रविवार, 3 अगस्त 2014

पन्दरा अगस्त

पन्दरा अगस्त
पन्दरा अगस्त सैंतालिस का दिन लाखां जान खपा कै आया।
घणे हुये कुर्बान देस पै जिब आजादी का राह पाया।।
सैंतालिस की आजादी र्इब दो हजार लिया
बस का भाड़ा याद करो यो कड़ै सी जा लिया
सीमैंट का कटटा कितने का आज कौणसे भा लिया
एक गिहूं बोरी देकै सीमैंट हमनै कितना पा लिया
चिन्ता नै घेर लिये जिब लेखा-जोखा आज लगाया।।
आबादी èाी दोगणी पर नाज चौगुणा पैदा करया
पचास मैं थी जो हालत उसमैं बताओ के जोड़ धरया
बिना पढ़ार्इ दवार्इ खजाना सरकारी हमनै रोज भरया
र्इमानदारी की करी कमार्इ फेर बी मनै कड़ सरया
भ्रष्टाचार बेइमानी नै क्यों सतरंगा जाल बिछाया।।
यो दिन देखण नै के भगत सिंह नै फांसी पार्इ थी
यो दिन देखण नै के सुभाष बोस नै फौज बनार्इ थी
यो दिन देखण नै के गांधी बापू नै गोली खार्इ थी
यो दिन देखण नै के अम्बेडकर ने संविधान बनार्इ थी
नये-नये घोटाले सुणकै यो मेरा सिर चकराया।।
गणतंत्र दिवस पै कसम उठावां नया हरियाणा बणावांगे
भगत सिंह का सपना धूरा उसनै पूरा कर दिखावांगे
ना हो लूट खसोट देस मैं घर-घर अलख जगावांगे
या दुनिया घणी सुन्दर होज्या मिलकै हांगा लावांगे

रणबीर सिंह मिलकै सोचां गया बख्त किसकै थ्याया।।

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