शुक्रवार, 30 सितंबर 2016

KISAN KAMERA


आज चने का भाव 10000 रूपये प्रति क़्वींटल है परन्तु 

जब चना किसान के खेत से निकला था उस समय भाव था

4000 रूपये प्रति कवींटल और तीन महीने पहले जब मूंग 

की बीजाई की थी तब मूंग था 9000 रूपये प्रति क़्वींटल 

और जब किसानों के खेत से निकल रहा था तब था 

4000 रूपये प्रति कवींटल । यही तो है किसान का 


शोषण जिसे ना कांग्रेस ने दूर किया , ना मुलायम सिंह ने

 और ना अब मोदी जी की सरकार ने किया और किसान 

कमाई करके अच्छी फसल ऊगा कर भी मंडी में लुट रहा 

है और फांसी का फंदा गले में डाल रहा है दूसरी तरफ 

किसान का बेटा मजदूर का बेटा हमारी राजनीति के 

फलस्वरूप अपनी ज्यान कुर्बान कर रहा है ।  ये एक सिक्के 

के दो पहलू हैं । सोचना तो पड़ेगा ही ।  सरहद पर भी 

और सरहद के अंदर भी यह हो क्या रहा है ?

मंडी की लूट छिपाने को तो नहीं खेल खेला जा रहा फ़ौज 

के साथ ?












गुरुवार, 29 सितंबर 2016

भगवान ने।

Vicky Haldwaa with Mithilesh K Sinha and 27 others.


Vicky Haldwaa with Mithilesh K Sinha and 27 others.
पापा पापा धरती किसने बनाई?
बेटा भगवान ने बनाई।
आसमान किसने बनाया?
भगवान ने।
हमें किसने बनाया?
भगवान ने।
पेड़-पौधे कैसे उगते है?
भगवान की मर्जी से।
लोग कैसे मरते है?
भगवान की मर्जी से।
लोग पैदा कैसे होते है?
भगवान की मर्जी से।
रोशनी कैसे मिलती है?
भगवान की कृपा से।
अँधेरा कैसे हो जाता है?
भगवान की इच्छा से।
बेटा इतने सवाल मत पूछो , इस धरती पर, ब्रह्माण्ड में जो
भी कुछ होता है सब भगवान की मर्जी से
होता है।
एक दिन बच्चे के विज्ञान टीचर बच्चे के घर आते है। देखिये वर्मा
जी, आपका बच्चा पढने में बहोत कमजोर है , पढ़ाई-लिखाई में ध्यान
ही नहीं देता है।
टेस्ट में सवाल पूछा गया , बल्ब रौशनी कैसे देता है? जवाब में लिखा,
भगवान की मर्जी से।
टेलीफोन किसने बनाया?
भगवान ने बनाया।
धरती पर दिन और रात कैसे होते है?
भगवान की मर्जी से।
माफ़ कीजिये बताते हुए अच्छा तो नहीं लग रहा लेकिन
आपका लड़का फेल हो गया है।
वर्मा जी ने गुस्से से कांपते हुए लड़के को बुलाया , डपटते हुए, क्यों
बे? हमारे लाड-प्यार का नाजायज फायदा उठाता है, पढ़ाई-लिखाई में दिमाग क्यों
नहीं लगाता है? और दो तमाचे रसीद करते हुए बोले,
कमबख्त फेल हो जाएगा तो जिन्दगी में क्या करेगा?
और बेचारा बच्चा समझ ही नहीं पाया कि उससे
गलती कहाँ हुई?
काश! वर्मा जी ये समझ पाते कि बच्चे की जिज्ञासा को
अगर वो भगवान से तुष्ट न करते, तो बच्चा उन सवालों के जवाब विज्ञान में ढूंढता।
उस बच्चे की सारी कल्पनाएं , जिज्ञासाएं ,
खोजी प्रवृत्ति तो एक भगवान पर आकर ही खत्म हो
गयीं, भला इसमें उस बच्चे की क्या गलती
है जो उसे विज्ञान की समझ न आई ?

