हरयाणा में एक तरफ तो विकास के लम्बे चौड़े दावे किये जा रहे हैं परन्तु दूसरी और रोजगार ,शिक्षा -स्वास्थ्य , आवास ,भोजन बुनियादी जरूरतों से वंचित आदमी की दशा बद से बदतर होती जा रही है । जिंदगी की सभी जरूरी चीजों की कमर तोड़ मंहगाई से उसका जीना दूभर हो गया है । जन मोर्चों ने लम्बे संघर्षों से नरेगा , खाद्य सुरक्षा अधिकार , शिक्षा अधिकार जैसे जो कानून बनवाए हैं आज उन पर खतरा मंडरा रहा है । सब्सिडी खैरात के रूप में प्रचारित करके अनाज , खाद , बीज , डीजल , गैस आदि पर से सरकार खर्चा घटा रही है । लेकिन बड़े पूंजीपतियों और विदेशी कंपनियों को पहले मनमोहन सरकार और अब मोदी सरकार लाखों करोड़ रूपये की रियायतों के तोहफे दे रही है.
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