रविवार, 27 मई 2018

आधुनिक राष्ट्र का उदभव

आधुनिक राष्ट्र का उदभव - नागरिक राष्ट्रवाद बनाम रक्तिय और नस्लीय
राष्ट्रवाद
               ‘राष्ट्र’ की आधुनिक परिभाषा अठारहवीं  सदी के यूरोप में उभरी । इससे पहले वहां पर राजाओं और शासकों का राज्य था । उनकी रियासतों की अपनी सीमायें थी , लेकिन कोई भी एक देश नहीं था । उदाहरण के तौर पर देखें तो आस्ट्रो -हंगेरियन साम्राज्य, तुर्क साम्राज्य मध्य यूरोप के लगभग आधे हिस्से में था , ब्रिटिश साम्राज्य इंग्लैंड के बाहर की दुनिया केे एक बडे़ हिस्से में फैला था । फ्रेंच और जर्मन ,जो बार- बार यूरोप में एक दूसरे से युद्ध लड़ रहे थे, यहां पर एक राष्ट्र की कोई अवधारणा नहीं थी । प्रत्येंक समाज अपनी सीमाओं और विभिन्न धार्मिक समूहों के रुप में आपस में संघर्ष कर रहे थे जैसे- कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट आपस में एक दूसरे का विरोध कर रहे थे । दोनों ने पूर्वी रुढ़िवादी चर्च का विरोध किया । राष्ट्रों की अवधारणा , अठारहवीं सदी में परिभाषित की गई । कार्ल मार्क्स ने इसे पूजीवाद के तहत बाजार की आर्थिक सीमा कहा । यह आधुनिक राष्ट्र -राज्य का आधार बना।
 राष्ट्र -राज्यों के निर्माण की प्रक्रिया में पहचान हेतु एक सार्वजानिक सांस्कृतिक मापदंड बनाये गए ा इसमें सबसे अधिक भाषा को पहचान मिली | यह राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया का सबसे पहला भाग था |  भाषाओँ ,जिसके द्वारा हम यूरोप में सबसे अधिक देशों की पहचान आज करते हैं जैसे अंग्रेजी।, फ्रेंच ,इतालवी, डच ,जर्मन , पुर्तगाली , स्पेनिश आदि |  अपनी पहचान को बनाये रखने के लिए इन देशों का संघर्ष का एक लम्बा इतिहास है |   भाषाओँ की एक से अधिक संख्या की वजह से प्रमुख भाषा की पहचान के लिए विवाद हुए |  जैसे स्पेन में केटलोनिआ (बार्सिलोना के आसपास ) में लोगों का तर्क है कि कैटलन भाषा स्पेनिश भाषा से अलग है , फिर भी केटलिन भाषा को स्पेनिश के रूप में वर्गीकृत किया गया है |  इस प्रकार राष्ट्र के निर्माण की प्रक्रिया साधारण नहीं है कि अचानक , एक राष्ट्र का रूप ले ले | एक राष्ट्र के उभार में  बड़े सांस्कृतिक आदान - प्रदान का योगदान है | साथ ही अक्सर , हिंसक संघर्ष की भी हिस्सेदारी होती है |  राष्ट्र के निर्माण की प्रक्रिया में पूंजीवाद बाजार की स्थापना के साथ साथ एक भाषा को भी राष्ट्रीय पहचान के रूप में स्थापित होते देखा गया है |
           लेकिन क्या एक राष्ट्र और राष्ट्रवाद की परिभाषा को एक दो अलग अलग तरीकों से समझा जा सकता है |  दोनों परिभाषाओं में क्षेत्र या देश को एक भौगोलिक सीमा से परिभाषित किया गया है , जिसमें एक सीमाओं पर केंद्रित है जबकि दूसरी जनता को केंद्रित करती है |  नागरिक राष्ट्रवाद के विचा को फ़्रांसिसी क्रांति से प्रेरणा मिलती है |  जिसके अनुसार वे सभी लोग , जो देश की सीमा के भीतर रहते हैं फ़्रांस के पूर्ण नागरिक हैं |  इसलिए सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समान रूप में देखा गया और इसलिए " स्वतंत्रता , समानता,और भाईचारे" का नारा दिया गया | फ़्रांसिसी क्रांति ने न केवल सत्तारूढ़ अभिजात वर्ग को उखाड़  फैंका  है , बल्कि फ़्रांस में रहने वाले , सभी लोगों को पूर्ण नागरिकता का अधिकार दिया है जिसमें यहूदी भी शामिल थे |