सोमनाथ मंदिर

महमूद ग़ज़नवी और सोमनाथ मंदिर के बारे में चौंका देने वाला खुलासा। ज़रूर पढ़ें IN साहित्य / ON AUGUST 2, 2016 AT 4:24 PM / धैर्ये से पढिये। # गुजरात का सोमनाथ आज फिर दलितों के अत्याचार पर अपने हक़ीक़ी मोहसिन को पुकार रहा है। ………. महमूद गजनवी का ज़हूर एक ऐसे समुद्री तूफ़ान की तरह था जो अपनी राह में मौजूद हर मौज को अपनी आगोश में ले लेती है, वह ऐसा फातेह था जिसकी तलवार की आवाज़ कभी तुर्किस्तान से आती तो कभी हिंदुस्तान से आती, उसके कभी न् थकने वाले घोड़े कभी सिंध का पानी पी रहे होते तो कुछ ही लम्हो बाद गांगा की मौजों से अटखेलियां करते । वह उन मुसाफिरों में से था जिसने अपनी मंजिल तै नही की थी, और हर मंजिल से आगे गुजर जाता रहा….. उसे फ़तेह का नशा था, जीतना उसकी आदत थी, वैसे तो वह इसी आदत की वजह से अपने परचम को खानाबदोश की तरह लिए फिरता रहा और जीतता गया, पर अल्लाह रब्बुल इज्जत ने उसे एक अज़ीम काम के लिए चुना था .. और अल्लाह अपना काम ले कर रहता है।। ……………. भारत का पुराना इतिहास खगालने पर यहाँ का सामाजिक ताना बाना पता लगता है, वेस्ट एशिया से एक फ़तेह कौम का भारत पर वर्चस्व हुआ, तो उन्होंने अपनी रिहायश के लिए, हरे भरे मैदान चुने और हारे हुए मूल निवासियों को जंगल दर्रों और खुश्क बंजर ज़मीनों पर बसने के लिए विवश किया गया, चूँकि मूल भारतियों की तुलना में आर्य कम थे इसलिए उन्होंने सोशल इंजीनियरींग का ज़बरदस्त कमाल् दिखाते हुए, मूल भारतियों को काम के हिसाब से वर्गों में और जातियों में बाँट दिया, और इस व्यवस्था को धर्म बता कर हमेशा के लिए इंसानो को गुलामी की न् दिखने वाली जंजीरों में जकड़ लिया । ब्राह्मणों ( आर्य) के देवता की नज़र में मूल भारतीय एक शूद्र, अछूत, और पिछले जन्म का पाप भोगने वाले लोगों का समूह बन गया, ब्राह्मणों के धर्म रूपी व्यवस्था की हिफाज़त के लिए एक समूह को क्षत्रिय कहा गया, वह क्षत्रिय, ब्राह्मणों के आदेश को देवता का हुक्म मानते और इस तरह सदियों-सदियों से लेकर आज तक वह ब्राह्मणवादी व्यवस्था से शूद्र बाहर नही निकल सके ………. महमूद गजनवी को राजा नन्दपाल की मौत की खबर मिल चुकी, अब ग़ज़नवी की फौज नन्दना के किले को फ़तेह करने के लिए बेताब थी, इधर तिर्लोचन पाल को राज़ा घोसित करके गद्दी सौंप दी गयी, त्रिलोचन पाल को जब ग़ज़नवी की फौजों की पेश कदमी की खबर मिली तो उसने किले की हिफाज़त अपने बेटे भीम पाल को सौंप दी, भीम पाल की फ़ौज गज़नबी के आगे एक दिन भी न ठहर सकी, उधर कश्मीर में तिरलोचन ने झेलम के शुमाल में एक फ़ौज को मुनज्जम किया जो एक सिकश्त खोरदा लश्कर साबित हुई।। रणवीर एक राजपूत सरदार का बेटा था जो भीम सिंह से साथ नन्दना के किले पर अपनी टुकड़ी की क़यादत कर रहा था, रणवीर बहुत बहादुरी से लड़ा और यहाँ तक कि उसके जौहर देख कर गज़नबी मुतास्सिर हुए बिना न् रह सका, वह तब तक अकेला ग़ज़नवी के लश्कर को रोके रहा जब तक उसके पैरों में खड़े रहने की ताकत थी, उसके बाद ज़मीन पर गिर कर बेहोश हो गया, आँखे खोली तो गज़नबी के तबीब उसकी मरहम पट्टी कर रहे थे, रणवीर ने गज़नबी के मुताल्लिक बड़ा डरावनी और वहशत की कहानियां सुनी थीं, लेकिन यह जो हुस्ने सुलूक उसके साथ हो रहा था, उसने कभी किसी हिन्दू राज़ा को युद्ध बंदियों के साथ करते नही देखा । उसे लगा कि शायद धर्म परिवर्तन करने के लिए बोला जायेगा, तब तक अच्छा सुलूक होगा, मना करने पर यह मुस्लिम फ़ौज उसे अज़ीयत देगी, उसने इस आदशे का इज़हार महमूद से कर ही दिया, कि अगर तुम क़त्ल करना चाहते हो तो शौक से करो पर मै धर्म नही बदलूंगा, उसके जवाब में ग़ज़नवी के होंठों पर बस एक शांत मुस्कराहट थी, गज़नबी चला गया, रणवीर के जखम तेज़ी से भर रहे थे, वह नन्दना के किले का कैदी था पर न् उसे बेड़ियां पहनाई गयी और न् ही किसी कोठरी में बंद किया गया। कुछ वक़्त गुजरने के साथ ही कैदियों की एक टुकड़ी को रिहा किया गया जिसमें रणबीर भी था, रिहाई की शर्त बस एक हदफ़ था कि वह अब कभी गज़नबी के मद्दे मुकाबिल नही आएंगे, यह तिर्लोचन पाल के सैनिकों के लिए चमत्कार या हैरान कुन बात थी, उन्हें यक़ीन करना मुश्किल था, खैर रणवीर जब अपने घर पहुंचा तो उसे उम्मीद थी कि उसकी इकलौती बहन सरला देवी उसका इस्तकबाल करेगी और भाई की आमद पर फुले नही समाएगी, पर घर पर दस्तक देने बाद भी जब दरवाज़ा नही खुला तो उसे अहसास हुआ कि दरवाज़ा बाहर से बंद है , उसे लगा बहन यहीं पड़ोस में होगी, वह पड़ोस के चाचा के घर गया तो उसने जो सुना उसे सुन कर वह वहशीपन की हद तक गमो गुस्से से भर गया, उसकी बहन को मंदिर के महाजन के साथ कुछ फ़ौजी उठा कर ले गए, चाचा बड़े फ़ख्र से बता रहा था कि, रणवीर खुश किस्मत हो जो तुम्हारी बहन को महादेव की सेवा करने का मौका मिला है, लेकिन यह लफ्ज़ रणवीर को मुतास्सिर न् कर सके, रणबीर चिल्लाया कि किसके आदेश से उठाया, चाचा बोले, पुरोहित बता रहा था कि सोमनाथ से आदेश आया है कि हर गाँव से तीन लड़कियां देव दासी के तौर पर सेवा करने जाएंगी, हमारे गाँव से भी सरला के साथ दो और लड़कियां ले जाई गयी हैं। रणवीर खुद को असहाय महसूस कर रहा था, कहीं से उम्मीद नज़र नही आ रही थी, ज़हनी कैफियत यह थी कि गमो गुस्से से पागल हो गया था, वह सोच रहा कि वह एक ऐसे राज़ा और उसका राज़ बचाने के लिए जान हथेली पर लिए फिर रहा था, और जब वह जंग में था तो उसी राज़ा के सिपाही उसकी बहन को प्रोहित के आदेश पर उठा ले गए, उसने सोचा कि राज़ा से फ़रयाद करेगा, अपनी वफादारी का हवाला देगा, नही तो एहतिजाज करेगा,,,चाचा से उसने अपने जज़्बात का इजहार किया, चाचा ने उसे समझाया कि अगर ऐसा किया तो धर्म विरोधी समझे जाओगे और इसका अंजाम मौत है। उसे एक ही सूरत नज़र आ रही थी कि वह अपने दुश्मन ग़ज़नवी से अपनी बहन की इज़्ज़त की गुहार लगायेगा। लेकिन फिर सोचने लगता कि ग़ज़नवी क्यू उसके लिए जंग करेगा, उसे उसकी बहन की इज़्ज़त से क्या उज्र, वह एक विदेशी है और उसका धर्म भी अलग है,, लेकिन रणवीर की अंतरात्मा से आवाज़ आती कि उसने तुझे अमान दी थी, वह आबरू की हिफाज़त करेगा और बहन के लिए न् सही पर एक औरत की अस्मिता पर सब कुछ दाव पर लगा देगा, क्यू कि वह एक मुसलमान है।। रणवीर घोड़े पर सवार हो उल्टा सरपट दौड़ गया………..इधर सोमनाथ में सालाना इज़लास चल रहा था, इस सालाना इज़लास में सारे राज़ा और अधिकारी गुजरात के सोमनाथ में जमा होते, जो लड़कियां देवदासी के तौर पर लायी जातीं उनकी पहले से ट्रेनिंग दी जाती, जो लड़की पहले नम्बर पर आती उस पर सोमनाथ के बड़े भगवान का हक़ माना जाता, बाकी लड़कियां छोटे बड़े साधुओं की खिदमत करने को रहतीं और अपनी बारी का इंतज़ार करतीं, उन सभी लड़कियों को कहा जाता कि साज़ श्रृंगार और नाज़ो अदा सीखें, जिससे भगवान को रिझा सकें। एक दिन ऐसा आता कि जीतने वाली लड़की को कहा जाता कि आज उसे भगवान् ने भोग विलास के लिए बुलाया है, उसके बाद वह लड़की कभी नज़र नही आती, ऐसा माना जाता कि महादेव उस लड़की को अपने साथ ले गए और अब वह उनकी पटरानी बन चुकी है। यह बातें रणवीर को पता थीं, उसकी सोच-सोच कर जिस्मानी ताक़त भी सल हो गयी थी, ताहम उसका घोडा अपनी रफ़्तार से दौड़ रहा था, ग़ज़नवी से मिल कर उसने अपनी रूदाद बताई, एक गैरत मन्द कौम के बेटे को किसी औरत की आबरू से बड़ी और क्या चीज़ हो सकती थी, वह हिंदुत्व या सनातन को नही जानता था, उसे पता भी नही था कि यह कोई धर्म भी है, और जब परिचय ही नही था तो द्वेष का तो सवाल ही नही था, हाँ उसके लिए बात सिर्फ इतनी थी कि एक बहादुर सिपाही की मज़लूम तनहा बहन को कुछ लोग उठा ले गए हैं और अब उसका भाई उससे मदद की गुहार लगा रहा है, वह गैरत मन्द सालार अपने दिल ही दिल में अहद कर लिया कि वह एक भाई की बहन को आज़ाद कराने के लिए अपने आखरी सिपाही तक जंग करेगा ,। ग़ज़नवी जिसके घोड़ो को हर वक़्त जीन पहने रहने की आदत हो चुकी थी, और हर वक़्त दौड़ लगाने के लिए आतुर रहते, वह जानते थे कि सालार की बेशतर जिंदगी आलीशान खेमो और महलों में नही बल्कि घोड़े की पीठ पर गुजरी है, गज़नबी ने फ़ौज को सोमनाथ की तरह कूच का हुक्म दिया । यह अफवाह थी कि सोमनाथ की तरफ देखने वाला जल कर भस्म हो जाता है और गज़नबी की मौत अब निश्चित है, वह मंदिर क्या शहर में घुसने से पहले ही दिव्य शक्ति से तबाह हो जायेगा, अफवाह ही पाखंड का आधार होती है, गज़नबी अब मंदिर परिसर में खड़ा था, बड़े छोटे सब प्रोहित बंधे पड़े थे, राजाओं और उनकी फ़ौज की लाशें पुरे शहर में फैली पड़ीं थीं, और सोमनाथ का बुत टूट कर कुछ पत्थर नुमा टुकड़ों में तब्दील हो गया था,, दरअसल सबसे बड़ी मौत तो पाखंड रूपी डर की हुई थी, कमरों की तलाशी ली जा रही थी जिनमे हज़ारो जवान और नौ उम्र लडकिया बुरी हालत में बंदी पायी गईं, वह लड़कियां जो भगवान के पास चली जाती और कभी नही आती, पूछने पर पता चला कि जब बड़े प्रोहित के शोषण से गर्भवती हो जातीं तो यह ढोंग करके कत्ल कर दी जाती, इस बात को कभी नही खोलतीं क्यू कि धर्म का आडंबर इतना बड़ा था कि यह इलज़ाम लगाने पर हर कोई उन लड़कियों को ही पापी समझता । महमूद ने जब अपनी आँखों से यह देखा तो हैरान परेशान, और बे यकीनी हालात देख कर तमतमा उठा, रणवीर जो कि अपनी बहन को पा कर बेहद खुश था, उससे गज़नबी ने पुछा कि क्या देवदासियां सिर्फ यहीं हैं, रणवीर ने बताया कि ऐसा हर प्रांत में एक मंदिर है। उसके बाद गज़नबी जितना दौड़ सकता था दौड़ा , और जुल्म, उनके बुत कदों को ढहाता चला गया, पुरे भारत में न् कोई उसकी रफ़्तार का सानी था और न न्कोई उसके हमले की ताब ला सकता था, सोमनाथ को तोड़ कर अब वह यहाँ के लोगों की नज़र में खुद एक आडंबर बन चूका था, दबे कुचले मज़लूम लोग उसे अवतार मान रहे थे, गज़नबी ने जब यह देखा तो तौहीद की दावत दी, वह जहाँ गया वहां प्रताड़ित समाज स्वेच्छा से मुसलमान हो उसके साथ होता गया, उसकी फ़ौज में आधे के लगभग हिन्दू धर्म के लोग थे जो उसका समर्थन कर रहे थे ।उसकी तलवार ने आडंबर, ज़ुल्म और पाखंड को फ़तेह किया तो उसके किरदार ने दिलों को फ़तेह किया ।वह् अपने जीते हुए इलाके का इक़तिदार मज़लूम कौम के प्रतिनिधि को देता गया और खुद कहीं नही ठहरा । वह जो …….. महमूद गज़नबी था। नोट : उक्त लेख इतिहास की सत्य घटनाओ पर आधारित है, किसी की धार्मिक अथवा किसी भी प्रकार की भावनाओं को ठेस पहुँचाना कदापि मकसद नहीं है, लेख के माध्यम से सच्चाई को उजागर करने का प्रयास है।

