सोमवार, 22 अगस्त 2016

किसानों को खूब ठगा

Posted: 21 Aug 2016 06:12 AM PDT
 किसानों को ठगनें का काम विभिन्न सरकारों ने समय-समय पर किया है। साठ के दशक में सरकारों ने किसानों को रासायनिक खादों व कीटनाशक दवायें इस्तेमाल करने के नाम पर उनके निर्माताओं से लाभ लिया जाता रहा और आज जब उसके दुष्प्रभाव दिखाई दे रहे तो किसानों को सलाह दी जा रही है कि वह फिर देशी बीजों, आर्गेनिक पदार्थों का इस्तेमाल कर अनाज का उत्पादन करेें।   
    यह बात अखिल भारतीय किसान सभा द्वारा आयोजित जनसभा को सम्बोधित करते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सहसचिव रणधीर सिंह सुमन ने कहा कि किसनों के आत्म हत्या     का कारण समय-    समय पर शासक दलों द्वारा गलत नीतियाँ अपनाने के कारण हो रही है। इसके लिए किसानों को तर्क और बुद्धि का इस्तेमाल करते हुए आगे आना होगा।
    सभा को सम्बोधित करते हुए किसान नेता विनोद कुमार यादव ने कहा कि किसनों को दस हजार रूपये प्रतिमाह वृद्धा अवस्था पेंशन दिलाने के लिए 24 सितम्बर को विधान सभा पर धरना दिया जायेगा। वहीं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव बृज मोहन वर्मा ने कहा कि किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए प्रदेश व्यापी आन्दोलन की तैयारी की चुकी है। सभा को सम्बोधित करते हुए डा0 उमेश चन्द्र वर्मा ने कहा कि किसान उपज की न्यूनतम मूल्य समर्थन के बजाय अधिकतम मूल्य निर्धारित करने की व्यवस्था की जानी चाहिए।
    भाकपा नेता डा0 कौसर हुसैन ने कहा कि चुनाव में विभिन्न राजनैतिक दल भेष बदल-बदल कर किसानों व मजदूरों को ठगने के लिए आते हैं। जनसभा में मुनेश्वर बक्श वर्मा, मो0 सफी, आशीष यादव, गंगाराम, डा0इन्द्रपाल, प्रदीप कुमार मिश्रा, रामबहादुर वर्मा, रामदयाल सैनी, विकास श्रीवास्तव, राजेश सिंह, रमेश कुमार, कृष्णगोपाल मिश्रा, सुशील सिंह, अरूण कुमार आदि प्रमुख लोग उपस्थित थे। सभा का संचालन किसान सभा के जिलाध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने किया। 
 

रविवार, 21 अगस्त 2016

Kashmir

Dear Friend,

Day 44. Kashmir is still burning. One more death reported from Sri Nagar. A youth hit by tear gas shell dies in hospital, reports Greater Kashmir. Many parts of Kashmir valley is under curfew and the people besieged in their home. Respected sociologist Dr Fayaz Ahmad Bhat shares the anguish of Kashmiris in his moving article "Kashmir: A Cry From Hell!"

Something sinister is going on in Koodankulam nuclear power plant. VT Padmanabhan & Joseph Makkolil reports that KKNPP-1 is going through what is known as ‘power up-rate experiment’ defined as “the operation beyond the power level licensed by the regulatory body” (IAEA). The data shows that between December 2014 and August 2016  there were 188 successful uprated days!

P V Satheesh explores the lies and half truths spread by the GMO industry. He writes, "the promise of biotechnology in agriculture sounds very hollow. As people who have worked at the grassroots with farmers who have planted Bt cotton and have suffered heavily as a consequence, we feel the thick blanket of half-truths that wrap the dark secrets of the “success stories” of genetic engineering."

And many more stories from around the world.

Hey, are you doing this?

If you think the content of this news letter is critical for the dignified living and survival of humanity and other species on earth, please forward it to your friends and spread the word. It's time for humanity to come together as one family! You can subscribe to our news letter here http://www.countercurrents.org/news-letter/.

