शनिवार, 17 सितंबर 2016

गंगा जमुनी संस्कृति

गंगा जमुनी संस्कृति 
भारत की संस्कृति में एक वह युग था जब आर्य लोग विंध्याचल पर्वत को पार कर दक्षिण पथ को आक्रांत कर मध्य भारत  में घुसकर गोदावरी ,कृष्णा आदि नदियों के किनारों पर बड़े बड़े राज्य स्थापित कर चुके थे आया\
आर्य बन्धुओं की एक वर्ण शंकर जाति बन चुकी थी और भारत में पहले से रहने वाली अन्य जातियों द्रविड़ , नाग , आग्नेय आदि से उनके संम्बंध बन चुके थे ।  भारत भूमि में विभिन्न नस्लों , भाषाओँ  ओर संस्कृति के लोगों का समागम हो चूका था और उनके बीच संघर्ष की बात ख़त्म होकर वे एक समान सभ्यता और संस्कृति के अंग बनकर एक साथ मिलजुलकर रहने लगे थे । दूसरे अर्थों में विजित और विजेता अब एक होकर नयी सभ्यता , नयी संस्कृति का निर्माण कर रहे थे ।  दक्षिण के कई प्रान्तों सहित सौराष्ट्र , कोल ,चेरा, पांडेय अंग भंग , मगध ,कलिंग आदि नयी सभ्यता में ढलते नगर बनते जा रहे थे । 

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