धर्मअन्धो के भ्रमित प्रश्नो के उत्तर...

(Forwarded post)
धर्मअन्धो के भ्रमित प्रश्नो के उत्तर...
नीचे कुछ प्रश्न और उनके उत्तर दिए गये हैं, इन प्रश्नों की सहायता से अधिकांश 'वैदिक हिन्दुत्ववादी' सोशल-मिडिया-'व्हाट्सअप', 'फेसबुक, आदि पर प्रश्न पेस्ट करके लोगों को भ्रमित कर रहे हैं।| हालाँकि इन प्रश्नों का कोई औचित्य भी नही है, क्योंकि जिसने भी ये प्रश्न तैयार किये हैं वह व्यक्ति या तो 'अल्पज्ञानी', 'बौद्धिक- वैज्ञानिक सोच' से कोसों दूर, या फिर-धर्मान्ध' हो सकता है जिनके लिए ये साधारण सवाल भी किसी अजूबे से कम नही है। इनके द्वारा पूछे जाने वाले कुछ प्रश्न ब्राहमणों के विदेशी होने की सत्यता को और भी अधिक प्रगाढ़ कर रहे हैं :-
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👉🏽*प्रश्न :- (1) क्यो "नासा-के-वैज्ञानीको" ने माना की 'सूरज' से " ॐ" (") "की आवाज निकलती है ?
👎🏼उत्तर :-- वैसे नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार अन्तरिक्ष में
उपग्रह में लगी अत्याधुनिक-ध्वनि रिकॉर्डिंग मशीन ने कोई हल्की सी ध्वनि कैद की जो 'स्वर' ("अssssssssssss....') के रूप में प्रतीत होती है, न की 'ओउम् (ॐ)
की ध्वनि | 'न ही 'नासा के वैज्ञानिकों' ने इसकी पुष्टि नहीं की है की 'सूरज' से "ॐ" '' की आवाज निकलती है ? किसी वस्तु के गिरने, टूटने, टकराने, वायु के प्रवाह आदि से निकली लम्बी आवाज से भी 'स्वरों' के रूप में ध्वनी पैदा हो सकती है | कभी-कभी सुनसान जगह पर भी हमें एक विशेष प्रकार की 'लयबद्ध'ध्वनि सुनायी देती है, प्रायः वहां भी ध्वनि का 'उच्चारण' "स्वर" के रूप में होता है न की "व्यंजन" | प्रायः वह ध्वनी हमारे लिए कानों द्वारा सुनने पर, हमारी सोच और मानसिकताओं पर निर्भर करती हैं | वैसे 'सूर्य' आग का गोला है | हम भी जब 'आग' जलाते हैं तब आग की 'लपटों' से ध्वनि भी सुनायी देती है | यह ध्वनी भी हमारे कानों द्वार सुनने और हमारी मानसिकता और साथ में 'वायु' के प्रवाहानुसार अलग-अलग आभाषित हो सकती है | उदाहरण :- जैसे किसी 'कुत्ते' के भोंकने पर यदि किसी बालक से पूछे की कुत्ता कैसे भोंक रहा था ? तब वह कह सकता है की 'कुत्ता' "भों-भों..." की आवाज निकाल रहा है | वही किसी अन्य बालक से पूछने पर "वऊ-वऊ", "भू-भू", "हु-हु" जैसे शब्द सुनने को मिल सकते है जिन्होंने कुत्ते की ध्वनि का विश्लेषण किया हो ! ठीक इसी प्रकार वस्तुओं के गिरने, टूटने, टकराने से निकली आवाज को भी हम विभिन्न 'स्वरों' और 'व्यंजनों' के रूप में जोड़कर आभाषित कर सकते हैं |
👉🏽*प्रश्न :- (2) क्यों 'अमेरिका' ने "भारतीय - देशी गौमुत्र" पर 4 Patent लिया व कैंसर और दूसरी बिमारियो के लिये दवाईया बना रहा है ? जबकी हम गौमुत्र का महत्व हजारो साल पहले से जानते है ?
👎🏼उत्तर :- 😃😃हास्यप्रद प्रश्न .........!!!
'राजस्थान' (विशेषतः पश्चिम-राजस्थान) में पुराने समय सेही औरतें नहाते समय अपने बाल एक विशेष प्रकार की मिट्टी जिसे 'मुल्तानी-मिट्टी' भी कहा जाता है, से अक्सर धोती हैं और यह मिट्टी अत्यंत चिकनी व कीटाणु- रहित होने के कारण बालों के लिए प्रायः साबुन से भी बेहतर परिणाम देती हैं, बाल अत्यंत ही मुलायम और चिकने हो जाते हैं साथ में कीटाणुओं और विषाणुओं रहित तो है ही ! यह मिट्टी किराणा की दुकानों पर भी मिलती है| अब इस मिट्टी से कोई व्यक्ति किसी 'नई खोज' या 'अर्वाचीन' दवा का अविष्कार करें तो अन्य व्यक्ति उस पर ऐतराज नहीं कर सकता है ! जिस प्रकार 'मिट्टी' प्राकृतिक संसाधन है, ठीक उसी प्रकार 'गाय' या उसके 'मल-मूत्र' पर सिर्फ 'ब्राह्मणवादियों' का ही अधिकार नहीं है ! चूँकि अमेरिका ने 'गौमूत्र' से बनी 'दवा' पर पेटेंट
करवाया होगा, न की "गौमूत्र" पर ! अतः अगर कोई इसी गौमूत्र से कोई ऐसी दवा जो अमेरिकी दवा से भिन्न हैं, का अविष्कार करे तो वह भी अपना पेटेंट करवा सकता है |
😜वैसे तो 'गौ-मलमूत्र' पर सदियों से सिर्फ 'ब्राह्मणवादियों' का ही पेटेंट रहा हैं ! हाँ....! फिर भी 'ब्राह्मणवादियों' पर किसी 'अछूत' की छाया पड़े तो अभी भी समय है की वे "गौमूत्र" या "गौमल" से नहाने का 'अधिकार' या पेटेंट" जल्द ही करवा लें ! तब तो 'अमेरिका' को या किन्हीं अन्य 'गैर- हिन्दुत्ववादियों' द्वारा कोई आपत्ति भी नही होगी !
👉🏽प्रश्न :- (3) क्यो अमेरिका के 'सेटन-हाल-यूनिवर्सिटी' मे "गीता" पढाई जा रही है ?
👎🏼उत्तर :-चूँकि वहां पर 'गीता' का अध्यापन विद्यार्थियों में 'तृतीय-भाषा' का ज्ञान करवाने के उद्देश्यों से करवाया जाता हैं, न की शिक्षार्थियों को 'कृष्ण' के 'उपदेशों' और 'गीता-सार' सीखाने के लिए पढाई जाती है ! अमेरिका एक जागरूक देश है, वहां पर लगभग विश्व के सभी देशों की संस्कृति, धर्म और संस्कारों का अध्ययन-अध्यापन विद्यार्थियों में "ज्ञान और कौशल" के लिए भिन्न-भिन्न शैक्षणिक-संस्थाओं द्वारा करवाया जाता हैं, न की वैदिक ज्ञान अपनाने के उद्देश्य से !'भारत' में भी कईं 'शैक्षणिक संस्थान' हैं जो 'कुरान','बाइबिल' आदि ग्रंथों के अध्यापन करवाते हैं जिनका प्रयोजन 'निश्चित' या 'बहु-उद्देश्यय भी हो सकता हैं |
👉🏽प्रश्न :- (4) क्यो इस्लामिक देश 'इंडोनेशिया'. के Aeroplane का नाम "भगवान नारायण के वाहन 'गरुड" के नाम पर "Garuda Indonesia" है, जिसमे garuda का symbol भी है ?
उत्तर :-संस्कृत भाषा का प्रादुर्भाव भारत में नहीं अपितु 'यूरेशियन' देशों में हुआ था | अतः "गरूडा" शब्द भी संस्कृत भाषा का शब्द है,
जो विदेशी है, न की स्वदेशी ! भारत में लगभग ४ हजार साल पूर्व विदेशी आर्यों (गरूडो) के
आक्रमण के पश्चात् संस्कृत-भाषा का प्रयोग होने लगा | यहीं वजह है की 'हिन्दू धर्म' (ब्राहमणी) के अधिकांश ग्रन्थ 'संस्कृत' भाषा में ही लिखे गये, क्योंकि इस भाषा पर
इन विदेशियों का ही एकाधिकार रहा और इन काल्पनिक ग्रंथों में वहीँ बातें लिखी गयी जिसे इन्होंने लिखना चाहा जो सच्चाई के धरातल से लाखों-कोसों दूर हैं
