रमलू और ताई
एक बार ताई नै रमलू चाक्की राहन ताहिं बुला लिया । लाग्या चाक्की राहन । ताई नै सोच्चि ले इतनै पाणी ले आऊं । दोघड़ ले कै चाली गयी । रमलू नै राहनते होयें जोर की चोट मारदी । चाक्की का पाट टूटग्या । इब के करै ? सोच्चि दूध पीलयूं कढावणी मां तैं । दूध लेंती हाण कढावणी तोड़दी । उठण लाग्या तो उप्पर घी का बरोला लटकै था वो तोड़ दिया । सोच्चि ताई आज्यागी बस भाजले । ताई दरवाजे पै फेटगी अर तावल मैं उसकै भिड़गया । पाणी की दोघड़ भी फोड़दी । ताई बोली रे जाये रोये रमलू तनै रो लयूं । रमलू भाजता भाजता बोल्या -- इब्बै के सै ताई ज्यूं ज्यूं भीतर जागी तयूँ तयूँ रोवैगी ।
poori kahani share kariye, kabhi pita ji sunate the ramlu ki kahani
जवाब देंहटाएं