शुक्रवार, 2 सितंबर 2016

इस खाज का के करां ?

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इस खाज का के करां ?
सते फते नफे सविता कविता सरिता अर ताई भरपाई फेर कट्ठे होगे शनिचर नै। सते बोल्या - भाई दनोंदा के हैल्थ कैम्प मैं कूण-कूण गया था। नफे बोल्या - गया तो मैं भी था फेर वारी पहोंच्या इतनै प्रोग्राम मुख्य अतिथि का हो लिया था। सविता बोली मैं गई थी अर मनै मुख्य अतिथि की बात बी सुनी थी। ओ तो न्यों कहवै था अक म्हारे देश मैं 80 प्रतिशत इसी बीमारी सै जिनकी रोकथाम करकै उनतै बच्या जा सकै सै। रोकथाम की खातर पांच सूत्र बताये थे उसनै। एक-पीण का साफ पाणी हो। दूसरा-खावण नै पौष्टिक भोजन हो। तीसरा-रहवण नै हवादार मकान हो। चौथा-शौचालय की ठीक सुविधा हो। पांचवां-स्वास्थ्य सुविधावां का विस्तार हो जिसकी खातर प्राथमिक सेवा का स्तर मजबूत हो। कविता बोली - गई तो मैं बी थी फेर उसकी वा बात समझ कोन्या आई अक इन पांच मां तै च्यार बात डाक्टरां के अर स्वास्थ्य विभाग के हाथ मैं कोन्या। बस पांचमी बात की जिम्मेदारी सै डाक्टरां की। इस पांचमी बात मैं उसनै न्यों बी बताया अक म्हारे हरियाणा की कुल आबादी 2 करोड़ 10 लाख के लगभग सै। इस मां तै एक करोड़ 49 लाख आबादी गामां मैं रहन्ती बताई उसनै। न्यों बूझया अक कितनी जनसंख्या पै एक सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) होना चाहिए? सारे एक दूसरे के मुंह कान्हीं देखण लागगे। बेरा ए कोन्या था किसे नै बी। फेर उसनै बताई अक एक लाख की आबादी पै एक सीएचसी होना चाहिए। तो म्हारे हरियाणा मैं 149 सीएचसी होनी चाहिए। फेर उसने बूझया आज हरियाणा मैं कितनी सीएचसी सैं? इसका बी किसे नै बेरा कोनी था। उसने बताई अक 66 के लगभग सीएचसी सै म्हारे हरियाणा मैं आज। फेर उसने सवाल करया अक इसमैं कौनसे कौनसे विशेषज्ञ डाक्टर होने चाहिए? फेर सांप सा सूंघग्या लोगां कै। उसनै बताया अक एक बालकां का डाक्टर, एक मैडीसन का डाक्टर, एक सर्जन अर एक लेडी डाक्टर विशेषज्ञ एक सीएचसी मैं जरूरी सैं। नफे बोल्या - हां दो-तीन दिन पहलम मनैं अखबार मैं पढ़ी थी अक सोहना की सीएचसी आदर्श सीएचसी घोषित करी सै म्हारे मुख्यमंत्री जी नै। कविता बोली - इन 66 मां तै बी 10-11 मैं ये च्यारों ढाल के डाक्टर मुश्किल तै बताये थे। वो तो न्यों बोल्या सिफारिसी चिट्ठियां तै म्हारा इलाज कोन्या बणै। हमने इन पीएचसी अर सीएचसी अस्पताल पै ध्यान देना पड़ैगा अर इनकी देखभाल करनी पड़ैगी जिब जाकै काम चालैगा। सविता बोली - उसनै न्यों बी बताई अक इन पांच बातां मां तै जिननै च्यार बात पूरी करनी थी उनकै तो इक्कीश हजार की माला घालैं लोग अर डाक्टरां नै इस विभाग मैं अपनी सेहत ठीक ना होवण के जिम्मेदार मानैं या बात पूरी सही कोन्या।
हां, एक बात और कही उसनै अक ये नये नये अस्पताल अपोलो, फोरटिस बरगै खुल्लण लागरे सै ये मरीजां नै कति निचौड़ कै बगादें सैं अर उस पीस्से तै डाक्टरां नै बी भारी तनखा देवैं सैं जिस करकै डाक्टर सरकारी अस्पताल छोड़-छोड़ कै इन प्राइवेट अस्पतालां मैं जावण लागरे सैं। उसने बताई अक हरियाणा के मैडीकल के प्रोफैसर नै तो मिलै 40 हजार के लगभग और दिल्ली के सरकारी अस्पताल मैं मिलैं 68 हजार अर प्राइवेट अपोलो बरगे मैं मिलैं एक लाख तै बी ऊपर तो सरकारी अस्पतालां मैं डाक्टर टोहे बी नहीं पावैंगे आवण आले बख्ता मैं। उसनै कह्या अक इस बात पै भी हमनै गौर देना पड़ैगा अक म्हारे सरकारी अस्पतालां के डाक्टरां की अर कर्मचारियां की हालत ठीक ठ्याक हो, उनकी सेहत बी ठीक ठ्याक हो जिसतै वे म्हारी सेहत का ठीक ठ्याक ख्याल राख सकैं। उसनै बताई अक इस कैम्प मैं आये डाक्टरां ने बताया सै अक ज्यादातर गामां मैं खाज की बीमारी, दमे की बीमारी, पेट मैं गैस की बीमारी अर बुखार अर बुखार पाछै जोड़ां मैं दर्द की बीमारी पाई जावैं सैं। इन बीमारियां का पक्का इलाज कोन्या अर घणखरे मरीज स्टीरायड की दवाई खावैं सैं जो ठीक नहीं लाम्बे दौर खातर। इन बीमारियां के कारण ढूंढण की बात कही थी उसनै।
उसनै दो बात बताई थीं अक एक तो कांग्रेसी घास के कारण खाज और दमे की बीमारी हो सकै सै अर दूसरा पेट की गैस की बीमारी पाणी मैं कीटनाशक दवाइयां की मात्रा फालतू होण करकै हो सकै सै। बुखार वायरल सै यो शरीर की बीमारियों से लड़ण की ताकत मैं कमी करकै होवे सै या ताकत पौष्टिक आहार तै बची रह सकै सै। नफे बोल्या - ये बात तो उसकी साच्ची सै तीन साल हो लिए इस खाज नै मेरे नाक में दम कर राख्या सै। दवाई ल्यूं इतनै दबी रहवै सै पर दवाई छोड़ते की साथ फेर होज्या सै। अर अपने गाम मै तो बिरला ए घर बच रया होगा इस खाज की बीमारी तैं। सविता - ओ तो न्यों कहवै था अक या कांग्रेसी घास जड़तै खोनी पड़ैगी जै इस खाज तै छुटकारा पाणा सै तो। नफे बोल्या - एकले मेरे बस की बात कित सै यो तो पूरा गाम सोचैगा तो बात बण सकै सै किमै। कविता बोली - एकले गाम तै बी बात कोन्या बनती दीखती। पूरे गुहांड के गामां नै सोचना पड़ैगा। सते ईब ताहिं चुप था ओ बोल्या - एक जन पंचायत पूरे गुहांड की बुलावण की जरूरत सै जिसमै 36 जात शामिल हों अर कम तै कम आधी महिला हों अर उसमै विचार कराया जा इस खाज (एलर्जी) की बीमारी तै मुक्ति क्यूकर पाई जा।

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