शनिवार, 24 सितंबर 2016

Press Release

प्रैस विज्ञप्ति
हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति , भारत ज्ञान विज्ञान समिति और हरियाणा विज्ञान मंच के संयुक्त तत्वाधान में राज्य स्तरीय दो द्विसीय कार्यशाला राष्ट्रीय जन विज्ञान नेटवर्क द्वारा प्रायोजित -राष्ट्रीय अभियान - सबका देश, हमारा देश के नारे के साथ -बहुविविधता,जनतन्त्र, विकास और सामाजिक न्याय - का आयोजन 23-24 सितम्बर ,2016 को रोहतक में सुखपुरा चोक स्थित सर्वकर्मचारी संघ के कार्यालय में किया गया जिसमें हिसार , रोहतक, पानीपत, जींद और करनाल के साथियों ने हिस्सेदारी की। 23.9.16 को उदघाटन सत्र में दिल्ली साइंस फोरम के अध्यक्ष और राष्ट्रीय जन विज्ञान नेट वर्क के पूर्व प्रधान डा़़. डी. रघुनन्दन ने इस राष्ट्रीय अभियान के परिप्रेक्ष्य पर अपनी बात रखते हुए कहा कि आज निजीकरण, उदारीकरण और वैश्वीकरण के विकास के रास्ते पर 1990 के दशक से अब तक चलते हुए , भारत के समाज के आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में नाबराबरी बढ़ी है और देश की विविधता पर भी धर्मान्धता के काले बादल मंडराने लगे हैं। इस विकास ने मुठी भर लोगों की सम्पतियों में असीम बढोतरी की है और बड़े तबकों की आथिक हालत नीचे की और गई है और साथ ही वैज्ञानिक दृष्टिकोण का प्रचार प्रसार करने की बजाय अंधविश्वासों मायथेलॉजी को इतिहास बताकर जनता को गुमराह करने का काम किया जा रहा है। राष्ट्रीय जन विज्ञान नेट वर्क एक साल के जन अभियान के दौरानसबका देश- हमारा देशके नारे को और विकास, जनतन्त्रण् ब्हुविविधता और सामाजिक न्याय के मुद्यों को पूरे देश में 7 नवम्बर 2016 को पूरे देश के राज्यों में इस अभियान का शुभारम्भ एक साथ करेगा।
     देसरे सत्र में नरेश प्रेरणा ने इस अभियान के तौर तरीकों पर विस्तार से चर्चा की और बताया कि एक प्रर्दशनी तैयार की जाएगी और अलग अलग विषयों पर 18 पुस्तिकाएं तैयार की जा रही हैं जिनके माध्यम से लोगों से जिलों और गावों में संवाद किया जाएगा। तीसरे सैशन में आज की शिक्षा की दशा और दिशा पर शीशपाल निदेशक स्टेट रिसोर्स सैंटर रोहतक और पगमोद गौरी सचिव भारत ज्ञान विज्ञान समिति ने अपने विचार रखे।
  24.9.2016 को सुबह के सैशन में डा. रणबीर सिंह दहिया प्रधान हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति ने स्वास्थ्य क्षेत्र में उदारीकरण के तहत सुधार जो लागू किये गये उनके क्या असर सामने आये हैं। मरीज और डाक्टर आमने सामने खड़े कर दिये गये इन नीतियों के कारण। बताया कि चार तरह से प्रभावित किया है।
1 सार्वजनिक स्वास्थ्य पर खर्चों की कमी करके
2 सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में लागत उगाही लागू करके
3 सवास्थ्य सेवा प्रणाली को अलग अलग खानों में बांछ दिया। गरीबों के लिएबेसिकस्वास्थ्य सेवा और अमीरों के लिए निजी स्वास्थ्य सेवा
4 निजी क्षेत्र के लिए विभिन्न कामों की आडट सोर्सिंग ार दी गई
5बीमा योजनाएं लागू करके कम्पनियों को फायदा किया
इस सबके चलते 2013 -2014 में स्वास्थ्य सेवाओं के खर्च अहन के कारण गरीबी रेखा से नीचे जाने वाले लोगों की संख्या 7 से 9 करोड़ हो गई है।
  आखिरी स्तर में सोहनदास जी ने सामाजिक न्याय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि इस विकास के मॉडल ने दुनिया में आर्थिक स्तर पर भले एक हिस्से का विकास किया हो मगर सामाजिक स्तर के सूचकांक पिछड़ गये हैं और दलित , वंचित  तबकों महिलाओं को जिस न्याय की दरकार थी वह नहीं मिला
आखिर में डा़. आर एस दहिया ने आयोजकों का सर्वकर्मचारी संघ का और वालन्टियरों का धन्यवाद करते हुए कार्यशाला का समापन किया।
रणबीर सिंह दहिया
प्रधान हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति


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