रविवार, 19 अक्टूबर 2014

सशक्त नारी से ही बनेगा सशक्त समाज

सशक्त  नारी से ही बनेगा सशक्त समाज


GaonConnection-35th-(1)आज के माहौल में महिला सशक्तिकरण की बात करने से पहले हमें इस सवाल का जवाब ढूंढना जरूरी है कि क्या वास्तव में महिलायें अशक्त हैं ? कहीं ऐसा तो नहीं कि अनजाने में या स्वार्थ के लिए उन्हें किसी साजिश के तहत कमजोर दिखाने की कोशिश हो रही है?
इतिहास गवाह है कि मानव सभ्यता के विकास के साथ साथ “ताकतवर को ही अधिकार” मिला है। और धीरे-धीरे इसी सिद्धांत को अपनाकर पुरुष जाति ने अपने शारिरीक बनावट का फ़यदा उठाते हुऐ महिलाओं को दोयम दर्जे पर ला कर खड़ा कर दिया। औऱ औरतों ने भी उसे अपना नसीब व नियति समझकर, स्वीकार कर लिया।
भारत में ही नहीं, दुनिया भर में महिलाओं के खिलाफ भेदभाव और शोषण की नीतियों का सदियों से ही बोलबाला रहा है। इतना जरुर कह सकते हैं कि मापदंड व तरीके अलग-अलग जरुर रहे हैं ।
सीता से लेकर द्रौपदी तक को पुरुषवादी मानसिकता से दो-चार होना पड़ा है। हर युग में पुरुष के वर्चस्व की कीमत औरतों ने चुकाई है या उसे चुकाने पर मजबूर होना पड़ा है। यही वजह थी कि ढोल,गंवार, शुद्र, पशु नारी , ये सब ताडन के अधिकारी और नारी तेरी यही कहानी आंचल में दूध आंखों में पानी जैसी रचनायें रची गईं । ये साबित करने के लिए काफी है कि हमारे देश में देवी समान पूज्नीय नारी के आदर औऱ सम्मान में काफी हद तक पतन हुआ है।
विश्व की आबादी का एक चौथाई ग्रामीण महिलाएं एवं बालिकाएं हैं। लेकिन, वो सभी आर्थिक, सामाजिक और राजनैतिक सूचकांक के निम्नतम स्तर पर हैं। आय, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और निर्णय प्रक्रिया में उनकी सहभागिता काफी कम है। ग्रामीण और कृषि क्षेत्र के अवैतनिक सेवा कार्यों में उनका योगदान बहुत ज्यादा है। जिन देशों में महिलाओं को भूमि के स्वामित्व का अधिकार नहीं है या जहाँ वे नकद राशि नहीं पा सकती हैं वहाँ कुपोषित बच्चों की संख्या भी काफी बडी है।
साल 2011 में इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कहा था कि राष्ट्र की आर्थिक गतिविधियां में महिलाओं की उचित भागीदारी के बिना सामाजिक प्रगति की उम्मीद करना बेइमानी है।
संयुक्तराष्ट्र के एक सर्वेक्षण के मुताबिक जहां-जहां महिलाओं की व्यापार और कॉरपरेट जगत में अहम भागीदारी रही है, वहां करीब 53% ज्यादा लाभांश और करीब 24% ज्यादा बिक्री दर्ज की गई । लेकिन, कुछ महिलाओं को ऊंचाई पर देख, हम अशिक्षित महिलाओं को नजर अंदाज नहीं कर सकते। हमारे देश में ऐसी अशिक्षित महिलाओं की संख्या ज्यादा है, जो आज भी गरीबी, कुपोषण और घरेलू हिंसा के शिकार हैं। यहीं नहीं ये महिलाएं बेटी को जन्म देने के फैसले के लिए भी वे पुरुषों पर निर्भर हैं ।
