गुरुवार, 29 सितंबर 2016

धर्मअन्धो के भ्रमित प्रश्नो के उत्तर...

(Forwarded post)
धर्मअन्धो के भ्रमित प्रश्नो के उत्तर...
नीचे कुछ प्रश्न और उनके उत्तर दिए गये हैं, इन प्रश्नों की सहायता से अधिकांश 'वैदिक हिन्दुत्ववादी' सोशल-मिडिया-'व्हाट्सअप', 'फेसबुक, आदि पर प्रश्न पेस्ट करके लोगों को भ्रमित कर रहे हैं।| हालाँकि इन प्रश्नों का कोई औचित्य भी नही है, क्योंकि जिसने भी ये प्रश्न तैयार किये हैं वह व्यक्ति या तो 'अल्पज्ञानी', 'बौद्धिक- वैज्ञानिक सोच' से कोसों दूर, या फिर-धर्मान्ध' हो सकता है जिनके लिए ये साधारण सवाल भी किसी अजूबे से कम नही है। इनके द्वारा पूछे जाने वाले कुछ प्रश्न ब्राहमणों के विदेशी होने की सत्यता को और भी अधिक प्रगाढ़ कर रहे हैं :-
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👉🏽*प्रश्न :- (1) क्यो "नासा-के-वैज्ञानीको" ने माना की 'सूरज' से " ॐ" (") "की आवाज निकलती है ?
👎🏼उत्तर :-- वैसे नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार अन्तरिक्ष में
उपग्रह में लगी अत्याधुनिक-ध्वनि रिकॉर्डिंग मशीन ने कोई हल्की सी ध्वनि कैद की जो 'स्वर' ("अssssssssssss....') के रूप में प्रतीत होती है, न की 'ओउम् (ॐ)
की ध्वनि | 'न ही 'नासा के वैज्ञानिकों' ने इसकी पुष्टि नहीं की है की 'सूरज' से "ॐ" '' की आवाज निकलती है ? किसी वस्तु के गिरने, टूटने, टकराने, वायु के प्रवाह आदि से निकली लम्बी आवाज से भी 'स्वरों' के रूप में ध्वनी पैदा हो सकती है | कभी-कभी सुनसान जगह पर भी हमें एक विशेष प्रकार की 'लयबद्ध'ध्वनि सुनायी देती है, प्रायः वहां भी ध्वनि का 'उच्चारण' "स्वर" के रूप में होता है न की "व्यंजन" | प्रायः वह ध्वनी हमारे लिए कानों द्वारा सुनने पर, हमारी सोच और मानसिकताओं पर निर्भर करती हैं | वैसे 'सूर्य' आग का गोला है | हम भी जब 'आग' जलाते हैं तब आग की 'लपटों' से ध्वनि भी सुनायी देती है | यह ध्वनी भी हमारे कानों द्वार सुनने और हमारी मानसिकता और साथ में 'वायु' के प्रवाहानुसार अलग-अलग आभाषित हो सकती है | उदाहरण :- जैसे किसी 'कुत्ते' के भोंकने पर यदि किसी बालक से पूछे की कुत्ता कैसे भोंक रहा था ? तब वह कह सकता है की 'कुत्ता' "भों-भों..." की आवाज निकाल रहा है | वही किसी अन्य बालक से पूछने पर "वऊ-वऊ", "भू-भू", "हु-हु" जैसे शब्द सुनने को मिल सकते है जिन्होंने कुत्ते की ध्वनि का विश्लेषण किया हो ! ठीक इसी प्रकार वस्तुओं के गिरने, टूटने, टकराने से निकली आवाज को भी हम विभिन्न 'स्वरों' और 'व्यंजनों' के रूप में जोड़कर आभाषित कर सकते हैं |
👉🏽*प्रश्न :- (2) क्यों 'अमेरिका' ने "भारतीय - देशी गौमुत्र" पर 4 Patent लिया व कैंसर और दूसरी बिमारियो के लिये दवाईया बना रहा है ? जबकी हम गौमुत्र का महत्व हजारो साल पहले से जानते है ?
👎🏼उत्तर :- 😃😃हास्यप्रद प्रश्न .........!!!
