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अरुण प्रकाश मिश्र
२ अंतर्राष्ट्रीय मुद्दे:
१. ५७ मुस्लिम देशों ने पाकिस्तान का समर्थन किया : मुद्दा यह है की ये देश २ साल पहले तक भारत के साथ थे - क्या यह कूटनीतिक असफलता नहीं है कि आज ये पाकिस्तान के साथ हैं क्योंकि आज इंडिया खुलेआम इसरायल के साथ है?
मोदी सरकार की तमाम और सारी असफलताओं में यह सबसे उल्लेखनीय असफलता है - इसका ख़ुशी या गम से कोई लेना-देना नहीं ! इसका भगवा या हरित आतंकवाद से कोई लेना-देना नहीं !
२. बलूचिस्तान - अब जब मोदी ने अपनी मूर्खता से घर की बात बाहर फैला ही दी है तो कहने में कोई गलत बात नहीं कि भारत पाकिस्तान के आन्तरिक मामले में उसी तरह दखल कर रहा था जैसे पाकिस्तान कश्मीर में करता रहा, पर पाकिस्तान सफल रहा कश्मीर मुद्दे पर अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय को सहमत करने में और भारत कश्मीर को नहीं बचा पाया और अब तो कश्मीर अलग होने की कगार पर है - सीधे से नहीं तो टेढ़े से ! .... पाकिस्तान सामरिक रूप से अमेरिका के लिए बहुत जरूरी है .... पाकिस्तान चीन का पक्का दोस्त है जो अमेरिका का दुश्मन है .... रूस भारत का दोस्त 'था' पर पाकिस्तान की सीमा चीन से लगती है और चीन की सीमा रूस से ... सो रूस का इंटरेस्ट पाकिस्तान के साथ रहने में ज्यादा है न कि हिंदुस्तान के साथ .... हिंदुस्तान के साथ रहने की बात रूस ने केवल इस लिए कि भारत ने अपनी सीमाएं अमेरिकन सेना के लिए खोल दी हैं ! इस सब में कुछ बातें पक्की हैं:
१. कश्मीर का अलग होना पक्का है !
२. चीन-पाकिस्तान से कोई युद्ध नहीं होने जा रहा !
३. अमेरिका भारत की ज़मीन का सैनिक ठिकाने के रूप में करने जा रहा है !
४. भारत की सम्प्रभुता का अंत हो चुका है !
५. अमेरिका और रूस दोनों के लिए हिंदुस्तान-पाकिस्तान केवल बाज़ार हैं !
६. हिंदुस्तान की छवि दुनिया में पूरी तरह से खराब हुई है जहाँ तक मानवाधिकार की बात है और देश में जनता की सुरक्षा की बात है !
अरुण प्रकाश मिश्र
२ अंतर्राष्ट्रीय मुद्दे:
१. ५७ मुस्लिम देशों ने पाकिस्तान का समर्थन किया : मुद्दा यह है की ये देश २ साल पहले तक भारत के साथ थे - क्या यह कूटनीतिक असफलता नहीं है कि आज ये पाकिस्तान के साथ हैं क्योंकि आज इंडिया खुलेआम इसरायल के साथ है?
मोदी सरकार की तमाम और सारी असफलताओं में यह सबसे उल्लेखनीय असफलता है - इसका ख़ुशी या गम से कोई लेना-देना नहीं ! इसका भगवा या हरित आतंकवाद से कोई लेना-देना नहीं !
२. बलूचिस्तान - अब जब मोदी ने अपनी मूर्खता से घर की बात बाहर फैला ही दी है तो कहने में कोई गलत बात नहीं कि भारत पाकिस्तान के आन्तरिक मामले में उसी तरह दखल कर रहा था जैसे पाकिस्तान कश्मीर में करता रहा, पर पाकिस्तान सफल रहा कश्मीर मुद्दे पर अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय को सहमत करने में और भारत कश्मीर को नहीं बचा पाया और अब तो कश्मीर अलग होने की कगार पर है - सीधे से नहीं तो टेढ़े से ! .... पाकिस्तान सामरिक रूप से अमेरिका के लिए बहुत जरूरी है .... पाकिस्तान चीन का पक्का दोस्त है जो अमेरिका का दुश्मन है .... रूस भारत का दोस्त 'था' पर पाकिस्तान की सीमा चीन से लगती है और चीन की सीमा रूस से ... सो रूस का इंटरेस्ट पाकिस्तान के साथ रहने में ज्यादा है न कि हिंदुस्तान के साथ .... हिंदुस्तान के साथ रहने की बात रूस ने केवल इस लिए कि भारत ने अपनी सीमाएं अमेरिकन सेना के लिए खोल दी हैं ! इस सब में कुछ बातें पक्की हैं:
१. कश्मीर का अलग होना पक्का है !
२. चीन-पाकिस्तान से कोई युद्ध नहीं होने जा रहा !
३. अमेरिका भारत की ज़मीन का सैनिक ठिकाने के रूप में करने जा रहा है !
४. भारत की सम्प्रभुता का अंत हो चुका है !
५. अमेरिका और रूस दोनों के लिए हिंदुस्तान-पाकिस्तान केवल बाज़ार हैं !
६. हिंदुस्तान की छवि दुनिया में पूरी तरह से खराब हुई है जहाँ तक मानवाधिकार की बात है और देश में जनता की सुरक्षा की बात है !
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