इसी साल संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव बान की मून ने भी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर आयोजित एक समारोह में महिलाओं की बराबर की भागीदारी पर जोर दिया था। उन्होंने कहा कि ग्रामीण महिलाओं और युवतियों की पीड़ा समाज की महिलाओं और लड़कियों को प्रतिबिम्बित करती है। अगर संसाधनों पर समान अधिकार हो और वे भेदभाव और शोषण से मुक्त हों तो ग्रामीण महिलाओं की क्षमता पूरे समाज की भलाई के स्तर में सुधार ला सकती है।
सही मायने में देखा जाये तो महिला सशक्तिकरण का अर्थ ही है महिला को आत्म-सम्मान देना और आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वो अपने अस्तित्व की रक्षा कर सकें।
जब तक महिलाओं का सामाजिक, वैचारिक एवम पारिवारिक तौर पर उत्थान नहीं होगा तब तक सशक्तिकरण का ढोल पिटना एक खेल ही बना रहेगा । सामाजिक उत्थान का आधार-स्तंभ है नारी-शिक्षा और शिक्षित व्यक्ति ही अपनी समानता और स्वतंत्रता के साथ-साथ अपने कानूनी अधिकारों का बेहतर इस्तेमाल कर सकता है ।
इसी मकसद से डिजिटल एंपावरमेंट फाउंडेशन ने देश भर में करीब ऐसे 40 डिजिटल रिसोर्स सेंटर यानी ‘डीआरसी’ की स्थापना करने का फैसला किया है जो महिलाओं द्वारा और महिलाओं के लिए संचालित होंगी। ये डीआरसी बतौर सूचना संसाधन केंद्र की तरह भी काम करेगा जहां महिलाएं हर तरह की सूचना प्राप्त करने के साथ-साथ कई तरह का प्रशिक्षण भी लेंगी जिसे वो अपनी जीविका का साधन बना सकें। फिलहाल, पहले फेज ऐसे 10 डिजिटल रिसोर्स सेंटर महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात में खोले जाएंगे जिसके जरिए महिलाएं खुद को डिजिटली साक्षर बनाकर ग्रामीण विकास में सहयोग देंगी।
वैसे तो व्यवसाय, सरकार, सार्वजनिक प्रशासन, राजनीति और अन्य पेशा में महिलाएँ पहले से कहीं अधिक अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर रही हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में स्थिति बिल्कुल विपरित हैं।
ऐसे में गांवों का देश कहे जाने वाला देश भारत में अभी बहुत लम्बा सफर तय करना है ताकि महिलाएं और बालिकाएं अपने बुनियादी अधिकारों, आजादी और सम्मान का लाभ उठा सकें, जो उनका जन्मसिद्ध अधिकार है। और इसके लिए डिजिटल एंपावरमेंट फाउंडेशन का डिजिटल रिसोर्स सेंटर उनके महिलाओं के सशक्तिकरण और कल्याण को सुनिश्चित करने में काफी मददगार साबित होगा। इससे सिर्फ ग्रामीण महिलाओं का सशक्तिकरण ही नहीं, बल्कि इसके साथ-साथ समाजिक विकास को भी नई गति मिलेगी।
ओसामा मंजर
लेखक डिजिटल एंपावरमेंट फउंडेशन के संस्थापक निदेशक और मंथन अवार्ड के चेयरमैन हैं। वह इंटरनेट प्रसारण एवं संचालन के लिए संचार एवं सूचनाप्रौद्योगिकी मंत्रालय के कार्य समूह के सदस्य हैं और कम्युनिटी रेडियो के लाइसेंस के लिए बनी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्यहैं।

