मंगलवार, 13 सितंबर 2016

गेहूं-धान पर केंद्रित रहा ज्‍यादा ध्‍यान


1960 के दशक के मध्य से जब खाद्य असुरक्षा से जूझ रहे भारत में खाद्यान्न की पर्याप्त उपलब्धता के लिए कोशिशें शुरू हुईं तब से ध्यान गेहूं और धान पर केंद्रित रहा. वर्ष 1965-66 से अपनाई गयी नीतियों के कारण कुछ सालों में गेहूं-चावल और गन्ने के उत्पादन में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई, खेत भी भरे और सरकार के गोदाम भी; किन्तु तब दाल पर ध्यान ही नहीं दिया गया. भारतीय सामाजिक-आर्थिक और खाद्य सुरक्षा की व्यवस्था में अलग-अलग क्षेत्रों में लोग अपने घरेलू उपयोग के लिए दाल पैदा करते रहे थे. इसके साथ ही छोटे और मझौले किसान भी दाल पैदा करने में रुचि रखते थे किन्तु उन्हें कोई प्रोत्साहन ही नहीं मिला. आम आदमी की थाली से दाल के दूर होने का यह कारण रहा.

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