बुधवार, 24 सितंबर 2014

गाम की इज्ज़त --घूँघट


गाम की इज्ज़त --घूँघट 
ठमलू रमलू और कमलू  बैठक मैं बैठ कै बात फोडण लागरे थे । इतने मैं रमलू  का छोरा भाज्या भाज्या आया अर बोल्या - बाबू बाबू चाल मेरी माँ बुलावै सै । राशन कार्ड आले आरे सैं । वे फोटू खींचैगे सबका कठ्ठा । रमलू उसकी साथ चला गया । कमलू बोल्या - देख लिया जोरू का गुलाम । फोटो खिंचवावैगा सारे कुनबे का । बहु बी उड़ै ए अर सुसरा बी उड़ै ए । घूँघट तार  कै , नँगी होकै , बड़े बडेरयां कै साहमी फोटू ?गाम मैं रहणा सैहना कुछ ना भाई । बिना घूंघट किसी बहु ? घूंघट तै लिहाज शर्म खातर होसै । पर बेरा  ना आज काल के बालकां कै के होरया सै ? बेशर्मी की बी कोए हद होसै ? न्यूँ बहु छाती दिखान्ती हांडै या के बर्दास्त होवण  की बात मार मार सै ? ठमलू बी कमलू की भकायी मैं आग्या अर दोनूँ लठ ठा ठा कै भाज लिये  चौपाड़ कान्ही । और बी कई माणस जेली अर गंडासे ठा ठा कै उनकी साथ भाज लिए।   बूझी बी अक रै के बात होई ? कमलू  बोल्या - रै गाम की इज्जत का मसला सै । बस बूझो मतना । तीस चालीस लोग उनकी गेल्याँ होगे । ल ठ , जेली अर गंडासे लोगां  के   हाथां मैं देख कै फोटो खींचनिया तै दो ए सैकिण्ड मैं रफू चक्कर होगे उड़े तैं । ठमलू अर कमलू नै गाम की इज्जत बचा ए ली आखिर मैं । रमलू नै बूझ्या अक यो गाम की इज्जत  का रोला म्हारे कुनबे की फोटो गेल्याँ क्यूकर  चिपग्या ? कमलू नै घूंघट के फेर गुणगान  दिए । 
रमलू बोल्या - जिब उड़ै खेताँ मैं लुगाईयां गेल्याँ बलात्कार हों जिब गाम की इज्जत कड़ै जाया करै ?
जिब ओटड़े कूद कै बदमाश म्हारे घर मैं बड़ज्याँ अर बद फेली करैं अर घर का माणस विरोध करै तो मार मार कै  उसनै वे बदमाश ना जीण मैं छोड़ड़ैं ना मरण मैं , जिब गाम की इज्जत कड़ै चाळी जा सै ? 
जिब गाम के छोरे दारू पी कै अर स्मैक चढ़ा कै बीरबानियां नै जँगल होकै आवण की बी मुश्किल करदें सैं , जिब गाम की इज्जत कड़ै जा सै ?
जिब गाम के चौधरी अर कुबधि लोग बिजली के सीधे तार फिट करकै बिजली की चोरी करैं सैं तो गाम की इज्जत कित जा सै ?
अर रही घूंघट की बात । तै भाई इज्जत का अर घूंघट का कोए मेल कोण्या । जिन कौमाँ मैं औरत घूंघट नहीं करदी उनकै के इज्जत कोन्या ? अर जो घूंघट तै गोड्यां ताहीं का करले अर घणी भैड़ी बोलै वा बात सही ? मैं थारी बात कोन्या मानूं । औरतां नै दाब कै राखण खातर इस घूंघट का साहरा लिया जा सै । जै या बात ना हो अर मान सम्मान का ए मसला हो तै फेर छोरियाँ नै बी घूंघट करना चाहिए । घूंघट आज्ञाकारिता का , शुद्ध चरित्र का ,औरत की पवित्रता का , उसकी शालीनता का बड़ी चतुराई तैं एक सामाजिक पैमाना बना दिया । असल मैं घर के , गाम के (पंचायत के ) , हल्के के , प्रदेश के अर देश के जरूरी फैंसले करण  मैं औरत शामिल ना हो पावै , इस खातर यो सब प्रपंच रच राख्या सै । ज्ञान प्राप्त पांच इन्द्रियाँ तैं प्राप्त करया जा सकै सै -आँख तै देख कै , कान तैं सुण कै , नाक तैं सूंघ कै , जीभ तैं चाट कै , अर हाथ तैं छू कै । इनमें तैं चार इंद्री घूंघट मैं घोंट दी । ज्ञान कैसे प्राप्त करै ? कितनी बड्डी साजिश ?? आई किमैं समझ मैं कमलू ठमलू ? जै औरतां नै आगै बढ़ना सै तो घूंघट तो तार कै फेंकना ए पड़ैगा । ठमलू बोल्या - रै ओ रमलू सुनिये एक बै । तूँ  उन ज्ञान विज्ञान आल्यां मैं तो नहीं जावण लॉग लिया सै ? वे ए इसी उल्टी सीधी बात सीखावैं सैं औरतां नैं । उनकी गेल्याँ बी कदे दो दो हाथ होना पड़ैगा । रमलू बोल्या - साच्ची कैहदी तै जणू आंख्यां मैं आंगली दे दी । 
रणबीर सिंह 
24. 9. 2014 

        

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