'राजस्थान' (विशेषतः पश्चिम-राजस्थान) में पुराने समय सेही औरतें नहाते समय अपने बाल एक विशेष प्रकार की मिट्टी जिसे 'मुल्तानी-मिट्टी' भी कहा जाता है, से अक्सर धोती हैं और यह मिट्टी अत्यंत चिकनी व कीटाणु- रहित होने के कारण बालों के लिए प्रायः साबुन से भी बेहतर परिणाम देती हैं, बाल अत्यंत ही मुलायम और चिकने हो जाते हैं साथ में कीटाणुओं और विषाणुओं रहित तो है ही ! यह मिट्टी किराणा की दुकानों पर भी मिलती है| अब इस मिट्टी से कोई व्यक्ति किसी 'नई खोज' या 'अर्वाचीन' दवा का अविष्कार करें तो अन्य व्यक्ति उस पर ऐतराज नहीं कर सकता है ! जिस प्रकार 'मिट्टी' प्राकृतिक संसाधन है, ठीक उसी प्रकार 'गाय' या उसके 'मल-मूत्र' पर सिर्फ 'ब्राह्मणवादियों' का ही अधिकार नहीं है ! चूँकि अमेरिका ने 'गौमूत्र' से बनी 'दवा' पर पेटेंट
करवाया होगा, न की "गौमूत्र" पर ! अतः अगर कोई इसी गौमूत्र से कोई ऐसी दवा जो अमेरिकी दवा से भिन्न हैं, का अविष्कार करे तो वह भी अपना पेटेंट करवा सकता है |
😜वैसे तो 'गौ-मलमूत्र' पर सदियों से सिर्फ 'ब्राह्मणवादियों' का ही पेटेंट रहा हैं ! हाँ....! फिर भी 'ब्राह्मणवादियों' पर किसी 'अछूत' की छाया पड़े तो अभी भी समय है की वे "गौमूत्र" या "गौमल" से नहाने का 'अधिकार' या पेटेंट" जल्द ही करवा लें ! तब तो 'अमेरिका' को या किन्हीं अन्य 'गैर- हिन्दुत्ववादियों' द्वारा कोई आपत्ति भी नही होगी !
👉🏽प्रश्न :- (3) क्यो अमेरिका के 'सेटन-हाल-यूनिवर्सिटी' मे "गीता" पढाई जा रही है ?
👎🏼उत्तर :-चूँकि वहां पर 'गीता' का अध्यापन विद्यार्थियों में 'तृतीय-भाषा' का ज्ञान करवाने के उद्देश्यों से करवाया जाता हैं, न की शिक्षार्थियों को 'कृष्ण' के 'उपदेशों' और 'गीता-सार' सीखाने के लिए पढाई जाती है ! अमेरिका एक जागरूक देश है, वहां पर लगभग विश्व के सभी देशों की संस्कृति, धर्म और संस्कारों का अध्ययन-अध्यापन विद्यार्थियों में "ज्ञान और कौशल" के लिए भिन्न-भिन्न शैक्षणिक-संस्थाओं द्वारा करवाया जाता हैं, न की वैदिक ज्ञान अपनाने के उद्देश्य से !'भारत' में भी कईं 'शैक्षणिक संस्थान' हैं जो 'कुरान','बाइबिल' आदि ग्रंथों के अध्यापन करवाते हैं जिनका प्रयोजन 'निश्चित' या 'बहु-उद्देश्यय भी हो सकता हैं |
👉🏽प्रश्न :- (4) क्यो इस्लामिक देश 'इंडोनेशिया'. के Aeroplane का नाम "भगवान नारायण के वाहन 'गरुड" के नाम पर "Garuda Indonesia" है, जिसमे garuda का symbol भी है ?
उत्तर :-संस्कृत भाषा का प्रादुर्भाव भारत में नहीं अपितु 'यूरेशियन' देशों में हुआ था | अतः "गरूडा" शब्द भी संस्कृत भाषा का शब्द है,
जो विदेशी है, न की स्वदेशी ! भारत में लगभग ४ हजार साल पूर्व विदेशी आर्यों (गरूडो) के
आक्रमण के पश्चात् संस्कृत-भाषा का प्रयोग होने लगा | यहीं वजह है की 'हिन्दू धर्म' (ब्राहमणी) के अधिकांश ग्रन्थ 'संस्कृत' भाषा में ही लिखे गये, क्योंकि इस भाषा पर
इन विदेशियों का ही एकाधिकार रहा और इन काल्पनिक ग्रंथों में वहीँ बातें लिखी गयी जिसे इन्होंने लिखना चाहा जो सच्चाई के धरातल से लाखों-कोसों दूर हैं
👉🏽प्रश्न :- (5) क्यो इंडोनेशिया के रुपए पर "भगवान गणेश"की फोटो है ?
उत्तर :- जैसा की इनका उत्तर भी उपरोक्त चौथे प्रश्न के रूप में निहित हैं | भारत में विदेशी ब्राहमणों के आगमन से पूर्व (आज से 2 हजार साल पूर्व) तक किसी भी ब्राहमणी भगवानों का अविष्कार नहीं हुआ था | हिन्दुओं के अधिकांश देवी देवताओं यथा त्रिदेव (ब्रह्मा, विषाणु, महेश) के साथ लक्ष्मी,पार्वती, दुर्गा काली,सरस्वती आदि के स्वरुपों की परिकल्पनायें विदेशी'आर्यों' ने 'सुमेर-ग्रीक (सुमेरियन / मेसोपोटामिया आदि सभ्यताओं) की नकल स्वरुप पैदा हुई |आज भी प्राचीन सुमेरियन / मेसोपोटामियन संस्कृति में
गणेश,शिव, विष्णु(गरुडा),दुर्गा-काली आदि की छवियाँ देखी जा सकती है | इस तरह से आर्यों के विदेशी होना प्रमाणित होता है।
👉🏽प्रश्न :- (6) क्यो 'बराक-ओबामा' हमेशा अपनी जेब मे"हनुमान-जी" की फोटो रखते है ?
उत्तर :- बराक ओबामा 'हनुमानजी' की फोटो जेब में रखे या किसी और की ! पर यह सच हैं की वे किसी काल्पनिक 'भगवानों या रचनाओं' की अपेक्षा 'विज्ञान' और 'वैज्ञानिक-सोच' में विश्वास रखते है | वैसे मेरे एक मित्र ने मुझे जेब में रखने लाइक स्टील युक्त कवर की डायरी गिफ्ट के रूप दी जिस 'बुद्ध, अम्बेडकर, कबीर, फुले, पेरियार, गाडगे जैसे महापुरुषों की छवियाँ हैं | चूँकि वह गिफ्ट दिखने में सुन्दर तो है ही; जिसे मैं विशेष नजरिये से जोड़कर देखता हूँ जो मेरे लिए प्रेरणादायक भी है तो 'मित्र' का 'प्रेम' भी उसमे नजर आता है, अतः मैं उसे
यथासंभव जेब में रखने की कोशिस करता हूँ, क्योंकि उसी के अन्दर छोटी से डायरी भी है !!!
👉🏽प्रश्न :- (7) क्यो आज पूरी दुनिया "योग-प्राणायाम" की दिवानी है ?
उत्तर :- 'योग-प्राणायाम' विदेशी 'आर्यों' के 'हिन्दू-धर्म' की खोज नहीं हैं, अपितु भारत में पुरातन-काल से (आर्यागमन से पूर्व) 'योगिक' और 'बौद्धिक' संस्कृति का प्रचलन ही अधिक था, न ही देवी-देवताओं और 'अनेकेश्वरवाद' के रूप में किन्ही 'पारलौकिक-शक्तियों' में आस्था या उनकी पूजा की जाती थी | इसे 'शारीरिक' और 'बौद्धिक-व्यायाम' भी कह सकते है | अतः "हिन्दू-धर्म" के 'ब्राहमणवादियों' को गर्व के साथ
कहने का हक नहीं है की - "क्यो आज पूरी दुनिया "योग-प्राणायाम" की दिवानी है ?" 'योग-प्राणायाम', 'ब्राहमण-धर्म' (हिन्दू-धर्म) की खोज नहीं है, साथ ही 'योग' और 'ब्राहमण-धर्म' एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत है |
👉🏽प्रश्न :- (8) क्यो "भारतीय-हिंदू-वैज्ञानिको" ने 'हजारो साल पहले ही ' बता दिया की धरती गोल है ?
उत्तर :- "हिन्दू-धर्म" के वेदों के अनुसार समस्त श्रृष्टि जलमग्न थी,अर्थात 'रसातल' में डूबी हुई ! तब भगवान''सुअर जी' (अर्थात वाराहावतार विषाणुजी) इसे बाहर निकालते है ! वेदों के अनुसार कई बार धरती के लिए 'देवों' और'असुरों' में छीनाझपटी भी होती है ! 'राक्षस' पृथ्वी को लेकर भाग जातें है, तो फिर उसे समुद्र में फेंक भी देतें है ! हिन्दू-धर्मानुसार 'पृथ्वी' तो अभी भी 'विषाणुजी के हाथों में हैं, जो स्वयं 'नाग' पर खड़े होकर इसे कसकर झेले हुए है !!!
👉🏽प्रश्न :- (9) क्यो जर्मनी के Aeroplane का संस्कृत-नाम "Luft-hansa" है ?
उत्तर :-इसका उत्तर भी प्रश्न संख्या ४ के उत्तर में ही निहित हैं, क्योंकि 'संस्कृत' भाषा ही विदेशी है |
👉🏽प्रश्न :- (10) क्यो 'हिंदुओ' के नाम पर 'अफगानिस्थान'के पर्वत का नाम "हिंदूकुश" है ?
उत्तर :-- चूँकि 'आर्य' विदेशी है और इनका प्राचीन 'ऋग्वेद' भी इन्ही विदेशियों के साथ भारत में मौखिक-उक्तियों के रूप में आया है | 'ऋग्वेद' में जिस "हिन्दुकुश"पर्वत का विवरण है वह वास्तव में 'अरब-देशों' में स्थित एक पर्वतमाला हैं | 'ऋग्वेद' के अधिकांश 'श्लोक' ईरान के फारस प्रान्त में जन्मे "फ़ारसी-धर्म" के ग्रन्थ 'जेंद-अवेस्ता' की ही हुबहू नकल है | फ़ारसी-धर्म-ग्रन्थ 'जेंद-अवेस्ता' में भी इस
"हिन्दुकुश" पर्वत का विवरण है, जो 'अफगानिस्थान' में ही स्थित है | अतः भारत के 'हिन्दू-धर्म' या किसी 'हिन्दुस्तानी-पर्वत' की नकल पर अफगानिस्तान में पर्वत का नाम 'हिन्दुकुश' नही रखा गया |
👉🏽प्रश्न :- (11) क्यो हिंदुओ के नाम पर 'हिंदी भाषा, 'हिन्दुस्तान', 'हिंद-महासागर' ये सभी नाम है ?
उत्तर :--हा...हा...हा...!😃 अत्यंत ही हास्यास्पद प्रश्न ....!!! 'हिन्दू' की भांति, 'सिन्धी-धर्म' के लोग अपनी भाषा को "सिन्धी" कहते हैं, पंजाब के "पंजाबी", राजस्थान के "राजस्थानी" ! अरब के लोग "अरबी", फारस के "फ़ारसी", 'एंग्लों' लोगों ने अपनी भाषा को "इंग्लिश"
नाम दिया तो 'महाराष्ट्र' के लोगों ने अपनी भाषा को "मराठी" कहा ! इसी प्रकार भारत का 'राजस्थान-राज्य', जो किसी समय "राजपुताना" के नाम से जाना जाता था, उस "राजपुताना"
के नाम पर "राजस्थान" नाम पड़ गया ! ऐसे एक नही, वरन अनेक उदाहरण है; जिनके 'धर्म', 'रिवाजों' या सम्बंधित विशेष के सूचकों पर उनकी 'भाषा' और 'स्थान' के नाम पड़ गये |
मगर 'हिन्द-महासागर' की पहचान विश्व-भर में "इंडियन-ओसियन"(Indian-ocean) के नाम से है | विश्व में सिर्फ भारत के लोग ही इसे "हिन्द-महासागर" के नाम से जानते है | केवल भारतीय मानचित्र में इसे 'हिन्द-महासागर'
लिखा जाता है, जबकि विदेशों में यह "इंडियन-ओसियन" (Indian-ocean) के रूप में जाना जाता है |
👉🏽प्रश्न :- (12) क्यो 'वियतनाम देश' मे "Visnu-भगवान"की 4000-साल पुरानी मूर्ति पाई गई ?
उत्तर :--इसका उत्तर भी प्रश्न संख्या ४ और ५ में निहित हैं, क्योंकि समस्त भारतीय-देवी-देवता विदेशी-संस्कृति(सुमेरियन-ग्रीक-मेसोपोटामियां) आदि की कथाओं, नाटकों और रूपकों के रूप में मिले-जुले अंश (नाटक-कर्ता) है अतः 'विष्णु' जिसे उस संस्कृति में 'गरुडा' कहा जाता रहा, का 'वियतनाम' जैसे यूरेशियन देशों में मूर्ति मिलना पक्का प्रमाण है कि आर्य-ब्राहमण विदेशी है !!!
👉🏽प्रश्न :- (13) क्यो अमेरिकी-वैज्ञानिक Haward ने, शोध के बाद माना की "गायत्री मंत्र मे " 110000 frequency " के कंपन है?
उत्तर :-- यह जरुरी नहीं है की ११०००० freq.'गायत्री-मंत्र' में ही हो ! ऐसे बहुत सारे निरर्थक शब्दों को जोड़कर ऐसा वाक्य बनाया जा सकता है, जिसकी फ्रीक्वेंसी 110000 हो सकती है ! वैसे "गायत्री-मंत्र" की '110000' freq. उच्चारणकर्ता पर भी निर्भर करती है ! सही उच्चारण के अभाव में फ्रीक्वेंसी कम या ज्यादा भी हो सकती है !
👉🏽प्रश्न :- (14) क्यो 'बागबत की बडी मस्जिद के इमाम' ने "सत्यार्थ-प्रकाश" पढने के बाद हिंदू-धर्म अपनाकर, "महेंद्रपाल आर्य" बनकर, हजारो मुस्लिमो को हिंदू ,और वो कई-बार 'जाकिर-नाईक' से Debate के लिये कह चुके है, मगर जाकिर की हिम्मत नही हुई ?
उत्तर :-- दुनिया में ऐसे लाखों-करोड़ों लोग हैं, जिन्होंने समय व परिस्थितियों के साथ में अपनी रूचि-अभिरुचि के अनुसार 'धर्म-परिवर्तन' किया है ! 'भारत' और 'पाकिस्तान' के मुस्लिमों में बहुत बड़ा वर्ग ऐसा हैं, जो किसी समय 'हिन्दू' था, जिनमें हिन्दुओंका शोषित वर्ग (शुद्र-वर्ग) सबसे अधिक रहा था ! विश्व के एकमात्र सर्वाधिक छुआछुत वाले 'हिन्दू-धर्म' से तंग आकर कईयों ने ईस्लाम, ईसाई या बौद्ध-धम्म' ग्रहणकर लिया | यहाँ तक की "सिक्खों" ने तो हिन्दू-धर्म की विकृतियों के कारण अपना अलग धर्म "सिक्ख" की स्थापना की !..और भी बहुत उदाहरण है ! अब रही बात 'जाकिर-नाईक' द्वारा "महेंद्रपाल आर्य" से'Debate' नहीं करने की; तो जिस प्रकार मुझे इन प्रश्नों के उत्तर लिखते हुए 'हिंदुत्व' पर हँसी व तरस तो आया ही , साथ में ऐसे 'बेहुदे' व तर्कहीन प्रश्नों के जवाब देने से मेरा व्यर्थ का दिमाग भी खर्च हुआ ! वैसे भी कोई व्यक्ति किसी धर्म या उसके ग्रंथों पर प्रश्न-चिन्ह तभी लगा सकता है जब उन्होंने वे ग्रन्थ पढ़े और उन परचिंतन किया हो !अतः 'जाकिर-नाईक' जी क्यों व्यर्थ में
अपना दिमाग "महेंद्रपाल आर्य" से खपाना चाहेंगे ?
👉🏽प्रश्न :- (15) अगर हिंदू-धर्म मे "यज्ञ" करना अंधविश्वास है, तो, क्यो 'भोपाल-गैस-कांड' मे, जो "कुशवाह-परिवार" एकमात्र बचा, जो उस समय यज्ञ कर रहा था ?
उत्तर :-ऐसे संयोग बहुत होते हैं, इन्हें चमत्कार की श्रेणी मेंनहीं रख सकतें | क्योंकि कईं बार धार्मिक लोग मारे जाते हैं और अधार्मिक या नास्तिक बच जाते हैं ! केदारनाथ हादसे में भी इसके हजारों उदाहरण सामने आयें जबकि तीर्थयात्री मारे गये और कई जो चोरी की नियति से केदारनाथ गये वे बच गये ! वैसे
अगले प्रश्न में भी इसका उत्तर मिल जायेगा !
👉🏽प्रश्न :- (16) 'गोबर-पर-घी जलाने से "१०-लाख-टन आक्सीजन गैस" बनती है ?
उत्तर :- प्रश्नकर्ता से मेरा निवेदन है की अपने घर के किसी 'कमरे' की समस्त 'खिड़कियाँ' व 'दरवाजे' बंद कर रात भर 'गोबर' पर 'घी' जलाएं !!! ध्यान रहे की कमरे में बनने वाली ऑक्सीजन नाम-मात्र भी बाहर नहीं जा पायें और सुबह तक आपका क्या हाल होता है अवश्य बताएं !!!
