मंगलवार, 13 सितंबर 2016

शिक्षा दिवस के मौके पर


हमारे देश में 7,966 स्कूल ऐसे हैं ,जिनमें एक भी शिक्षक नहीं है । 1,05,530 स्कूलों में मात्र एक शिक्षक है ।शिक्षकों के 7.7 लाख पद रिक्त हैं । 56,529 स्कूलों में पेयजल की सुविधा उपलब्ध नहीं है । 5000 से ज्यादा स्कूलों में मात्र 1 क्लास रूम है । 10 में से 4 स्कूलों में बिजली नहीं है ।प्राइमरी स्कूलों में प्रवेश लेने वाले 44 फीसदी बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं ।
    भारत ओलम्पिक में पदकों की अपेक्षा करता है , लेकिन 10 में से 4 स्कूलों में खेल के मैदान ही नहीं । और जो देश  साफ्टवेयर प्रोफेशनल तैयार करने के लिए जाना जाता है ,वहां के 25 फीसदी स्कूलों में कंप्यूटर नहीं हैं ।
  व्यवस्थागत सुस्ती के प्रभाव को असर(एएसईआर ) 2014 की रिपोर्ट हमें बताती है कि पांचवीं कक्षा के 10 में से 5 से ज्यादा बच्चे दूसरी कक्षा का सामान्य पाठ नहीं पढ़ सकते। 5वीं कक्षा के 26 फीसदी से कुछ ही ज्यादा बच्चे भाग का सवाल हल कर सकते हैं । ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों के दूसरी कक्षा के 24 फीसदी बच्चे वर्णमाला या अक्षर नहीं पढ़ सकते ।
    वर्ष 2005 में निजी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या 16  फीसदी थी जो 2015 में 30 फीसदी हो गई।
अमर उजाला - 5.9.2016

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