शुक्रवार, 2 सितंबर 2016

‘खरीदी बहू’ हरियाणा की

‘खरीदी बहू’ हरियाणा की
सते, नफे, फत्ते, कविता, सविता, सरिता अर भरपाई शनिवार नै कट्ठे हौके बतलाये। सते बोल्या - चहणियां मैं जावण नै होरे सैं फेर ब्याह बिना ईब्बी ना सरता। नफे बोल्या - के बात सते आज बहुत गुस्से मैं दीखै सै। सते बोल्या - ओ नहीं सै म्हारी गाल मैं नसीब सिंह ओ पिचहतर साल का होर्या सै। ल्याया सै बंगाली बहू। सरिता बोली - वो तो सात हजार मैं खरीद कै ल्याया सै अर दो हजार वो नहीं सै गुगण बर्या कै रमेश उसनै यो ब्याह करवावण के सर्विस चार्ज लिये सैं। नफे बोल्या - उसकी उमर कितनी सै। कविता बोली - वा तो पन्दरा साल की बतावै थी। फेर उसकै म्हारी बोली तो कोन्या समझ मैं आन्ती। नफे बोल्या - यो किसा ब्याह। नसीब सिंह 75 साल का अर वा बहू 15 साल की। योतो कसूता बेमेल ब्याह सै जै इसनै ब्याह बी मानैं तो। नसीब सिंह नै इसा क्यूं कर्या। सते बोल्या - कहवै तो न्यूं था अक वंश चलावण की खातर एक छोरा तो होणा ए चाहिये।
नफे सिंह बोल्या - तो इसकी खातर खरीद कै लियाओ बहू। सविता बोली - इसे छोरे आली मानसिकता के कारण तो हरियाणा मैं लड़कियां की संख्या चिंताजनक रूप तै घटती जावण लागरी सै। फते बोल्या - सविता जिब इसमैं कौनसी चिंता की बात सै। ये थोड़ी होंगी तो इनकी तो समाज मैं कीमत बधैगी। लोग आंख्यां पै बिठाकै राखैंगे लुगाइयां नै। सविता बोली - याहे तो गलतफहमी सै फते। छोरियां की समाज मैं संख्या कम होवण करकै कीमत कोन्या बधै, इनपै हिंसा बधैगी। ये प्याज, टमाटर थोड़ा ए सैं जो 60 रुपये किलो होज्यांगे। कविता बोली - या बात तो मनै सविता की सही लागै सै। पाछै सी अखबार मैं पढ़या था, अक हैदराबाद के व्यापारी हरियाणा की मुर्रा भैंस एक लाख रुपये की खरीद कै लेगे। अर, हम पांच-पांच हजार मैं बहू उड़ीसा, बंगाल, आसाम और बिहार तै खरीद कै ल्यावां। यासै म्हारी कीमत तो। नफे बोल्या - कोए गाम नहीं बचर्या जित 150 अर 200 ताहिं की संख्या मैं लड़के ना हों जो ओवर ऐज ना हो लिए हों। तड़कै ए एड्डी ठाकै बाट देखनी शुरू करदें सैं सगाई आल्यां की। सविता बोली - नौकरी ना, गरीबी बधगी, उपर तै बिन ब्याहे, साथ में टीवी का नशा, सैक्स अर हिंसा का सोच्या समझया पैकेज। इसे करकै ये तरां-तरां के विकृत रास्ते अपनावैं सैं। इस करकै समाज मैं रेप, छेड़खानी, बदमाशी की घटना दिन पै दिन बधती जावण लागरी सै।
