मंगलवार, 28 अक्टूबर 2014

एक बात

 
सुबह होती है फिर श्याम होती है 
सुबह रोती  है फिर श्याम रोती है 
अपनी इज्जत आबरू महिला 
सुबह खोती है फिर श्याम खोती है 
दलित जीवन में अमीरी दुःख के बीज 
सुबह बोती है फिर श्याम बोती है 
दबंग  और  पैसे की दुनिया रंगीन 
सुबह होती है फिर श्याम होती है 
लगते हैं जो धब्बे काली रातों में 
सुबह धोती है फिर श्याम धोती है 
सफरिंग दुनिय शाइनिंग  दुनिया को 
सुबह ढ़ोती है फिर श्याम ढ़ोती है 

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