👉🏽प्रश्न :- (5) क्यो इंडोनेशिया के रुपए पर "भगवान गणेश"की फोटो है ?
उत्तर :- जैसा की इनका उत्तर भी उपरोक्त चौथे प्रश्न के रूप में निहित हैं | भारत में विदेशी ब्राहमणों के आगमन से पूर्व (आज से 2 हजार साल पूर्व) तक किसी भी ब्राहमणी भगवानों का अविष्कार नहीं हुआ था | हिन्दुओं के अधिकांश देवी देवताओं यथा त्रिदेव (ब्रह्मा, विषाणु, महेश) के साथ लक्ष्मी,पार्वती, दुर्गा काली,सरस्वती आदि के स्वरुपों की परिकल्पनायें विदेशी'आर्यों' ने 'सुमेर-ग्रीक (सुमेरियन / मेसोपोटामिया आदि सभ्यताओं) की नकल स्वरुप पैदा हुई |आज भी प्राचीन सुमेरियन / मेसोपोटामियन संस्कृति में
गणेश,शिव, विष्णु(गरुडा),दुर्गा-काली आदि की छवियाँ देखी जा सकती है | इस तरह से आर्यों के विदेशी होना प्रमाणित होता है।
👉🏽प्रश्न :- (6) क्यो 'बराक-ओबामा' हमेशा अपनी जेब मे"हनुमान-जी" की फोटो रखते है ?
उत्तर :- बराक ओबामा 'हनुमानजी' की फोटो जेब में रखे या किसी और की ! पर यह सच हैं की वे किसी काल्पनिक 'भगवानों या रचनाओं' की अपेक्षा 'विज्ञान' और 'वैज्ञानिक-सोच' में विश्वास रखते है | वैसे मेरे एक मित्र ने मुझे जेब में रखने लाइक स्टील युक्त कवर की डायरी गिफ्ट के रूप दी जिस 'बुद्ध, अम्बेडकर, कबीर, फुले, पेरियार, गाडगे जैसे महापुरुषों की छवियाँ हैं | चूँकि वह गिफ्ट दिखने में सुन्दर तो है ही; जिसे मैं विशेष नजरिये से जोड़कर देखता हूँ जो मेरे लिए प्रेरणादायक भी है तो 'मित्र' का 'प्रेम' भी उसमे नजर आता है, अतः मैं उसे
यथासंभव जेब में रखने की कोशिस करता हूँ, क्योंकि उसी के अन्दर छोटी से डायरी भी है !!!
👉🏽प्रश्न :- (7) क्यो आज पूरी दुनिया "योग-प्राणायाम" की दिवानी है ?
उत्तर :- 'योग-प्राणायाम' विदेशी 'आर्यों' के 'हिन्दू-धर्म' की खोज नहीं हैं, अपितु भारत में पुरातन-काल से (आर्यागमन से पूर्व) 'योगिक' और 'बौद्धिक' संस्कृति का प्रचलन ही अधिक था, न ही देवी-देवताओं और 'अनेकेश्वरवाद' के रूप में किन्ही 'पारलौकिक-शक्तियों' में आस्था या उनकी पूजा की जाती थी | इसे 'शारीरिक' और 'बौद्धिक-व्यायाम' भी कह सकते है | अतः "हिन्दू-धर्म" के 'ब्राहमणवादियों' को गर्व के साथ
कहने का हक नहीं है की - "क्यो आज पूरी दुनिया "योग-प्राणायाम" की दिवानी है ?" 'योग-प्राणायाम', 'ब्राहमण-धर्म' (हिन्दू-धर्म) की खोज नहीं है, साथ ही 'योग' और 'ब्राहमण-धर्म' एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत है |
👉🏽प्रश्न :- (8) क्यो "भारतीय-हिंदू-वैज्ञानिको" ने 'हजारो साल पहले ही ' बता दिया की धरती गोल है ?
उत्तर :- "हिन्दू-धर्म" के वेदों के अनुसार समस्त श्रृष्टि जलमग्न थी,अर्थात 'रसातल' में डूबी हुई ! तब भगवान''सुअर जी' (अर्थात वाराहावतार विषाणुजी) इसे बाहर निकालते है ! वेदों के अनुसार कई बार धरती के लिए 'देवों' और'असुरों' में छीनाझपटी भी होती है ! 'राक्षस' पृथ्वी को लेकर भाग जातें है, तो फिर उसे समुद्र में फेंक भी देतें है ! हिन्दू-धर्मानुसार 'पृथ्वी' तो अभी भी 'विषाणुजी के हाथों में हैं, जो स्वयं 'नाग' पर खड़े होकर इसे कसकर झेले हुए है !!!
👉🏽प्रश्न :- (9) क्यो जर्मनी के Aeroplane का संस्कृत-नाम "Luft-hansa" है ?
उत्तर :-इसका उत्तर भी प्रश्न संख्या ४ के उत्तर में ही निहित हैं, क्योंकि 'संस्कृत' भाषा ही विदेशी है |
👉🏽प्रश्न :- (10) क्यो 'हिंदुओ' के नाम पर 'अफगानिस्थान'के पर्वत का नाम "हिंदूकुश" है ?
उत्तर :-- चूँकि 'आर्य' विदेशी है और इनका प्राचीन 'ऋग्वेद' भी इन्ही विदेशियों के साथ भारत में मौखिक-उक्तियों के रूप में आया है | 'ऋग्वेद' में जिस "हिन्दुकुश"पर्वत का विवरण है वह वास्तव में 'अरब-देशों' में स्थित एक पर्वतमाला हैं | 'ऋग्वेद' के अधिकांश 'श्लोक' ईरान के फारस प्रान्त में जन्मे "फ़ारसी-धर्म" के ग्रन्थ 'जेंद-अवेस्ता' की ही हुबहू नकल है | फ़ारसी-धर्म-ग्रन्थ 'जेंद-अवेस्ता' में भी इस
"हिन्दुकुश" पर्वत का विवरण है, जो 'अफगानिस्थान' में ही स्थित है | अतः भारत के 'हिन्दू-धर्म' या किसी 'हिन्दुस्तानी-पर्वत' की नकल पर अफगानिस्तान में पर्वत का नाम 'हिन्दुकुश' नही रखा गया |
👉🏽प्रश्न :- (11) क्यो हिंदुओ के नाम पर 'हिंदी भाषा, 'हिन्दुस्तान', 'हिंद-महासागर' ये सभी नाम है ?
उत्तर :--हा...हा...हा...!😃 अत्यंत ही हास्यास्पद प्रश्न ....!!! 'हिन्दू' की भांति, 'सिन्धी-धर्म' के लोग अपनी भाषा को "सिन्धी" कहते हैं, पंजाब के "पंजाबी", राजस्थान के "राजस्थानी" ! अरब के लोग "अरबी", फारस के "फ़ारसी", 'एंग्लों' लोगों ने अपनी भाषा को "इंग्लिश"
नाम दिया तो 'महाराष्ट्र' के लोगों ने अपनी भाषा को "मराठी" कहा ! इसी प्रकार भारत का 'राजस्थान-राज्य', जो किसी समय "राजपुताना" के नाम से जाना जाता था, उस "राजपुताना"
के नाम पर "राजस्थान" नाम पड़ गया ! ऐसे एक नही, वरन अनेक उदाहरण है; जिनके 'धर्म', 'रिवाजों' या सम्बंधित विशेष के सूचकों पर उनकी 'भाषा' और 'स्थान' के नाम पड़ गये |
मगर 'हिन्द-महासागर' की पहचान विश्व-भर में "इंडियन-ओसियन"(Indian-ocean) के नाम से है | विश्व में सिर्फ भारत के लोग ही इसे "हिन्द-महासागर" के नाम से जानते है | केवल भारतीय मानचित्र में इसे 'हिन्द-महासागर'
लिखा जाता है, जबकि विदेशों में यह "इंडियन-ओसियन" (Indian-ocean) के रूप में जाना जाता है |
👉🏽प्रश्न :- (12) क्यो 'वियतनाम देश' मे "Visnu-भगवान"की 4000-साल पुरानी मूर्ति पाई गई ?
उत्तर :--इसका उत्तर भी प्रश्न संख्या ४ और ५ में निहित हैं, क्योंकि समस्त भारतीय-देवी-देवता विदेशी-संस्कृति(सुमेरियन-ग्रीक-मेसोपोटामियां) आदि की कथाओं, नाटकों और रूपकों के रूप में मिले-जुले अंश (नाटक-कर्ता) है अतः 'विष्णु' जिसे उस संस्कृति में 'गरुडा' कहा जाता रहा, का 'वियतनाम' जैसे यूरेशियन देशों में मूर्ति मिलना पक्का प्रमाण है कि आर्य-ब्राहमण विदेशी है !!!
👉🏽प्रश्न :- (13) क्यो अमेरिकी-वैज्ञानिक Haward ने, शोध के बाद माना की "गायत्री मंत्र मे " 110000 frequency " के कंपन है?
