शुक्रवार, 2 सितंबर 2016

स्कूल कड़ै जा लिये ?

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स्कूल कड़ै जा लिये ?
       फत्ते बोल्या - इन स्कूलां का सत्यानाश जा लिया। सविता बोली - बहोत तावली बेरा लाग्या। कविता बोली - स्कूलां की किसै नै चिंता ए कोन्या दीखती। सरपंच के बालक प्राइवेट स्कूल मैं जावैं। हैडमास्टर जी के दोनूं बालक दिल्ली पढ़ैं। डाक्टर प्रदीप नै अपने बालक स्नावर मैं भरती करवा दिये। सविता बोली - कदे बख्त थे जिब स्कूल की पूरी की पूरी बिल्डिंग रिटायर्ड फौजी रिसाल सिंह साहब नै अर पूरे गांम नै खड़े हो कै बनवाई थी। बाजे भगत का सांग तीन दिन हुया था गाम मैं अर ढाई लाख रुपये कट्ठे होगे थे उन बख्तां मैं। फत्ते बोल्या - आज कोए ढाई आने देकै राज्जी कोन्या। सत्ते बोल्या - असल मैं सरकारी स्कूलां मैं पढ़ाई का भी तो भट्ठा बैठ लिया। फत्ते बोल्या - भट्ठा बिठाया किसनै? कविता बोली - भट्ठा बिठाया म्हारी शिक्षा की नीतियां नै अर रही सही कसर गाम आल्यां नै पूरी करदी। स्कूलां मैं जाकै इनकी संभाल करनी बंद करदी। गुटबाजी होगी गाम मैं। बदमाशां नै सिर जोड़ लिये अर घणी ठाड्डी यूनियन बणाली अपनी। सविता - के नाम सै इनकी यूनियन का? कविता - यूनियन का नाम कोन्यां फेर असामाजिक तत्वां की यूनियन सै ऊपर ताहिं। ये स्कूल का माहौल खराब राखैं सै अर इननै बचावण नै ऊपर आले तैयार रहतै सैं। महिला टीचरां गेल्यां बहोत बुरा बर्ताव होरया सै स्कूलां मैं। सत्ते - ईबतै महिलावां अर छोरियां गेल्यां पूरे समाज में बुरा बर्ताव होरया सै। फत्ते - बात सही सै फेर जै स्कूलां मैं ये सिरफिरे मास्टर जिनकी संख्या मुट्ठी भर सै जै लड़कियां गेल्यां यौन उत्पीड़न करैं सैं तो या तो घणी माड़ी बात सै ना। कविता - 6 तैं 19 फरवरी के एक पखवाड़े में हरियाणा के सरकारी स्कूलां में कई मास्टरां द्वारा छात्रावां का यौन शोषण लगातार करण करकै आठवीं, नौवीं की मासूम लड़कियां के गर्भवती होवण की खबरां नै मेरा तो दिल हिला कै धर दिया। मनै थारा बेरा ना। फत्ते - झकझोर कै तो हम भी धर दिये। शिक्षक-शिष्य संबंध नै म्हारे आड़ै सारे संबंधां मैं सबते पवित्र संबंध मान्या जावै सै। सविता - 6 तारीख नै ढराणा झझर, 8 तारीख नै दुर्जनपुर जींद, 9 तारीख नै रानिया, 17 तारीख नै बराड़ा अंबाला तै ये खबर ज्यूकर चारों कान्हीं तै आई तै हरियाणा का चूची बच्चा हिलग्या। फत्ते - जित माणस बणण की शिक्षा दी जावै, उड़े इतनी घिनौनी हरकत? मेरै तो जणों सन्नपात सा मारग्या।
कविता - मेरी कई बर स्कूल, कालेज अर यूनिवर्सिटी मैं पढ़ण आली लड़कियां ते बात हुई सै। ये एक दम तै हुई चाण चक आली घटना कोन्या। हकीकत या सै अक स्कूल तै ले कै यूनिवर्सिटी ताहिं मैं प्रेक्टिकल के नम्बर कम लावण की, लैक्चर शार्ट करण की, इन्टरनल एसैसमेंट खराब करण की, खेलां में सलेक्शन ना होवण देवण की, पेपरां में पास ना होण दवण की, प्रवेश परीक्षावां मैं फेल करण की, पीएचडी पूरी ना होवण देण की आड़ लेकै छात्रावां का कई अध्यापकां अर कर्मियां द्वारा यौन शोषण एक घणी गहरी अर दूर-दूर ताहिं फैली समस्या है। जै इनै घटनावां नै देखां तो एक-एक स्कूल में इस हिंसा का शिकार होवण आली छात्रावां की बड़ी संख्या, स्कूलां मैं पाये गये कंडोम, गर्भपात की दवाइयां, चौकीदार तै लेकै डीईओ ताहिं का इसे काले कामां मैं शामिल होना, इसे कोढ़ी मास्टरां पै बख्त रहन्ते कार्रवाई करण के पंचायतों के प्रस्तावां तक की डीईओ बरगे अफसरां द्वारा अनदेखी, ऊंची जागां पै बैठे लोगों की आम अध्यापकों के बारे मैं बयानबाजी अर इन कोढ़ी मास्टरां नै बचावण की तलै ए तलै कोशिश बहोत किमै कहवै सै।