Dark days of violence on Dalits

Dark days of violence on Dalits return to haunt in Bihar

Bihar

Dalit leader Ramai Ram at Mohanpur where a boy was burnt alive, allegedly by upper-caste men.  Source: Prashant RaviDalit leader Ramai Ram at Mohanpur where a boy was burnt alive, allegedly by upper-caste men.Source: Prashant Ravi
Written by Santosh Singh | Patna | Posted: October 19, 2014 2:36 am | Updated: October 19, 2014 7:20 am
The Dalits who mobbed Bihar minister Ramai Ram in Sasaram on Wednesday do not have knowledge of the state’s latest crime statistics but their anger is backed by numbers.
There has been a remarkable spurt in violent crimes against Dalit communities in Bihar this year. The numbers since 2005 are bad enough — 32,395 cases of atrocities till this August — but it’s the 10,681 cases in the past 20 months that point to an alarming uptrend. It gets worse from this January to August: 4,322 cases, including 361 cases under the Prevention of Atrocities against SC/ST, the highest in the past nine years.
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Fingers are being pointed at state Chief Minister Jeetan Ram Manjhi, himself a Mahadalit, for lack of a proper response but observers see reasons beyond inept running of the police machinery. A state with a dark history of oppression of its lowest-caste poor may be seeing a fragmentation of the “social coalition” of Dalits and upper castes after the split in the governing NDA in June 2013.
Veteran Dalit leader Ramai Ram was in Mohanpur village of Rohtas district to hand over a compensation cheque of Rs 2.8 lakh for the death of Sai Ram, 15, who was burnt alive, allegedly by upper caste men on Wednesday. But there was no gratitude, only angry words.
“We have been at the receiving end even after Manjhi became CM. A leader like you (Ram) has been a lackey of Lalu Yadav and Nitish Kumar for 25 years but done little for our empowerment,” a resentful villager told Ramai Ram. “There are no toilets for us. Our women suffer humiliation when they go to upper-caste people’s fields.”
When a villager tried to praise the visiting minister, an angry protester slapped him. A sobered Ram said: “I can understand their anger. They have real issues we need to address.”
The rising crime numbers since January last year have been brought in sharp focus by three big back-to-back anti-Dalit incidents in the month: rape of six Dalit women and minors in Bhojpur earlier this month; over 150 in Gaya being forced to leave their village after clashes with dominant upper castes in September-end; and Manjhi’s highly publicised accusation that a Madhubani temple was cleansed after his visit.
The main accused in the Bhojpur rapes, for example, was a member of the disbanded landlord army Ranbir Sena and all three belonged to upper castes.
Manjhi may have been inaccurate in reporting this personal insult but since he became CM in May, more than 20 anti-Dalit atrocities have been committed. This includes a Dalit chief engineer Narayan Paswan, who was beaten by an upper-caste contractor at a Patna office after he was reportedly denied a contract.
Politicians, police officers and social scientists said “dalits are being made targets”. LJP chief and Union minister Ramvilas Paswan told The Sunday Express: “Manjhi has failed to inspire as Dalit leader and made offensive remarks that will only break social cohesion. Recent incidents of atrocities do suggest social goodwill achieved in past few years is breaking.”
A senior police officer said it should be also kept in mind that cases under SC/ST Act were not lodged during RJD rule. “There are at least 200 murder cases between 2000 and 2005 in which SC/ST Act was not added,” he said.
However, Shaibal Gupta of ADRI, a social research group, differed: “One thing behind the attacks on Dalits is noticeable — all are done in a demonstrative manner, as if to send a message of the break-up of ties between two social extremes of Dalits and upper-castes, achieved when BJP and JD(U) were together.”
He said upper-caste people bore the brunt of OBC anger during Lalu’s first term and they are now unwilling to accept Manjhi as CM. “Upper-caste people had registered their anger against Nitish by not voting for JD(U) in the Lok Sabha elections. Now the chasm is wide open.”
RJD vice-president and former Union minister Raghuvansh Prasad said: “It is true that Dalits are being targeted. Our support to JD(U) is driven by a combined fight against BJP but we are not happy with the way things are going.”
The Congress, which support the JD(U) government, is also displeased. Bihar Congress chief Ashok Kumar Choudhary, also a Mahadalit, said: “Recent incidents clearly suggest disintegration of social bonds. Dalit leaders and the state government have to make serious efforts.”
Bihar Human Right Commission member and former state police chief Neelmani said: “Police responses have been prompt but issues of social disharmony need to be addressed. That a Mahadalit is CM is a great sign of empowerment but social disharmony is continuous work.”
– See more at: http://indianexpress.com/article/india/india-others/dark-days-of-violence-on-dalits-return-to-haunt-bihar/99/#sthash.zUjbOGDb.dpuf

शुक्रवार, 17 अक्टूबर 2014

आज का कड़ुआ सच

आज का कड़ुआ सच
दरअसल मानवीय प्राथमिकताओं के भयावह असंतुलन से नजरें चुराकर ही आप आज की दुनिया में तथाकथित वैश्वीकरण उदारीकरण व् निजीकरण की हिमायत कर सकते हैं । साधनों की इन भयावह विषमताओं और पूंजी पर बहुराष्ट्रीय दानवों के बढ़ते शिकंजे के चलते क्या इस दुनिया के लिए अपनी समूची जनसंख्या के लिए  भेद भाव लाये एक बड़े परिवार की तरह खिलाना पिलाना और पोषित करना सम्भव है ?सांस्कृतिक और आर्थिक खाई को पाटने की रामबाण दवाई हैं ये तीन शब्द ।  इस रामबाण दवाई ने रिएक्शन करना ही था और यह कर दिया और बेचैनी पैदा हुई जिसको आज दक्षिण पंथी ताकतों ने बखूबी भुना लिया है । अभी देखना है और लड़ना है । 

