APNA HARYANA SABKA HARYANA
मंगलवार, 13 सितंबर 2016
--प्रेमचंद
"साम्प्रदायिकता सदैव संस्कृति की दुहाई दिया करती है । उसे अपने असली रूप में निकलने में शायद लज्जा आती है, इसलिए वह उस गधे की भांति जो सिंह की खाल ओढ़कर जंगल में जानवरों पर रॉब जमाता फिरता था, संस्कृति का खोल ओढ़ कर आती है "
--प्रेमचंद
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