सते बोल्या - एक खास बात और सै अक म्हारे गुहांड मैं जाटां की फालतू संख्या अपने गाम फालतू सैं। इनमें खाते-पीते परिवारां आले बालकां की तो इब्बै ब्याह शादी क्यूकरै हो ज्यावैं सै। सविता बोली - हां गुजरां, यादवां अर रोड़ी मैं बी इसा ए हाल बताया। बाहर तैं महिलावां नै खरीद कै ल्यावैं सैं। पाछै सी 10-12 गामां का सर्वे करकै देख्या था इन ज्ञान विज्ञान आल्यां नै। इनमै 50 महिला थी जो दूसरे प्रदेशां तै खरीद कै ल्या राखी थीं इसमें रोहतक, भिवानी, जींद अर झझर के जिल्यां के गाम थे। बलियाना अर बहुअकबरपुर नै तो सारे गामां के रिकार्ड तोड़ राखे थे। सते बोल्या - फेर इननै ‘असली बहू’ का दरजा बी तो कोन्या देन्ते। उनकै म्हारी बोली समझ मैं आवै ना, म्हारे उनकी बोली समझण मैं दिक्कत आवै। आज के युग मैं किसे माणस तै उसकी भाषा-बोली खोस्सण तै माड़ा काम कोए दूसरा कोना हो सकदा। सविता बोली - उस सर्वेक्षण मैं तो और बी कई भयानक सच्चाई साहमी आई। ये महिला ‘दोयम दर्जे की पत्नी’ कै ‘ल्याई औड़ बहू’ कै ‘खरीदी औड़ बहू’ के हिसाब तै जानी जावैं सैं। कई जागां तो इननै प्रदेशां के नाम तै बुलावैंगे ज्यूकर ‘पारवी बहू’, ‘बिहारी बहू’, ‘बंगाली बहू’ आदि आदि। इसतै न्यारा इनका रहन सहन, तौर तरीके, खानपान सबै किमै तो बदल ज्यावैं सैं। कविता बोली - कमाल की बात सै अक पूरे समर्पण और मूल पहचान खोए पाछै बी ये महिला ‘अन्य’, ‘बाहरी’ अर कै ’खरीदी औड़’ बहू के रूप मैंए मानी जावैं सैं। सरिता बोली - इननै भयंकर एकान्त अर सामाजिक अलगाव का सामना करना पड़ै सै। पशुआं ते बी बदतर जिन्दगी जीवैं सैं ये। कई घरां मैं शुरू शुरू मैं बेल मारकै राखैंगे अक कदे या भाज ना जावै। सविता बोली - ‘गरीब की बहू सबकी जोरू’ आली बात इस तथाकथित सभ्य समाज मैं आज ‘बाहरी बहू घर मैं सबकी जोरू’ के रूप मैं बदलगी।
कई बर तो दो-दो तीन-तीन बर बेच दी जावैं सैं। सते बोल्या - या कीसी विचित्र बात सै अक म्हारे गुहांड मैं अन्तर्जातीय ब्याह करण पै तो लड़के लड़कियां की हत्या करदी जावै अर इस ढाल की अंतर्जातीय खरीद फ़रोख्त की पूरी इजाजत सै। अर ये म्हारे नौजवान बी मुंह नहीं खोलते इसी बातां पै। नफे सिंह बोल्या - हरियाणा मैं महिलावां की खरीद फ़रोख्त का धन्धा पूरे जोरां पै चालया सै अर इसमैं बिचौलियां की चांदी होरी सै। वे मनमाने ढंग तै इस माहौल का फायदा ठारे सैं। सविता बोली - खरीद फ़रोख्त के इस घिनौने व्यापार मैं बाजार मतलब ‘मंडी’ अर पितृसता के सबतै पिछडे़ रूप रंग दोनूं एक होगे दीखैं सैं। जो ‘बाजार’ में पीस्सा खरच करैगा उसनै बदले मैं खरीद्या औड़ एक गुलाम मिलैगा जिसनै उन पीस्यां के एवज मैं सारी उमर गुलामी करनी सै। जै वा खरीदी औड़ी महिला अपनी गुलामी का विरोध करै तो वो दोबारा खरीदी अर बेची जा सकै सै। कविता बोली - एक और बात समझ मैं नहीं आन्ती अक हरियाणा मैं एक तरफ तो दहेज का व्यापार धड़ल्ले तै चाल रह्या अर बधता जावण लागर्या सै अर दूजे कान्ही महिलावां ने खरीद कै ल्यावण का रिवाज बधता जावण लागर्या सै। यो के रास्सा सै। हरियाणा के बुद्धिजीवी करेंगे कदे इस ढाल की बातां पै बिचार।

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