रविवार, 18 सितंबर 2016

शीशा

एक बार एक डॉक्टर अर एक इंजिनीयर एक बस मैं सफर करैं थे ।  वे एकै सीट पै  बैठे थे ।  डॉक्टर बोल्या-- यू शीशा बन्द करदे मेरै जुखाम होरया सै । इंजीनीयर बोल्या-- मैं तो खुल्या राखूँगा ।  मनै  गर्मी लागै सै ।  दोनूं झगड़ पड़े इस बात पै । कंडक्टर आया अर बुझया -- के बात सै ? क्यूँ झगड़ रे सो ? डॉक्टर बोल्या--शीशे पै रोल्ला होरया सै ।  यू कहवै सै खुल्या राख अर मैं कहूँ सूँ बंद करदे ।  तो कंडक्टर बोल्या --पहलम नयों तो देखल्यो शीशा सै बी अक नहीं ।  शीशा कोन्या इस खिड़की मैं । 

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