सविता बोली - म्हारी सरकार अर प्रशासन इन घटनावां नै अध्यापकां की नैतिक गिरावट, मानसिक विकार आदि कहकै अर एकाध अपराधी के खिलाफ आधी-अधूरी कार्रवाई करकै आंख्यां मैं धूल झोंकण की कोशिश करैं सैं। फत्ते बोल्या - मनै सुन्या सै लड़कियां के स्कूलां मैं पुरुष अध्यापक नहीं लाये जावैंगे। सत्ते बोल्या - घर मैं मां तो रहैती इस हिसाब तै पर बाबू काका अर पड़ोसी बी ताहने पड़ैंगे फेर तो। सविता बोली - मेरे आर्य समाजी भाई तो न्यों बी कहवैं थे अक सहशिक्षा नहीं होनी चाहिये। इसनै सत्यानाश कर दिया म्हारा फेर उनतै कोए न्यूं बूझै एक फेर बीर मरद नै गाड्डी के दो पहिये क्यों बताया करैं? कमला चुपचाप सुनै थी वा बोली - न्यों बी कैहन्ते पाज्यांगे अक आज काल ये छोरी बी कम कोन्या रैहरी। तरां-तरां की बेसिर पैर की बात बी सुणण मैं आरी सैं। न्यों कहतैं सैं अक लुगाई की जागां घर मैं सै। बाहर जाणा ए खतरे तै खाली कोन्या। सविता बोली - घर मैं कड़ै सुरक्षित सै या? घरेलू हिंसा के थोड़ी सै? बलात्कार की घटनावां मैं आधा कोढ़ घरक्यां कै रिश्तेदारां कै ए तो जिझै लागै सै। महिला ना बाहर सुरक्षित ना घर मैं सुरक्षित तो कड़ै जावैं? कविता - जावैं कड़ै फांसी खावैं अर सुरग मैं जागां पावै।
फत्ते बोल्या - फांसी खायें कोन्या काम चालै। महिला पुरुष दोनूआं नै मिलकै लड़ना पड़ैगा। जिबै कोए राह लिकड़ैगा। सत्ते - और के इन घटनावां के खिलाफ बी तो लोगां नै राह रोके, स्कूल बंद करे, इन कोढ़ियां कै खिलाफ कार्रवाई की आवाज ठाई सै। कविता - फत्ते या बात तो सही सै अर शुभ संकेत बी सै फेर निहित स्वार्थां नै, असामाजिक तत्वां नै हालात काबू कर लिये अर ‘गाम की इज्जत’ की दुहाई दे कै न्याय की पुकार पै बर्फ की सिल्ली धर दी। सत्ते - जातिवादी पंचायत बी गाम भाईचारे अर इज्जत की दुहाई दे कै उत्पीड़ित लड़कियां के परिवार आल्यां नै अपने बयान बदलन खातर मजबूर करण लागरी सैं। रोहतक जिले का मातो भैणी गाम सै उसके स्कूल की पांचमी क्लास की दो छात्रावां नै हैडमास्टर कै खिलाफ लिखित बयान दरज करवाये। धर्म सिंह जो बाद में आया था बोल्या - फेर कुछ हुआ नहीं उस हैडमास्टर का? सविता - ना के होना था। एमएलए की दाब मैं दोनों पक्षों का समझौता होग्या। फत्ते - मतलब बलात्कार करो अर फेर समझौता करल्यो? सत्ते - पूरे समाज में सड़ांध मारण लागली। फेर राह कोए दीखता ना। कमला बोली - मेरै तो उन ज्ञान विज्ञान आल्यां की बात समझ मैं आई। कविता - के कहया था उननै जिब पाछै सी गाम मैं आरे थे। कमला - उसने कहया था अक म्हारी लड़ाई कोए दूसरा लड़ण कोनी आवै। म्हारी अपनी लड़ाई हमनै खुद लड़नी पड़ैगी अर गाम-गाम मैं नये समाज सुधार आंदोलन की खातर शरीफ, ईमानदार, गरीब, अमीर, दलित, महिला, युवा सबनै सिर जोड़ कै न्यारी लीक पाड़नी पड़ैगी अर हाल साल का जो चो खरना सै यूं बदलना पड़ैगा।

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