In Solidarity

Binu Mathew
Editor
www.countercurrents.orgKashmir

कफस नहीं है कश्मीर

Posted: 20 Aug 2016 06:24 AM PDT
कश्मीर घाटी में 42 दिन से सुलग रही आग पहले ही पीर पंजाल और जम्मू क्षेत्र की चेनाब घाटी तथा करगिल क्षेत्र तक फैलनी शुरू हो चुकी है. मोदी और उनके गिरोह के लोग कश्मीर में चल रही छाया युद्ध जैसी घटनाएं का समाधान निकालने में असफल हो रहे हैं और प्रधानमंत्री मोदी साहब समाधान की बजाये बलूचिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर अपनी नाकामियों को छिपाने के प्रयास कर रहे हैं. केंद्र व राज्य सरकार व उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल पेट्रोल तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं की बिक्री रोकने जैसे प्रशासनिक कदमों का इस्तेमाल कर ‘आंदोलन को कुचलने की’ कोशिश कर रही हैं।
                         जबकि इसके विपरीत आर्मी नेतृत्व की ओर से कहा जा रहा है कि अलग-अलग माइंडसेट वाले लोगों के बीच बातचीत होनी चाहिए. तो अब सवाल यह उठता है कि आखिर हमारे नेता लोग ऐसा क्यों नहीं कर सके. कश्मीर में हिंसा की वारदातें जारी रहने के बीच आर्मी ने शुक्रवार को अपील की थी कि शांति बनाएं रखें. आर्मी की ओर से कहा गया था कि हर किसी को पीछे हटने की जरूरत है, आर्मी ने कहा था कि वर्तमान हालत से निपटने के लिए मिल बैठकर रास्ता निकालने की जरूरत है.
                       जो काम राजनीतिक नेतृत्व को करना चाहिए उसकी बात हमारी सेना कर रही है और राजनीतिक नेतृत्व कश्मीरी जनता को जेलखाने में बंद समझ कर हर बात मानने को मजबूर कर देना चाहती है. राजनीतिक नेतृत्व के दिमागी दिवालियेपन से कश्मीर घाटी में आन्दोलन तेज पकड़ रहा है. आज वहीँ पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में राष्ट्रपति से मिला पूर्व मुख्यमंत्री के साथ प्रदेश कांग्रेस समिति के प्रमुख जीए मीर के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक, माकपा विधायक एमवाई तारिगामी और निर्दलीय विधायक हाकिम यासीन भी थे। 
             जब गैर राजनितिक,गैर लोकतान्त्रिक संविधान की प्रस्तावना को न मानने वाले  लोग सरकार पर काबिज हो गए हैं तो लोकतांत्रिक
या राजनीतिक प्रक्रिया बंद होगी और हिटलर या मोसाद की नरसंहारी योजनायें लागू होंगी. यह देश के दुर्भाग्पूर्ण स्तिथि है. कोई भी देश जनता से बनता है, रेखाओं से नहीं लेकिन नरसंहारी गिरोहों ने यह समझ रखा है की जनता को मार पीट कर गुलाम बना कर देश में रखा जा सकता है. हमारी सेना लोकतान्त्रिक प्रक्रिया या राजनितिक प्रक्रिया को समझती है इसीलिए कहती है  कि मिल बैठ कर रास्ता निकालो. जिसके लिए ये नरसंहारी गिरोह तैयार नहीं हैं.

सुमन 
 

शुक्रवार, 19 अगस्त 2016

Dr Baldev Singh


बहुत अफ़सोस है कि ज्ञान विज्ञान  अंदोलन  के पुरोद्धा डॉ बलदेव सिंह  बीच नहीं रहे ।  उनका दाह संस्कार आज सुबह 11 बजे शिला बाई पास वाले शमशान घाट पर किया जायेगा ।



