प्रश्न 1-- जाति क्या है ?
जवाब-- जाति सामाजिक संरचना का वह रूप है इसमें ,(1) व्यक्ति किसी न किसी जाति का सदस्य होता है ,(2) समाज में जातियों का दर्जा एक सा न होकर ऊँच-नीच पर आधारित होता है,(3) व्यक्ति की जाति उसके जन्म से तय होती है वह उसे बदल नहीं सकता,(4) जाति के अपने नियम कानून होते हैं , जिनका पालन व्यक्ति को करना होता है,(5) दो जातियों के मध्य रोटी-बेटी का (अंतर्जातीय खानपान और अंतर्जातीय विवाह ) का रिश्ता नहीं हो सकता है,(6) व्यक्ति आजीविका के लिए जाति के लिए निर्धारित पेशे या व्यवसाय को ही कर सकता था, यहाँ पर था शब्द इसलिए इस्तेमाल किया गया है क्योंकि एक सीमा तक इस नियम में ढील आ गई है।
प्रश्न 2-- क्या जाति एक शाश्वत (हमेशा से मौजूद ) संस्था है ?
जवाब -- जाति प्रथा के पक्षधरों के द्वारा यह झूठा प्रचार किया जाता है कि जाति एक शाश्वत संस्था है । इस बात के स्पष्ट प्रमाण मिलते हैं कि जाति प्रथा हमेशा नहीं थी । हमारे देश में आदिकाल में समानता पर आधारित ऐसा समाज था, जिसमें किसी तरह का जाति या वर्ग भेद नहीं पाया जाता था । तदोपरांत वर्ण व्यवस्था का जन्म हुआ और आगे चलकर वर्ण व्यवस्था के चौखटे में विभिन्न जातियां उत्पन हुई|
प्रश्न 3- किस आधार पर कहा जाता है कि पहले वर्ण / जाति नहीं थी?
जवाब - ऋगवेद भारत का प्राचीनतम ग्रन्थ है । उसमें वर्णित सभ्यता को ऋग्वैदिक सभ्यता कहा जाता है । ऋग्वेद के पहले रचे गए अध्यायों में वर्ण व्यवस्था का कोई उल्लेख नहीं मिलता । इसका पहला उल्लेख ऋग्वेद के दसवें अध्याय के " पुरुष सूक्त" में मिलता है । यह वह अध्याय है जो विद्वानों के अनुसार बाद के समय में ऋग्वेद में जोड़ा गया । इस तरह यह साफ़ है कि वर्ण और जाति व्यवस्था सदैव नहीं थी।
जवाब-- जाति सामाजिक संरचना का वह रूप है इसमें ,(1) व्यक्ति किसी न किसी जाति का सदस्य होता है ,(2) समाज में जातियों का दर्जा एक सा न होकर ऊँच-नीच पर आधारित होता है,(3) व्यक्ति की जाति उसके जन्म से तय होती है वह उसे बदल नहीं सकता,(4) जाति के अपने नियम कानून होते हैं , जिनका पालन व्यक्ति को करना होता है,(5) दो जातियों के मध्य रोटी-बेटी का (अंतर्जातीय खानपान और अंतर्जातीय विवाह ) का रिश्ता नहीं हो सकता है,(6) व्यक्ति आजीविका के लिए जाति के लिए निर्धारित पेशे या व्यवसाय को ही कर सकता था, यहाँ पर था शब्द इसलिए इस्तेमाल किया गया है क्योंकि एक सीमा तक इस नियम में ढील आ गई है।
प्रश्न 2-- क्या जाति एक शाश्वत (हमेशा से मौजूद ) संस्था है ?
जवाब -- जाति प्रथा के पक्षधरों के द्वारा यह झूठा प्रचार किया जाता है कि जाति एक शाश्वत संस्था है । इस बात के स्पष्ट प्रमाण मिलते हैं कि जाति प्रथा हमेशा नहीं थी । हमारे देश में आदिकाल में समानता पर आधारित ऐसा समाज था, जिसमें किसी तरह का जाति या वर्ग भेद नहीं पाया जाता था । तदोपरांत वर्ण व्यवस्था का जन्म हुआ और आगे चलकर वर्ण व्यवस्था के चौखटे में विभिन्न जातियां उत्पन हुई|
प्रश्न 3- किस आधार पर कहा जाता है कि पहले वर्ण / जाति नहीं थी?
जवाब - ऋगवेद भारत का प्राचीनतम ग्रन्थ है । उसमें वर्णित सभ्यता को ऋग्वैदिक सभ्यता कहा जाता है । ऋग्वेद के पहले रचे गए अध्यायों में वर्ण व्यवस्था का कोई उल्लेख नहीं मिलता । इसका पहला उल्लेख ऋग्वेद के दसवें अध्याय के " पुरुष सूक्त" में मिलता है । यह वह अध्याय है जो विद्वानों के अनुसार बाद के समय में ऋग्वेद में जोड़ा गया । इस तरह यह साफ़ है कि वर्ण और जाति व्यवस्था सदैव नहीं थी।
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