उम्मीद

जल रहा सब जहाँ उम्मीद करें भी तो कैसे करें
नहीं पहली सी फिजां यकीन करें भी तो कैसे करें
अनुशासन की सीख हमें खुद सभी कानून तोड़ो
ऐसा इन्साफ यहाँ तस्लीम करें भी तो कैसे करें
खानाबदोश बनाओ हमको हमीं से गिला करो
प्यार की गुंजाईश कहाँ दुश्मनी करें भी तो कैसे करें
हमारी आह भी गुनाह  कत्ल  मुआफ उनके
कैसे  जाती ये शमाँ बयाँ करें भी तो कैसे करें
किसने किसे तड़फाया है सही हिसाब करेगा कौन
ये तुम्हारी बात वहां मंजूर करें भी तो कैसे करें
सच कहना अगर बगावत है तो हम दोषी हैं
रणबीर झूठा इम्तिहाँ पास करें भी तो कैसे करें
1987 

सोमवार, 6 अक्टूबर 2014

एक अनुभव

एक अनुभव
बहुत सी कंपनियों के मैडीकल रिप्रेजेंटेटिव से बात होती  थी कि आप की कंपनी जो कमीशन दवाई लिखने के बदले डाक्टर को देती है वह मुझे नहीं चाहिए मेरे मरीज को उतनी सस्ती दवाई दे दो मगर 37 साल के समय में एक भी कंपनी  मरीज की मदद को नहीं आई । एक दवाई की कीमत 16000 है (MRP ). मेरे पास इ मेल है उस कंपनी का जो यही दवाई 1200 + taxes (1600 ) में देने को तैयार थी । MRP और सेल प्राइस में इतना गैप क्यूँ ??सरकार तय करती है किस तरीके से कितना कमीशन खाकर ???  लोगों को चुनाव में पूछना चाहिए । अब 108 दवाईयां और भी मंहंगी हो जाएंगी । अच्छे दिन आ रहे हैं थोड़ा और इंतज़ार करो । 

रविवार, 5 अक्टूबर 2014

छक्का

छक्का
कभी जात  पात के नाम पर कभी शराब की बोतल में नाश करते
आदमी के लछन देखे बिना भकायी में आ बटन दबा पास करते
चंद रूपयों में जो वोट खरीदता जीतें पिछें पांच साल ना टोहे पाते
इलैक्शनों में हाथ  जोड़ते फिरते जीतने बाद कित का कौन बताते
कल  चल वोट डालने  पांच साल में  यो मौका आता है देख ताऊ
जिसको चाहें बिठा दें कुर्सी पे वोट से राज बदल जाता है देख ताऊ
"रणबीर "रोहतक
छक्का
इलेक्शन के बाद हुड्डा चौटाला कहते  जायेंगे
इनेलो कांग्रेस एक मंच पर लोग बताते आएंगे
मोदी साहब अपनी लहर अबकि ना चला पाएंगे
हंग मामला होगा पैसे से खरीद के फिर लाएंगे
कांग्रेस भाजपा बिन बाकी सरकार ये बनाएंगे
ये सट्टे वाले भाजपा  जीत का सट्टा लगाएंगे
"रणबीर "रोहतक
छक्का
भ्रष्टाचार  का बोलबाला आज कौन मिटा पायेगा
मैडीकल की लूट से आज कौन राहत दिलवाएगा
बेरोजगारों की लम्बी कतार कौण ख्याल करेगा
बलात्कारों की आज भरमार कौण ख्याल करेगा
काले धन की वापसी का कब तक हो इन्तजार
 महँगाई से निजात मिले हो इसकी मांग बारम्बार
"रणबीर "रोहतक

फ्री ओ पी डी


 आज 12 बजे किशन पुरा गॉवों के बुजुर्गों से और चौपाल 
की मैनजमेंट कमेटी से विस्तार से बातचीत हुई और तय 
किया कि  चौपाल में फ्री ओ पी डी मंगलवार और शुक्रवार 
को सुबह 10  बजे से 12 बजे तक चलायी जाएगी । 
डा रणबीर सिंह दहिया रिटायर्ड सर्जन पी जी आई एम एस , 
डा ओम प्रकाश लठवाल रिटायर्ड मेडिकल सुपरिंटेंडेंट पी जी 
आई एम एस व श्री आजाद  सिवाच सेवानिवृत फार्मासिस्ट 
अपनी सेवाएं इस फ्री ओ पी डी में निरंतर देंगे । 
जान स्वास्थ्य अभियान हरयाणा ------- हरयाणा ज्ञान विज्ञानं समिति