शासक नरभक्षी हो गए हैं क्या

Posted: 18 Aug 2016 04:53 AM PDT
जम्मू एंड कश्मीर में लगभग 40 दिनों से सेना और जनता में राजनीतिक विफलता के कारण छाया युद्ध हो रहा है. जनता की ओर से लगभग 70 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं, कई हजार लोग घायल हैं. वहीँ हमारी सेना के भी लोग मारे गए हैं, भारी संख्या में घायल हैं. विपरीत परिस्तिथियों में काम करने के कारण उनके कार्यक्षमता पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है. सेना दुश्मनों से लड़ने के लिए होती है, नागरिकों से नहीं लेकिन दुर्भाग्य है कि हमारे देश में सेना का उपयोग अपनी ही जनता के खिलाफ किया जा रहा है.  कश्मीर में जहाँ सांसद और विधायक निर्वाचित हैं. स्वायत्तशासी संस्थाएं हैं पता नही वह क्या कर रही हैं. कर्फ्यू लगा हुआ है इन्टरनेट की सेवाएं बंद हैं. मोबाइल बंद है, अखबारों के ऊपर सरकार द्वारा प्रतिबन्ध न होने के बावजूद भी प्रकाशन व वितरण ठप सा हो गया है. अघोषित आपातकाल है. 15 अगस्त को प्रधानमंत्री बलूचिस्तान व पाक अधिकृत कश्मीर के लोगों को राजनीतिक समर्थन देकर विश्व को कौन सा सन्देश देना चाहते हैं. उनकी पार्टी के लोग कश्मीर का सवाल मुसलमान सवाल के रूप में देखते हैं और प्रधानमंत्री बलूचिस्तान व पाक अधिकृत कश्मीर के मुसलमान जनता की चिंता ज्यादा किये हुए हैं. 
                वहीँ, विदेश मंत्री स्तर की वार्ता शुरू करने का प्रस्ताव भी चल रहा है. सरकार की विदेश नीति और गृह नीति अलिखित है. जब जो चाहे इन नीतियों के सम्बन्ध में भाषण देना शुरू कर दे वही गृह नीति व विदेश नीति हो जाती है. 
   जम्मू एंड कश्मीर में चाहे जनता मरे या हमारी सेना दोनों दुखद हैं. शासक संवादहीनता के शिकार हैं. भारतीय नागरिक मर रहे हैं. नरभक्षी शासकों की जुबान चुप है. संवाद के माध्यम से राजनीतिक  तरीके से समस्या का समाधान हो सकता है. ताकत से नहीं जीता जा सकता है. सीमा पर एक तरफ तो मोर्टार व गोलियां चल रही होती हैं तो वहीँ बाघा बॉर्डर व हुसैनी वाला बॉर्डर पर पाकिस्तान से ही मिठाइयों का आदान प्रदान हो रहा है. जिससे यह साबित होता है कि शासक नरभक्षी हो गए हैं. इंसान के मरने से उनके ऊपर कोई असर नही होता है. 

सुमन 
 

राम देव


राम देव जी की हवा निकालनी आसान नहीं क्योंकि जनता को बेकूफ़ बनाना आता है उन्हें और जनता बेकूफ़ बनने की आदि बना दी गयी है । 