उत्तर :-- यह जरुरी नहीं है की ११०००० freq.'गायत्री-मंत्र' में ही हो ! ऐसे बहुत सारे निरर्थक शब्दों को जोड़कर ऐसा वाक्य बनाया जा सकता है, जिसकी फ्रीक्वेंसी 110000 हो सकती है ! वैसे "गायत्री-मंत्र" की '110000' freq. उच्चारणकर्ता पर भी निर्भर करती है ! सही उच्चारण के अभाव में फ्रीक्वेंसी कम या ज्यादा भी हो सकती है !
👉🏽प्रश्न :- (14) क्यो 'बागबत की बडी मस्जिद के इमाम' ने "सत्यार्थ-प्रकाश" पढने के बाद हिंदू-धर्म अपनाकर, "महेंद्रपाल आर्य" बनकर, हजारो मुस्लिमो को हिंदू ,और वो कई-बार 'जाकिर-नाईक' से Debate के लिये कह चुके है, मगर जाकिर की हिम्मत नही हुई ?
उत्तर :-- दुनिया में ऐसे लाखों-करोड़ों लोग हैं, जिन्होंने समय व परिस्थितियों के साथ में अपनी रूचि-अभिरुचि के अनुसार 'धर्म-परिवर्तन' किया है ! 'भारत' और 'पाकिस्तान' के मुस्लिमों में बहुत बड़ा वर्ग ऐसा हैं, जो किसी समय 'हिन्दू' था, जिनमें हिन्दुओंका शोषित वर्ग (शुद्र-वर्ग) सबसे अधिक रहा था ! विश्व के एकमात्र सर्वाधिक छुआछुत वाले 'हिन्दू-धर्म' से तंग आकर कईयों ने ईस्लाम, ईसाई या बौद्ध-धम्म' ग्रहणकर लिया | यहाँ तक की "सिक्खों" ने तो हिन्दू-धर्म की विकृतियों के कारण अपना अलग धर्म "सिक्ख" की स्थापना की !..और भी बहुत उदाहरण है ! अब रही बात 'जाकिर-नाईक' द्वारा "महेंद्रपाल आर्य" से'Debate' नहीं करने की; तो जिस प्रकार मुझे इन प्रश्नों के उत्तर लिखते हुए 'हिंदुत्व' पर हँसी व तरस तो आया ही , साथ में ऐसे 'बेहुदे' व तर्कहीन प्रश्नों के जवाब देने से मेरा व्यर्थ का दिमाग भी खर्च हुआ ! वैसे भी कोई व्यक्ति किसी धर्म या उसके ग्रंथों पर प्रश्न-चिन्ह तभी लगा सकता है जब उन्होंने वे ग्रन्थ पढ़े और उन परचिंतन किया हो !अतः 'जाकिर-नाईक' जी क्यों व्यर्थ में
अपना दिमाग "महेंद्रपाल आर्य" से खपाना चाहेंगे ?
👉🏽प्रश्न :- (15) अगर हिंदू-धर्म मे "यज्ञ" करना अंधविश्वास है, तो, क्यो 'भोपाल-गैस-कांड' मे, जो "कुशवाह-परिवार" एकमात्र बचा, जो उस समय यज्ञ कर रहा था ?
उत्तर :-ऐसे संयोग बहुत होते हैं, इन्हें चमत्कार की श्रेणी मेंनहीं रख सकतें | क्योंकि कईं बार धार्मिक लोग मारे जाते हैं और अधार्मिक या नास्तिक बच जाते हैं ! केदारनाथ हादसे में भी इसके हजारों उदाहरण सामने आयें जबकि तीर्थयात्री मारे गये और कई जो चोरी की नियति से केदारनाथ गये वे बच गये ! वैसे
अगले प्रश्न में भी इसका उत्तर मिल जायेगा !
👉🏽प्रश्न :- (16) 'गोबर-पर-घी जलाने से "१०-लाख-टन आक्सीजन गैस" बनती है ?
उत्तर :- प्रश्नकर्ता से मेरा निवेदन है की अपने घर के किसी 'कमरे' की समस्त 'खिड़कियाँ' व 'दरवाजे' बंद कर रात भर 'गोबर' पर 'घी' जलाएं !!! ध्यान रहे की कमरे में बनने वाली ऑक्सीजन नाम-मात्र भी बाहर नहीं जा पायें और सुबह तक आपका क्या हाल होता है अवश्य बताएं !!!
👉🏽प्रश्न :- (17) क्यो "Julia Roberts" (American actress and producer) ने 'हिंदू-धर्म' अपनाया और वो हर रोज "मंदिर" जाती है ?
उत्तर :- भारत में ऐसे बहुत सारे महापुरुष हुए जिन्होंने 'हिन्दू-धर्म' त्यागकर अन्य धर्म या धम्म अपना लिए | भारत के 'संविधान' निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर इसके उदाहरण है | प्रश्न संख्या 14 में इसका विस्तृत जवाब है | वैसे मैंने सुना है की विश्व के सबसे प्रतिष्ठित व्यक्ति ('अमेरिका' के राष्ट्रपति) "बराक-ओबामा" ने भी 'बोद्ध-धम्म' ग्रहण कर लिया !!!
👉🏽प्रश्न :- (18) अगर "रामायण" झूठा है, तो क्यो दुनियाभर मे केवल "राम-सेतू" के ही पत्थर आज भी तैरते है ?
उत्तर :-वैसे 'रामायण' का 'झूठी' और'काल्पनिक' ठहराने के लिए एक नहीं अपितु अनेक तथ्य और प्रमाण मौजूद है ! रही बात 'रामसेतु' के पत्थरों के तैरने की-
*प्रथम - रामसेतु कभी बनाया ही नही गया ! 'रामजन्म' और 'सेतु' की कल्पना का समय अभी तक जो बताया जाता रहा है उस समय 'श्रीलंका' भारत का ही अंग था अर्थात दोनों 'उपमहाद्वीप' एक-दुसरे से जुड़े हुए थे !साथ ही उस देश का नाम भी 'श्रीलंका' नही था !
*द्वितीय- भारत और 'श्रीलंका' के बीच में "कोरल्स"की चट्टानें है उन्हें पत्थर नहीं कहा जा सकता है | इन 'कोरल्स' की संरचना 'मधुमक्खियों' के छत्ते के समान होती है, जिनमे बारीक़ रिक्त स्थान होते है | अतः किसी भी हल्की वस्तु का आयतन, पानी के घनत्व के
कम होने पर वह तैरने लगती है; यह विज्ञान का सिद्धान्त है। इसमें आश्चर्य या 'राम' की शक्ति का कोई प्रभाव नहीं है !!!
👉🏽प्रश्न :- (19) अगर "महाभारत" झूठा है, तो क्यो भीम के पुत्र,''घटोत्कच'' का विशालकाय कंकाल, वर्ष 2007 में 'नेशनल-जिओग्राफी' की टीम ने, 'भारतीय-सेना की सहायता से' उत्तर-भारत के इलाके में खोजा ?
उत्तर :-- वह खबर गलत और चित्र बनावटी साबित हुई |
👉🏽प्रश्न :- (20) क्यो अमेरिका के सैनिकों को, अफगानिस्तान(कंधार) की एक गुफा में, 5000 साल पहले का महाभारत- के समय-का "विमान" मिला है ?
उत्तर :- वह विमान नहीं अपितु प्राचीन 'वास्तुकला' का नमूना है | जिसको अंधभक्त लोग विमान समझे बैठे हैं।
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Vishpendra Singh Phir aapke hisab se Hindustan m h Kya, Sanskrit vedesi language, devi devta vo bhi videsi, Chlo maan lete h to videsh m Sanskrit main language kyo ni h, vha pr Hindu dharm main kyo ni h
Rajendra Singh धर्म क्या है? धर्म के नाम पर निर्दोष लोग अपना समय 🕒 बर्बाद करते हैं कुछ लोग अपना ऊल्लू सीधा करते हैं
कैलाश चौहान मझिंगई लगता हैं कि अम्वेडकर डरता था वामनो से तभी तो उस व्यक्ति ने लिखा हैं कि आर्य कोई वाहर के नही हैं अव नये अम्वेडकर वादी अम्वेडकर को चुनौती दे रहे हैं कि दुनिया का सवसे पढ़ लिखा व्यक्ति ने जो खोज करके लिखा वह झुठ था अगर अम्वेडकर की माने तो अार्य वाहर से नही आये थे तो तुम्हारे सारे तर्को का लंका दहन हो जाता हैं अगर आर्यो विदेशी हैं तो अम्वेडकर ने डिग्री कही कुडेदान से उठाई होगी