जिन लोगों ने इस धारणा को आगे बढ़ाया या उससे प्रभावित थे, जो जर्मनी के अतीत और उनके पूर्वजों से आकर्षित थे उन्होंने नस्लीय शुद्धता की बात पर जोर दिया। यह एक काल्पनिक अतीत पर आधारित था , जैसा कि हम जानते हैं कि दुनिया में कोई भी देश नहीं है जहां पर सिर्फ एक ही तरह के लोगों  की आबादी  निवास करती हो । आबादी का आवागमन अलग अलग जगहों पर चलता रहता है । शुद्ध जर्मन राष्ट्र की यह अवधारणा सिर्फ एक मिथक है कि एक राष्ट्र उसके मूल निवासी की नस्लीय विशेताओं के साथ एक विशेष नस्ल की पहचान पर आधारित है। यह अपवर्ज नात्मक राष्ट्रवाद कुछ मनमाने ढंग की विशेषता पर आधारित है, जबकि सभी दूसरों को छोड़कर लोगों में से एक नस्ल में शामिल है ।
    यूरोपीय इतिहास के अंतिम तीन सौ साल में राष्ट्र की इन दो विवादास्पद विचारों का एक प्रतिबिम्ब बनाया गया है। इस तरह के समरूप रक्त और नस्लीय राष्ट्र को बनाने के प्रयास को आगे बढ़ाया गया। उदाहरण के लिए , डेनमार्क और नार्वे  से कैथोलिक और फ़्रांस से प्रोटेस्टेंट को बाहर किया गया । यूरोप में सैंकड़ों साल तक समरूप रक्त और नस्लीय राष्ट्रों के निर्माण के लिए युद्ध होते रहे । युद्ध , नरसंहार , जातीय सफाई और अल्पसंख्यक जनता के निर्वासन का खूनी इतिहास यूरोपीय राष्ट्रवाद के साथ जुड़ा है।
       रक्त और नस्लीय राष्ट्र की अवधारणा ने जर्मनी में फासीवाद को जन्म दिया । जिनके भी पूर्वज जर्मनी में निवास नहीं करते थे वे शुद्ध जर्मन नहीं माने जाते थे। और उनके लिए जर्मनी में कोई स्थान नहीं था । यह हिटलर की बुनियादी समझ थी । इस आधार पर जर्मनी में यहूदियों और जिप्सी को मारा गया । इस प्रकार जर्मनी में फासीवाद का उदय हुआ और द्वीतीय विश्व युद्ध के एक ख़राब प्रभाव के साथ समापन हुआ ।
      हिटलर और जर्मनी में अन्य फासिस्टों के प्रस्तावित राष्ट्रवाद का यह रूप पौराणिक अतीत में अपने मूल में नहीं था । समरूप रक्त और नस्लीय राष्ट्रवाद के विपरीत दूसरी परिभाषा का निर्माण सैकड़ों - हजारों सालों से लोगों के बीच बातचीत के माध्यम से निर्मित हुआ है । साझा संस्कृति का उद्भव , सांझी ( या कई भाषाओं के देशों में ) भाषा और एक राष्ट्र के रूप में एक साझा उद्देश्य से प्रेरित राष्ट्रवाद का परिणाम है । यूरोपीय राष्ट्रों के उद्भव में बातचीत एवम खूनी संघर्ष के एक साथ हुए थे । 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें