स्वतंत्रता सेनानी पंडित नेकी राम शर्मा के जनम दिन के मौके पर
कुलभूषण आर्य भिवानी
टेक : जाति बाहर गेरया था वो पंडित नेकीराम सुण्या होगा रै ।
जित रहया करैं थे वो भी केलंगा गाम सुण्या होगा रै ।
7 सितम्बर 1887 मैं एक अच्छी घड़ी आई थी
पांच भाइयों मैं चौथे नंबर पर जगह पाई थी
पढ़ लिख कर पंडित बणज्या दादा नै इच्छा जताई थी
सीतापुर और बनारस के म्हां शुरू करी पढ़ाई थी
समय हो बलवान न्यूँ सब पर कहते सुण्या होगा रै ।
किसानों की देख हालत चिंता गहरी जताई थी
9 जनवरी सन 1929 को अलखपुरा मैं किसान सभा बनाई थी
लालपत राय और नेकीराम नै कठ्ठे हो सलाह मिलाई थी
आजादी पावण की खातर संघर्ष की राह बताई थी
15 नवम्बर 1929 गढ़ी मैं आये मदन मोहन मालवीय नाम सुण्या होगा रै ।
बेगार प्रथा हो खत्म न्यूँ योजना पूरी बनाई थी
16 गॉवों की हो जनता कठ्ठी करी शुरू लड़ाई थी
सिवाना,जीतपुरा , सिकंदरपुर , गढ़ी , हजारी खेड़ी आई थी
अलखपुरा -मेहन्दा -कूंगड़ -बड़सी और दुर्जनपुर नै मिल करी चढ़ाई थी
आगै होकै लिया भाग वो जालिम स्कीनर सुण्या होगा रै ।
5 दिसंबर 1940 को जवाहर चौंक मैं चिंगारी एक सुलगाई थी
सुण भाषण नेकीराम का अंगरेजी सरकार थर्राई थी
चाँद नारायण ए डी एम की अदालत मैं कड़ी सजा सुनायी थी
पंडित जी ना घबराया भाई कसम आजादी की खाई थी
रास्ते से नां भटकने वाला वीर नेकीराम सुण्या होगा रै ।
के के बतावां पंडित या घणी बड़ी कहानी सै
समझे कोन्या अच्छी तरियां या म्हारी नादानी सै
इब बी ले समझ तो जा बण बात या लम्बी जिंदगानी सै
पंडित जी की बात कुलभूषण जन जन तक पहुँचानी सै
लडैगा वह जीतैगा यूं पंडित जी का पैगाम सुण्या होगा रै ।
कुलभूषण आर्य भिवानी
टेक : जाति बाहर गेरया था वो पंडित नेकीराम सुण्या होगा रै ।
जित रहया करैं थे वो भी केलंगा गाम सुण्या होगा रै ।
7 सितम्बर 1887 मैं एक अच्छी घड़ी आई थी
पांच भाइयों मैं चौथे नंबर पर जगह पाई थी
पढ़ लिख कर पंडित बणज्या दादा नै इच्छा जताई थी
सीतापुर और बनारस के म्हां शुरू करी पढ़ाई थी
समय हो बलवान न्यूँ सब पर कहते सुण्या होगा रै ।
किसानों की देख हालत चिंता गहरी जताई थी
9 जनवरी सन 1929 को अलखपुरा मैं किसान सभा बनाई थी
लालपत राय और नेकीराम नै कठ्ठे हो सलाह मिलाई थी
आजादी पावण की खातर संघर्ष की राह बताई थी
15 नवम्बर 1929 गढ़ी मैं आये मदन मोहन मालवीय नाम सुण्या होगा रै ।
बेगार प्रथा हो खत्म न्यूँ योजना पूरी बनाई थी
16 गॉवों की हो जनता कठ्ठी करी शुरू लड़ाई थी
सिवाना,जीतपुरा , सिकंदरपुर , गढ़ी , हजारी खेड़ी आई थी
अलखपुरा -मेहन्दा -कूंगड़ -बड़सी और दुर्जनपुर नै मिल करी चढ़ाई थी
आगै होकै लिया भाग वो जालिम स्कीनर सुण्या होगा रै ।
5 दिसंबर 1940 को जवाहर चौंक मैं चिंगारी एक सुलगाई थी
सुण भाषण नेकीराम का अंगरेजी सरकार थर्राई थी
चाँद नारायण ए डी एम की अदालत मैं कड़ी सजा सुनायी थी
पंडित जी ना घबराया भाई कसम आजादी की खाई थी
रास्ते से नां भटकने वाला वीर नेकीराम सुण्या होगा रै ।
के के बतावां पंडित या घणी बड़ी कहानी सै
समझे कोन्या अच्छी तरियां या म्हारी नादानी सै
इब बी ले समझ तो जा बण बात या लम्बी जिंदगानी सै
पंडित जी की बात कुलभूषण जन जन तक पहुँचानी सै
लडैगा वह जीतैगा यूं पंडित जी का पैगाम सुण्या होगा रै ।
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