सुबह रोती है फिर श्याम रोती है
अपनी इज्जत आबरू महिला
सुबह खोती है फिर श्याम खोती है
दलित जीवन में अमीरी दुःख के बीज
सुबह बोती है फिर श्याम बोती है
दबंग और पैसे की दुनिया रंगीन
सुबह होती है फिर श्याम होती है
लगते हैं जो धब्बे काली रातों में
सुबह धोती है फिर श्याम धोती है
सफरिंग दुनिय शाइनिंग दुनिया को
सुबह ढ़ोती है फिर श्याम ढ़ोती है
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