मंगलवार, 13 सितंबर 2016

शिक्षक दिवस के मौके पर


बतौर एक विद्यार्थी, एक शिक्षक और एक डॉक्टर
एक शिक्षक हमेशा एक विद्यार्थी भी होता है ।
जरूरी नहीं की शिक्षक की सभी बातों को आँख मूंदकर मान लिया जाये।
एक टीचर शिक्षार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टि कौन यदि पैदा नहीं करता तो सोचने की बात है।
ज्यादातर टीचर बहुत मेहनती और ईमानदार हो सकते हैं मगर यदि उनमें वैज्ञानिक नजर नहीं है दुनिया को देखने समझने की तो वे अधूरे टीचर ही हैं एक तरह से।
एक शिक्षक अपने विद्यार्थियों को अपने दिए विचारों पर या शिक्षा पर सवाल उठाने की प्रेरणा भी देता है। जैसे आइंस्टीन ने अपनी खोजों पर खुद ही सवाल उठा दिए थे।
एक शिक्षक अंधविश्वासी नहीं होता ।
टीचर में यदि रूढ़िवादी विचार हैं भले ही वह कितना ही बढ़िया मैथ (हिसाब ) पढ़ा दे , आज के हिसाब से वह दकियानुशी इंसान ही माना जायेगा।
वास्तव में एक शिक्षक एक शिक्षार्थी को अपने विषय का ज्ञान तो देता है मगर साथ ही वह अपने दैनिक व्यवहार से शिक्षार्थी को बहुत कुछ शिखा रहा होता है। एक पियक्कड , धूम्रपान करने वाला, झूठ बोलने वाला, अंधविश्वासों का अनुयायी शिक्षक कैसी इंसानियत की शिक्षा दे रहा है अपने व्यवहार से यह हम सबके लिए सोचने का विषय है।
  शिक्षक को क्लास रूम से बाहर के अपने आचरण को भी देखना समझना होगा।
   मेरे ख्याल से हमारे महाकाव्य महाभारत में द्रोणाचार्य गुरु को एक आदर्श शिक्षक या गुरु के रूप में दर्शाया गया है और हम आज भी इसी नजर से देखते हैं । मेरे ख्याल से द्रोणाचार्य आदर्श गुरु नहीं था। अर्जुन को दुनिया का सबसे बड़ा तीरंदाज बनाने के लिए एकलव्य का दक्षिणा में अंगूठा मांग लेना एक जघन्य अपराध के रूप में देखा जाना चाहिए।
आज की शिक्षा और शिक्षक शिक्षार्थी को एक robbot ही बना रहे हैं इंसान नहीं
मारने पीटने से शिक्षार्थी को हम हैवानियत ही सिखा रहे होते हैं
    आज शिक्षक दिवस के मौके पर हम सब शिक्षकों को आत्म मंथन करने की जरूरत है शिक्षा के बारे। वैज्ञानिक दृष्टिकोण पैदा करने वाली शिक्षा ही आज के समाज विकास की सख्त जरूरत है। आओ हम सब मिलकर सोचें इस विषय पर ।

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