रविवार, 14 अगस्त 2016

Mahila Purush

सते फते नफे सविता कविता और संतोष चर्चा  घर  जाते हैं और बात चीत करने लगते हैं हर इतवार को ये सब और  और लोग  भी महिला पुरुष  बूढ़े जवान चर्चा घर में आते हैं  और  मण्डलिया बना  बना कर  बैठ जाते हैं और अपने अपने हिसाब से चर्चा करते हैं   महिलाओं  की दो अलग अलग टोलियां  बनती  हैं   तीन चार पुरुषों की  टोलियां  बनती  हैं  और  30 से 40  के बीच के महिला पुरुष  दोनों  की  मिली जुली मंडली सते  और सविता  आदि  की है नौजवान  लड़के  फुटबाल  खेलते हैं और लडकियां  हॉकी खेलती हैं इस  गॉव की चर्चा जहाँ भी होती है तो लोग कहते हैं कि  ऐसा कैसे हो सकता है ? सविता कहती है कि  मैं अपने मामाँ  के यहाँ गयी तो मेरी माँम्मी  ने धमकाया  और बोली -- क्यूँ  नाक कटावै  सै  म्हारी ? सारे गाम मैं चर्चा सै  चर्चा घर के थारे ग्रूप की     और भी तो सैं जो न्यारे न्यारे बैठ कै  चर्चा करैं  सैं थाम इसे के आंडी पाके  गाम मैं अक  कठ्ठे  बैठ कै  किलकि मारो फेर तूने  क्या जवाब दिया -- फते  ने पूछा मैंने तो यही कहा की हम अपने परिवार में इकठ्ठे बैठते हैं   दफतरों में इकठ्ठे बैठ कर काम करते हैं    चर्चा  घर में इकठ्ठा बैठ कर बातचीत करने में क्या बुराई है   कविता -- तो मामी मान गयी ? सविता  कुछ देर सोचती रही और फिर बोली -- निरुत्तर तो हो गयी मगर कन्विंस नहीं हुई   फते  ने कहा -- क्यूँ बिना बात की  बात पै गहटा  तार रे सो कई बर चर्चा होली इस बात पर संतोष बोली -- आर्य समाज नै भी तो महिला शिक्षा पर तो खूब  जोर लाया था फेर कोएजुकेशन का तो विरोध ही करया  था हरयाणा मैं और कोई समाज सुधार आंदोलन हुया कोन्या  तो लोग तो उसे हिसाब तैं देखेँगे म्हारे चर्चा  घर नै   नफे बोल्या -- हमनै जितनी बातां पर चर्चा करके गाम तहिं अपनी राय दी उनमां तैं अस्सी प्रतिशत पूरे गाम नै भी मानी सैं ना धाना खोदन की बात , ट्यूबवेलों का पानी टेस्ट करावन की बात कविता बोली यो चर्चा घर म्हारे  बिना पूरा हो सकै था के। सन्तोष बोली बेरा ना  हरयाणे आल्यां कै के होरया सै कदे सुल्टी सोचदे कोण्या कै तो सोचक्ैं कोण्या अर जै सोचैंगे भी तो उल्टी सोचैंगे। एक बर की बात सै-
जाडयां के दिन थे म्हारला चौधरी बगड़ मैं खाट घालें लौटरया था धौरै भैंस बंधरी थी अर ना बैठी बैठी जुगालै थी। चौधरी नै देख्या अक भैंस के सींग जमा गोल सैं। फेर सोच्ची अक इसके सींग मैं जै पां दे दयू ंतो के बणै? के बणैगी यो तो इसनै बेरा था ठहरग्या थोड़ी सी वार मैं फेर कुलकुली सी उठी अर पां एक बर सरकाया सींग कान्ही पर फेर रुकग्या। न्यों करदें सोचदें आधा घन्टा होग्या उसनै अर आखिर मैं पां दे दिया भैंस के सींग मैं। बस के था भैंस खड़ी होगी अर म्हारला चौधरी भी उल्टा लटकग्या अर रोल्ला मचादिया। भीतर तैं मेरा ज्येठ लिकड़ कै आया हम आगे। भाज कै आरी ल्याये अर भैंस का सींग काट कै चौधरी का पां काढया। मेरा ज्येठ बोल्या- बाबू या के सोच्ची तनै। वो बोल्या- इस सोच्चण की तै इसी तिसी होरी थी। बाकी सारे कसूते हंसे। सते बोल्या-इतनै हम विवेक तैं ढंग तैं सोचना शुरु नहीं करांगे तो न्योंए भैंस के सींग मैं पां फंसान्दे रहवांगे अर सैक्स रेसो मैं अर बाकी घणी चीजां मैं न्यूंए पाछे नै जान्दे रहवांगे। सविता बोली जिस दिन या बात समझ आज्यागी उस दिन हरयाणा की शक्ल बदलज्यागी। म्हारे चर्चा घर के चर्चा मण्डल नै इन दकियानूसी बातां का मुकाबला करना पड़ैगा।

रणबीर सिंह दहिया