पितर

यह सोचना तो और भी ज्यादा हास्यास्पद है कि ब्राह्मण के पेट में डाला गया भोजन पितरों तक पहुंच जाएगा या उन की भूख शांत हो जाएगी. सभी जानते हैं कि पितरों के शरीर जला दिए जाते हैं और हिंदू धर्म की तथाकथित मान्यताओं के अनुसार आत्मा भूखप्यास आदि बंधनों से मुक्त है, फिर इस लोक में ब्राह्मणों को खिलाया गया भोजन पितरों की आत्मा तक, जो न मालूम किस लोक, किस योनि और किस स्थिति में है, कैसे पहुंच जाएगा?

धर्म ग्रंथों में अंधविश्वास

धर्म ग्रंथों में अंधविश्वास;
तोता पालना-सभी समस्याओं का समाधान !अंधभक्त अवश्य आजमायें !
पद्मपुराण में वर्णन आया है कि जिस घर में तोता पाला जाता है और उसका नाम भगवान के नाम पर रखा जाता है तो उस घर में राहु, केतु, शनि एवं मंगल की वक्रदृष्टि नहीं पड़ती तथा उस घर में यमराज का प्रवेश भी अत्यावश्यक होने पर ही होता है अर्थात उस घर में ‘अकाल मृत्यु’ की संभावना नहीं होती। तोता पालने से सुख-समृद्धि एवं सौभाग्य की वृद्धि होती है।
‘‘शुकोपालयेत् यत्नम्, ईश्वरोनाम प्राधृत:
तस्यागृहे न प्रविशन्ति, राहू-केतुश्चमृत्यव:।।’’

Hirday Nath

स्वतंत्रता के ७० वर्ष के पश्चात् भी !


अंधविश्वास समाज के लिए बहुत बड़ा नासूर है। हालांकि समय-समय पर ऐसी कई घटनाएं सामने आती रहती हैं जिनमें जादू-टोना करने वालों के चक्कर में पड़ कर लोगों को अपनी समस्याओं से मुक्ति के स्थान पर संकट में ही फंसना पड़ा परंतु स्वतंत्रता के ७० साल बाद भी लोग अंधविश्वास और जादू-टोने के मोहजाल से नहीं निकल पाए। 
आम लोगों की तो बात ही क्या, बड़े-बड़े राजनीतिज्ञ और स्वयं को ‘बुद्धिजीवी’ कहने वाले लोग भी इस जाल में फंसे हुए हैं।

