मंगलवार, 20 सितंबर 2016

" देशभक्त "

भगत सिंह के लिए जहाँ देशभक्ति का मतलब था -- जनता के लिए शोषणमुक्त समाज बनाने का संकल्प ।  आजादी की लड़ाई में क्रांतिकारियों की शहादत एक ऐसे मुल्क के लिए थी जो बराबरी , समानता और शोषण से मुक्त हो ।  जहाँ नेता और पूंजीपति घपलों  घोटालों से देश की जनता को न लूटें । 
    मगर भाजपा के " देशभक्त " क्या कर रहे हैं ? क्या इस देश की जनता को याद नहीं है कि कारगिल के शहीदों के ताबूत तक  घोटाले में इससे भाजपा के तथाकथित देशभक्त फंसे थे ।  सेना के लिए खरीद मदें दलाली और रिश्वत लेते हुए भाजपा अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण पकडे गए थे । मध्य प्रदेश में व्यापम घोटाला और उससे जुडी हत्याएं  देश की जनता भूली नहीं होगी ।  भाजपा नेता दिलीप सिंह जूदेव कैमरे के पर रिश्वत लेकर  यह बोलते हुए पकड़े गए थे कि "पैसा खुदा नहीं तो खुदा से कम भी नहीं "।    
क्या जब जनता महंगाई की  मार से परेशान थी तभी मोदी जी की सरकार ने पूंजीपतियों  के कर्ज माफी की घोषणाएं नहीं की थी ? ऐसे हैं ये "राष्ट्रवादी " और यही है संघ और भाजपा की "देशभक्ति "। 
आज बात पर देश भक्ति का प्रमाण पत्र बांटने वाले संघ -भाजपा गिरोह की असलियत जानने के लिए हमें एक बार स्वतंत्रता आंदोलन में इनकी करतूतों के इतिहास पर नजर डाल लेनी चाहिए । 

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