👉🏽प्रश्न :- (17) क्यो "Julia Roberts" (American actress and producer) ने 'हिंदू-धर्म' अपनाया और वो हर रोज "मंदिर" जाती है ?
उत्तर :- भारत में ऐसे बहुत सारे महापुरुष हुए जिन्होंने 'हिन्दू-धर्म' त्यागकर अन्य धर्म या धम्म अपना लिए | भारत के 'संविधान' निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर इसके उदाहरण है | प्रश्न संख्या 14 में इसका विस्तृत जवाब है | वैसे मैंने सुना है की विश्व के सबसे प्रतिष्ठित व्यक्ति ('अमेरिका' के राष्ट्रपति) "बराक-ओबामा" ने भी 'बोद्ध-धम्म' ग्रहण कर लिया !!!
👉🏽प्रश्न :- (18) अगर "रामायण" झूठा है, तो क्यो दुनियाभर मे केवल "राम-सेतू" के ही पत्थर आज भी तैरते है ?
उत्तर :-वैसे 'रामायण' का 'झूठी' और'काल्पनिक' ठहराने के लिए एक नहीं अपितु अनेक तथ्य और प्रमाण मौजूद है ! रही बात 'रामसेतु' के पत्थरों के तैरने की-
*प्रथम - रामसेतु कभी बनाया ही नही गया ! 'रामजन्म' और 'सेतु' की कल्पना का समय अभी तक जो बताया जाता रहा है उस समय 'श्रीलंका' भारत का ही अंग था अर्थात दोनों 'उपमहाद्वीप' एक-दुसरे से जुड़े हुए थे !साथ ही उस देश का नाम भी 'श्रीलंका' नही था !
*द्वितीय- भारत और 'श्रीलंका' के बीच में "कोरल्स"की चट्टानें है उन्हें पत्थर नहीं कहा जा सकता है | इन 'कोरल्स' की संरचना 'मधुमक्खियों' के छत्ते के समान होती है, जिनमे बारीक़ रिक्त स्थान होते है | अतः किसी भी हल्की वस्तु का आयतन, पानी के घनत्व के
कम होने पर वह तैरने लगती है; यह विज्ञान का सिद्धान्त है। इसमें आश्चर्य या 'राम' की शक्ति का कोई प्रभाव नहीं है !!!
👉🏽प्रश्न :- (19) अगर "महाभारत" झूठा है, तो क्यो भीम के पुत्र,''घटोत्कच'' का विशालकाय कंकाल, वर्ष 2007 में 'नेशनल-जिओग्राफी' की टीम ने, 'भारतीय-सेना की सहायता से' उत्तर-भारत के इलाके में खोजा ?
उत्तर :-- वह खबर गलत और चित्र बनावटी साबित हुई |
👉🏽प्रश्न :- (20) क्यो अमेरिका के सैनिकों को, अफगानिस्तान(कंधार) की एक गुफा में, 5000 साल पहले का महाभारत- के समय-का "विमान" मिला है ?
उत्तर :- वह विमान नहीं अपितु प्राचीन 'वास्तुकला' का नमूना है | जिसको अंधभक्त लोग विमान समझे बैठे हैं।
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Vishpendra Singh Phir aapke hisab se Hindustan m h Kya, Sanskrit vedesi language, devi devta vo bhi videsi, Chlo maan lete h to videsh m Sanskrit main language kyo ni h, vha pr Hindu dharm main kyo ni h
Rajendra Singh धर्म क्या है? धर्म के नाम पर निर्दोष लोग अपना समय 🕒 बर्बाद करते हैं कुछ लोग अपना ऊल्लू सीधा करते हैं
कैलाश चौहान मझिंगई लगता हैं कि अम्वेडकर डरता था वामनो से तभी तो उस व्यक्ति ने लिखा हैं कि आर्य कोई वाहर के नही हैं अव नये अम्वेडकर वादी अम्वेडकर को चुनौती दे रहे हैं कि दुनिया का सवसे पढ़ लिखा व्यक्ति ने जो खोज करके लिखा वह झुठ था अगर अम्वेडकर की माने तो अार्य वाहर से नही आये थे तो तुम्हारे सारे तर्को का लंका दहन हो जाता हैं अगर आर्यो विदेशी हैं तो अम्वेडकर ने डिग्री कही कुडेदान से उठाई होगी

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