देवी - देवताओं

चीन में माओ नामक शासक ने करोडो लोगों की हत्या की थी| कोई देवी/देवता उन निरपराध लोगों को बचाने नहीं आए|
जर्मनी में हिट़लर नामक शासक ने लाखों लोगों की हत्या की थी| कोई देवी/देवता उन निरपराध लोगों को बचाने नहीं आए|
कई वर्षों से चीन तिब्बत के लोगों के खिलाफ अपनी ताकत और संसाधन लगाकर उनकी हत्या और शोषण कर रहा है| कोई देवी/देवता उन निरपराध लोगों को बचाने नहीं आए|
अफ्रीका और अमेरीका के कई देशों में काले रंग के लोगों को उनकी त्वचा के रंग की वजह से पीढी दर पीढी सभी प्रकार का शोषण सहना पडा| कोई देवी/देवता उन निरपराध लोगों को बचाने नहीं आए|
भारत देश में भी, हजारों वर्षों से मानव निर्मित नीची जाति के लोगों को हत्या, बलात्कार, छूआछूत, अंधश्रद्धा, प्राकृतिक संसाधन जैसे खाना और पीने के पानी से वंचित रखा गया, और शारीरीक और लैंगिक शोषण को सहना पडा| फिर भी, कोई देवी/देवता उन निरपराध लोगों को बचाने नहीं आए|
इतना ही नहीं, आज तक इस दुनिया में दो विश्वयुद्ध हो चुके है| जिसमें अमेरीका ने जापान के दो शहर हिरोशीमा और नागासाकी के उपर अणु बम से हमला कर के उन्हें संपूर्ण तरह से राख में तब्दील किया था| कोई देवी/देवता इन युद्धों को रोकने नहीं आए|
तो इन काल्पनिक मिसालों पर बनाए गये देवी - देवताओं का गुलाम कोई क्यों बने ???(मन की बात)

IS 'GOD' DEAF ?

Hirday Nath
IS 'GOD' DEAF ?
EITHER 'god' is deaf or we think loudspeakers will speed up our salvation. Are these speakers used in the hope that they will make 'god' take notice of us? All our places of worship seem to be competing with each other to make us hear verses from all the holy books. I often wonder why believers can't perform their respective religious rituals and worship peacefully without that hall-gulla and loud exhibitionism.Respective 'gods and goddess' are supposed to be omnipotent,omniscient and omnipresent and then what was the status of worship before the invention of modern day loudspeakers ?
कांकर पाथर जोरि के मस्जिद लई चुनाय;
ता चढि मुल्ला बांग दे बहिरा हुआ खुदाय.

[कबीर].

शनिवार, 24 सितंबर 2016

Press Release

प्रैस विज्ञप्ति
हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति , भारत ज्ञान विज्ञान समिति और हरियाणा विज्ञान मंच के संयुक्त तत्वाधान में राज्य स्तरीय दो द्विसीय कार्यशाला राष्ट्रीय जन विज्ञान नेटवर्क द्वारा प्रायोजित -राष्ट्रीय अभियान - सबका देश, हमारा देश के नारे के साथ -बहुविविधता,जनतन्त्र, विकास और सामाजिक न्याय - का आयोजन 23-24 सितम्बर ,2016 को रोहतक में सुखपुरा चोक स्थित सर्वकर्मचारी संघ के कार्यालय में किया गया जिसमें हिसार , रोहतक, पानीपत, जींद और करनाल के साथियों ने हिस्सेदारी की। 23.9.16 को उदघाटन सत्र में दिल्ली साइंस फोरम के अध्यक्ष और राष्ट्रीय जन विज्ञान नेट वर्क के पूर्व प्रधान डा़़. डी. रघुनन्दन ने इस राष्ट्रीय अभियान के परिप्रेक्ष्य पर अपनी बात रखते हुए कहा कि आज निजीकरण, उदारीकरण और वैश्वीकरण के विकास के रास्ते पर 1990 के दशक से अब तक चलते हुए , भारत के समाज के आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में नाबराबरी बढ़ी है और देश की विविधता पर भी धर्मान्धता के काले बादल मंडराने लगे हैं। इस विकास ने मुठी भर लोगों की सम्पतियों में असीम बढोतरी की है और बड़े तबकों की आथिक हालत नीचे की और गई है और साथ ही वैज्ञानिक दृष्टिकोण का प्रचार प्रसार करने की बजाय अंधविश्वासों मायथेलॉजी को इतिहास बताकर जनता को गुमराह करने का काम किया जा रहा है। राष्ट्रीय जन विज्ञान नेट वर्क एक साल के जन अभियान के दौरानसबका देश- हमारा देशके नारे को और विकास, जनतन्त्रण् ब्हुविविधता और सामाजिक न्याय के मुद्यों को पूरे देश में 7 नवम्बर 2016 को पूरे देश के राज्यों में इस अभियान का शुभारम्भ एक साथ करेगा।
     देसरे सत्र में नरेश प्रेरणा ने इस अभियान के तौर तरीकों पर विस्तार से चर्चा की और बताया कि एक प्रर्दशनी तैयार की जाएगी और अलग अलग विषयों पर 18 पुस्तिकाएं तैयार की जा रही हैं जिनके माध्यम से लोगों से जिलों और गावों में संवाद किया जाएगा। तीसरे सैशन में आज की शिक्षा की दशा और दिशा पर शीशपाल निदेशक स्टेट रिसोर्स सैंटर रोहतक और पगमोद गौरी सचिव भारत ज्ञान विज्ञान समिति ने अपने विचार रखे।
  24.9.2016 को सुबह के सैशन में डा. रणबीर सिंह दहिया प्रधान हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति ने स्वास्थ्य क्षेत्र में उदारीकरण के तहत सुधार जो लागू किये गये उनके क्या असर सामने आये हैं। मरीज और डाक्टर आमने सामने खड़े कर दिये गये इन नीतियों के कारण। बताया कि चार तरह से प्रभावित किया है।
1 सार्वजनिक स्वास्थ्य पर खर्चों की कमी करके
2 सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में लागत उगाही लागू करके
3 सवास्थ्य सेवा प्रणाली को अलग अलग खानों में बांछ दिया। गरीबों के लिएबेसिकस्वास्थ्य सेवा और अमीरों के लिए निजी स्वास्थ्य सेवा
4 निजी क्षेत्र के लिए विभिन्न कामों की आडट सोर्सिंग ार दी गई
5बीमा योजनाएं लागू करके कम्पनियों को फायदा किया
इस सबके चलते 2013 -2014 में स्वास्थ्य सेवाओं के खर्च अहन के कारण गरीबी रेखा से नीचे जाने वाले लोगों की संख्या 7 से 9 करोड़ हो गई है।
  आखिरी स्तर में सोहनदास जी ने सामाजिक न्याय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि इस विकास के मॉडल ने दुनिया में आर्थिक स्तर पर भले एक हिस्से का विकास किया हो मगर सामाजिक स्तर के सूचकांक पिछड़ गये हैं और दलित , वंचित  तबकों महिलाओं को जिस न्याय की दरकार थी वह नहीं मिला
आखिर में डा़. आर एस दहिया ने आयोजकों का सर्वकर्मचारी संघ का और वालन्टियरों का धन्यवाद करते हुए कार्यशाला का समापन किया।
रणबीर सिंह दहिया
प्रधान हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति