले दो सालों के दौरान । पहले भी यह सब होता रहा मगर अब विकराल रूप धारण करता जा रहा है ।
* सामजिक न्याय के सवालों पर संवेदनहीनता बढ़ी है और कुल मिलकर अन्याय
का बढ़ते जाना एक चुनौती बन गया है ।
* कुछ
लोगों के प्रिविलिज बढ़
रहे हैं। कह सकते हैं कि इसके चलते 25 प्रतिशत लोगों का शाइनिंग हरियाणा बन गया है जिसका चर्चा चारों और है। मारूति से सैंट्रो कार की तरफ रूझान बढ़े हैं आसान काला धन काफी इकठ्ठा किया गया है ।
मगर 75 प्रतिशत सफरिंग हरियाणा का जिक्र शायद ही कहीं किया जा रहा हो । ईनका उत्पीडन अपनी सीमायें लांघता जा रहा है | रूचिका कांड ज्वलंत उदाहरण है | और कितने उदाहरण दिए जा सकते हैं ।
*
* हरियाणा में व्यापार आज के दिन धोखा धडी में बदल चुका है। शोषण,
उत्पीडन और भ्रष्टाचार की
तिग्गी भयंकर रूप धार रही है। भ्रष्ट नेता , भ्रष्ट अफसर और भ्रष्ट पुलिस का गठजोड़
पुख्ता हो गया है
।
* प्रतिस्पर्धा
ने दुश्मनी का रूप धार
लिया है
* तलवार
कि जगह सोने ने ले ली
है
* वेश्यावृति की तरफ महिलाओं को धकेल जा रहा है।
* भ्रम
व अराजकता का माहौल बढ़
रहा है | धिगामस्ती बढ़ रही है
* संस्थानों
की स्वायतता पर हमले बढ़
रहे हैं। अभिव्यक्ति की आजादी पर चारों और हमले हो रहे हैं ।
* लोगों को किसी भी तरीके से मुनाफा कमा कर रातों रात
करोड़ पति से अरब पति
बनने के सपने दिखाए जा रहे हैं और उन्हें मानसिक रूप से किसी भी
हद तक अपने को
गिराने को तैयार रहने के लिए ढाला जा रहा है ।
* खेती
में मशीनीकरण तथा औद्योगिकीकरण मुठ्ठी भर लोगों को
मालामाल कर गया तथा
लोक जन को गुलामी व
दरिद्रता में धकेलता जा रहा है
* बहुराष्ट्रीय
कम्पनियों का शिकंजा कसता
जा रहा है
* वैश्वीकरण
को जरूरी बताया जा रहा है
जो असमानता पूर्ण विश्व व्यवस्था को मजबूत करता
जा रहा है
* पब्लिक
सेक्टर की मुनाफा कमाने
वाली कम्पनीयों को भी बेचा
जा रहा है शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में निजीकरण और व्यापारीकरण को पुरजोर बढ़ावा दिया जा रहा । सरकारी ढांचे कमजोर किये जा रहे हैं ।
* हमारी
आत्म निर्भरता खत्म करने की भरसक नापाक
साजिश की जा रही
हैं
* साम्प्रदायिक
ताकतें देश के अमन चैन
के माहौल को धाराशाई करती
जा रही हैं और पिछले दो साल में तो गऊ , गीता और गणेश के नाम पर तिग्गी ने मिलकर कहर ढाने में कसर नहीं छोड़ी ।
* गुट
निरपेक्षता की विदेश निति
से खिलवाड़ किया जा रहा है
* युद्ध
व सैनिक खर्चे में बेइंतहा बढ़ोतरी की जा रही
है। अंधराष्ट्रवाद आज कश्मीर और पूरे देश में अपने चरम पर पहुँचाया जा रहा है । धर्मान्धता एक तरफ की दूसरी तरफ की धर्मान्धता को बढ़ावा दे रही है । फासिज्म ने अपने ढंग से हिंदुस्तान में शंख बज दिया है । किसी को नहीं सुन रहा तो विडम्बना ही कहा जायेगा ।
लोगों को जात पात के नाम पर पूरी तरह बाँटने के प्रयास हैं । जाट आरक्षण का तांडव हरियाणा झेल चूका है ।
* परमाणू
हथियारों की होड़ में
शामिल होकर अपनी समस्याएँ और अधिक बढ़ा
ली हैं
* सभी
संस्थाओं का जनतांत्रिक माहौल
खत्म किया जा रहा है
* बाहुबल,
पैसे , जान पहचान , मुन्नाभाई , ऊपर कि पहुँच वालों
के लिए ही नौकरी के
थोड़े बहुत अवसर बचे हैं
* दलित और महिलाओं में
अपनी मांगों के हक़ में
खडा होने का
उभार दिखाई देता है | सबसे ज्यादा वलनेरेबल भी समाज का
यही हिस्सा दिखाई देता है मग़र सबसे
ज्यादा जनतांत्रिक मुद्दों पर , नागरिक समाज के मुद्दों पर
, सभ्य समाज के मुद्दों पर
संघर्ष करने कि सम्भावना भी
यहीं ज्यादा दिखाई देती है
* वर्तमान
विकास प्रक्रिया भारी सामाजिक व इंसानी कीमत
मानगने वाली है
| इसको संघर्ष के जरिये पल
टा जाना बहुत जरूरी है
*हरियाणा की जनता को समझना
होगा कि उनकी जंग
भी समाज परिवर्तन की जंग
का हिस्सा बने और नए नवजागरण की जंग में शामिल हो कर ही हरियाणा और हिंदुस्तान को फासिस्ट ताकतों से निजात दिलाई जा सकती है ।
रणबीर
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