भोर के राही
सुनो भोर के राही , अभी है रात ही
यहाँ रुकना नहीं
है ये रात की कगार , आशाओं की नांव
यहाँ बढ़ना नहीं
है थका हुआ तन , पर चलते रहो
है रिक्त ये मन , दिलासा यूं ही
नयी उम्मीदों को पार लगाकर
सूर्य तोरण को लो अपना .... भोर के ..
हाय शहीदों के लहू निशाँ
देखो राहों पर सपना था मगर
बनाना एक खुशियों का घर
मंजिल है दूर , पर चलना है
ये जो धुंधला सा है , ये छलना है
इस काली रात के अंत में ही है
एक उजला नया सवेरा... भोर के
आह्वान सुनो आह्वान गूंजे
हर दिग दिशाओं से
दुष्कर बाधाओं को तोड़े ज्वालामुखी जैसे
आह्वान सुनो आह्वान देखो आह्वान
सुनो भोर के राही , अभी है रात ही
यहाँ रुकना नहीं
है ये रात की कगार , आशाओं की नांव
यहाँ बढ़ना नहीं
है थका हुआ तन , पर चलते रहो
है रिक्त ये मन , दिलासा यूं ही
नयी उम्मीदों को पार लगाकर
सूर्य तोरण को लो अपना .... भोर के ..
हाय शहीदों के लहू निशाँ
देखो राहों पर सपना था मगर
बनाना एक खुशियों का घर
मंजिल है दूर , पर चलना है
ये जो धुंधला सा है , ये छलना है
इस काली रात के अंत में ही है
एक उजला नया सवेरा... भोर के
आह्वान सुनो आह्वान गूंजे
हर दिग दिशाओं से
दुष्कर बाधाओं को तोड़े ज्वालामुखी जैसे
आह्वान सुनो आह्वान देखो आह्वान
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें