एक बार एक डॉक्टर अर एक इंजिनीयर एक बस मैं सफर करैं थे । वे एकै सीट पै बैठे थे । डॉक्टर बोल्या-- यू शीशा बन्द करदे मेरै जुखाम होरया सै । इंजीनीयर बोल्या-- मैं तो खुल्या राखूँगा । मनै गर्मी लागै सै । दोनूं झगड़ पड़े इस बात पै । कंडक्टर आया अर बुझया -- के बात सै ? क्यूँ झगड़ रे सो ? डॉक्टर बोल्या--शीशे पै रोल्ला होरया सै । यू कहवै सै खुल्या राख अर मैं कहूँ सूँ बंद करदे । तो कंडक्टर बोल्या --पहलम नयों तो देखल्यो शीशा सै बी अक नहीं । शीशा कोन्या इस खिड़की मैं ।
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